रेलगाड़ी में चोदा

मेरी अन्तिम परीक्षाएँ समाप्त हो चुकी थीं और मैं उदयपुर से अपने पैतृक नगर सूरत ट्रेन से जाने वाला था। शाम के चार बजे थे, मैं सही समय पर स्टेशन पहुँच गया था, मेरी सीट किनारे और नीचे वाली थी। मैं ट्रेन में बैठा हुआ सोच रहा था कि आगे क्या करना है। वैसे ट्रेन में कोई अधिक भीड़ नहीं थी। जैसे ही ट्रेन चलने लगी, मैंने देखा कि एक औरत जो लगभग तीस-बत्तीस साल की थी, आई। उसने मुझसे पूछा- आपकी सीट कौन सी है?

मैंने उसे बताया – "सीट नम्बर ग्यारह"

उसने अपनी टिकट देखी उसकी सीट की संख्या बारह थी, यानि ऊपर वाली सीट। उसके साथ उसका तीन साल का लड़का भी था। वह खिड़की पर आकर बैठ गया।

उस महिला ने मुझसे पूछा,"क्या सामान रखने में आप मेरी थोड़ी सी सहायता कर सकते हैं?"

मैंने उसकी सहायता की और सारा सामान सही-सही सीट के नीचे रख दिया। वह ऊपर जाकर बैठ गई। उसका लड़का नीचे ही बैठा था और मेरे साथ खेल रहा था।

ट्रेन चलती गई, एक घंटे के बाद पहला स्टेशन आया, तो वह नीचे उतर आई और चाय वाले को आवाज़ देकर चाय लेकर पीने लगी। मैंने भी चाय ली। जब वह पैसे देने लगी, तो मैंने कहा कि मैं दे देता हूँ, और मैंने दोनों की चाय के पैसे दे दिए। थोड़ी देर बाद हम बातें करने लगे। वह नीचे की सीट पर ही बैठी थी।

"मेरा बच्चा परेशान तो नहीं कर रहा है?"

"नहीं… बिल्कुल नहीं" मैंने उत्तर दिया।

"आप कहाँ जा रही हैं?" चाय पीते-पीते ही मैंने उससे पूछा।

"मुम्बई !" उसने बताया।

"आपके पति नहीं जा रहे हैं?"

उसने बताया कि उसका तलाक़ हो चुका है और वह अपने भाई के घर जा रही है। कुछ देर की चुप्पी के बाद हमारी बातें दुबारा शुरु हो गईं।

उसने मुझसे पूछा,"आप क्या करते हैं?"

"मैंने अभी-अभी कॉलेज की पढ़ाई खत्म की है और मैं घर जा रहा हूँ।"

थोड़ी देर बाद मैंने अपने बैग में से मिक्सचर नमकीन निकाले और उसे ऑफर किया तो वो भी मेरे साथ खाने लगी। अब मैं उसके बिल्कुल पास बैठा था और मैंने मिक्सचर वाला हाथ उसकी गोद में रख दिया तो मेरा हाथ उसकी जाँघ को छूने लगा। ट्रेन के हिलने से मेरा हाथ उसकी जाँघ से रगड़ रहा था, शायद उसे भी अच्छा लग रहा था।

फिर हम दोनों के बीच काफी बातें हुईं। उसने मुझसे पूछा- क्या तुम्हारी कोई गर्लफ्रेण्ड है?

तो मैंने कहा- नहीं !

उसने कहा- ऐसा हो ही नहीं सकता।

तो मैंने कहा- कोई पसन्द ही नहीं आई।

थोड़ी देर बाद शाम के सात बज गए और बाहर अन्धेरा हो गया। ट्रेन क़रीब-क़रीब खाली थी। हम लोगों को कोई भी देखता तो यही समझता था कि पति-पत्नी होंगे क्योंकि हम काफी आराम से बातें कर रहे थे।

कुछ देर के बाद मैं पैर फैलाने को हुआ तो वह सरक गई। मैंने भी उससे कहा- आप थक गईं होंगी, आप भी पैर फैला लीजिए।

वह भी अधलेटी सी हो गई। अब उसके पाँव मेरी ओर और मेरे पाँव उसकी ओर थे। उस समय थोड़ी-थोड़ी ठंड लग रही थी, तो मैंने शॉल ओढ़ ली। मेरा एक पाँव उसकी गाँड से और उसका एक पाँव मेरी गाँड से छू रहा था।

थोड़ी देर में मुझे अच्छा लगने लगा और वह भी उत्तेजित हो गई। मेरा लंड खड़ा हो गया। फिर मैंने थोड़ी और आज़ादी से अपने पैरों को उससे छुआया तो वह कुछ भी नहीं बोली। मैं भी समझ चुका था कि वह तैयार है। अब वह भी मुझे ठीक से छूने लगी थी। मैंने खुज़ली करने के बहाने उसके पैरों को छुआ तो उसने कहा- ठीक से पैर फैला लो।

मैंने कहा- ठीक है, फिर मैं थोड़ा और लेट गया। थोड़ी देर बाद हमने खाना खा लिया।

ट्रेन में सभी शायद यही समझ रहे होंगे कि हम पति-पत्नी हैं। कुछ देर के बाद उसका बच्चा सो गया। वह नीचे ही सो रहा था। हमने ऊपर में किनारे बैग रखकर उसे ऊपर की बर्थ पर सुला दिया। अब ट्रेन में बत्ती धीरे-धीरे बुझ
चुकी थी। सिर्फ दो-तीन केबिन में ही नाईट-बल्बें जल रही थीं। इत्तेफाक़ से हमारी जगह पर बत्ती लगी ही नहीं थी।

हम फिर शॉल ओढ़ कर फिर से वैसे ही अधलेटे रहे। उसने फिर से गर्लफ्रेण्ड की बात छेड़ दी, तो मैंने कहा,"गर्लफ्रेण्ड तो नहीं है, पर…"

"पर क्या…?"

"कुछ नहीं…?"

उसके बार-बार पूछने पर मैंने कहा,"आप बुरा मान जाएँगी"

"नहीं मानूँगी।"

"…हाँ, पर मैंने मस्ती बहुत की है…"

"और वो…?"

अब वह भी उत्तेजित लग रही थी और पूरी लेट गई थी और मैं भी…, अब मेरे लंड उसकी गाँड के पास छू रहा था। मेरा ८ इंच का लण्ड खड़ा हो गया। मैंने लंड को सम्भालने के लिए हाथ बढ़ाया तो उसने मेरा हाथ पकड़ लिया। अब मैं समझ गया कि वह पूरी तरह से तैयार है।

अब मैं उसका पेट नीचे से सहला रहा था फिर उसके पेटीकोट में नीचे से हाथ डालकर उसकी जाँघों तक भी सहलाना शुरु किया। वह पूरी तरह से गरम हो चुकी थी। मैंने उससे कहा कि मेरे किनारे में आ जाए तो वो आ गई। अब हम एक ही किनारे में लेटे हुए थे। हमने कम्बल ओढ़ ली थी, क्योंकि एक तो ठंड वैसे भी थी और ऊपर से एसी कोच होने के कारण ठंड का असर अधिक ही था। मैंने सामने का परदा डाल दिया और पाया कि ठंड की वजह से सारे लोग सो रहे थे। परदा डाल कर मैं वापस आया।

मैंने उसे चूमा और उसकी चूचियों को ब्लाऊज़ के ऊपर से ही दबाने लगा। उसने मेरा लंड पकड़ लिया था। मैं उसकी चूचियाँ दबा रहा था और वह पैन्ट के ऊपर से ही मेरे लंड को दबा रही थी। धीरे-धीरे मैं आगे बढ़ा और उसके ब्लाऊज़
में हाथ डालकर उसकी चूचियों को दबाने लगा।

मैंने उसकी ब्लाऊज़ के हुक खोल दिए, उसकी मलाई जैसी चूचियाँ मुझे दिख रही थीं। मैंने उसकी चूचियाँ अपने मुँह में ले लीं और कभी बाईं तो कभी दाईं चूची को चूसने लगा। मैं अब उसे चोदना ही चाहता था, मैंने उससे कहा- तुम
टॉयलेट में आ जाओ। मैं पहले जाता हूँ, तुम दो मिनट के बाद आ जाना।

मैंने टॉयलेट में जाते समय अटेण्डर को दो सौ रुपये दिए और कहा कि बच्चे का ख्याल रखना, तो वह समझ गया।

मैं टॉयलेट में जाकर प्रतीक्षा करने लगा। दो मिनट को बाद वह उसने धीरे से दरवाज़ा खोला, मैंने उसे झट से अन्दर खींच लिया और दरवाज़ा लॉक कर लिया। मैंने उसकी ब्लाऊज़ खोल दी और साड़ी भी अलग कर उसकी चूचियों को चूसने लगा। वह फिर से उत्तेजित हो रही थी। मैंने उसकी पेटीकोट खोल कर उसे पूरी नंगी ही कर दिया। मैंने देखा, उसकी चूत पर एक भी बाल नहीं था। उसकी क्लीन-शेव चूत को देखकर मैं उसकी चूत रगड़ने लगा।

अब उसने मेरी पैन्ट की ज़िप खोली और मेरे लंड को हिलाने लगी। थोड़ी देर बाद वह झुकी और लंड को गप्प से अपने मुँह में डाल लिया और लॉलीपॉप की तरह चूसने लगी। मैं तो सातवें आसमान पर था। मैंने मेरी पैन्ट और टी-शर्ट पूरी उतार दी। मैं उसकी चूत पर हाथ रख रगड़ रहा था, जिससे उसकी चूत ने रस छोड़ना शुरु कर दिया। मैं नीचे झुका और उसकी चूत चाटने लगा। वह और भी उत्तेजना से भर गई। उसके मुँह से सिसकारियाँ निकलने लगीं। मैं भी मज़े ले-लेकर उसकी चूत को चाट रहा था और दाहिने हाथ से उसकी चूचियों को बारी-बारी से दबा भी रहा था।

इतना सब होने के बाद अब उससे रहा नहीं जा रहा था… उसने मुझसे कहा- अब मत तड़पाओ…

उसके ऐसा कहने पर मैंने उसका एक पाँव टॉयलेट के कमोड पर रखा तो उसकी चूत फैल गई, और मैंने अपना लंड एक ही बार में पूरा-का-पूरा उसकी चूत में डाल दिया। वह चिल्ला पड़ी, मैंने तुरन्त उसे फ्रेंच किस दिया और धीरे-धीरे अपने लंड को अन्दर-बाहर करने लगा।

वह सिसकियाँ ले रही थी। अब वह छूटने वाली थी और उत्तेजना के मारे बड़बड़ा रही थी- और ज़ोर से, और ज़ोर से… मैं अब लम्बे-लम्बे झटके देने लगा और दो मिनट के बाद हम दोनों एक ही साथ झड़ गए।

हम बाहर आए और अपनी सीट पर बैठ गए और एक-दूसरे को चूमने लगे। वह धीरे-धीरे मेरे लंड को सहला रही थी और मैं उसकी चूचियाँ भी दबा रहा था। थोड़ी ही देर में मेरा लंड फिर से कड़क हो गया तो मैंने चुदाई का
कार्यक्रम बर्थ पर भी शुरु कर दिया। हमारा यही कार्यक्रम पूरी रात चला। मैंने उसे रात भर में तीन बार और चोदा।

सुबह हमने एक-दूसरे को चूमा और अलविदा कह चल पड़े।

Advertisements

कली को फ़ूल बना दिया

मेरे पड़ोस में पप्पी रहती थी। वो ११ मैं पढ़ रही थी। उसकी उमर १८ साल थी, पप्पी बहुत सेक्सी थी। उसके बूब्स मुझे बहुत अच्छे लगते थे। वो एकदम हरी-भरी थी। मेरी उसके घरवालों के साथ और उसके साथ अच्छी अक्सर बातें होती रहती थी, क्योंकि उसकी और हमारी छत एक ही थी, बीच में सिर्फ़ ३’ की एक दीवार थी। वो पढ़ाई में कमजोर थी। उसके एग्जाम आने वाले थे, उसकी मम्मी ने मुझसे कहा- परेश, पप्पी के एग्जाम शुरू होने वाले हैं, वो पढ़ाई में कमजोर हैं, उसे थोड़ा समय निकाल कर पढ़ा दिया करो। मैंने हां कर दी।

मैं रोज रात को ८ बजे उसके घर उसे पढ़ाने जाता। मेरा कमरा फ़र्स्ट फ़्लोर पर था, उसका भी एक कमरा फ़र्स्ट फ़्लोर पर था, वो बन्द रहता था क्योंकि उसके मम्मी, पापा और उसका छोटा भाई जो १२ साल का था सब ग्राउंड फ़्लोर पर ही रहते थे। दो दिन के बाद मैंने उसकी मम्मी से कहा, “भाभी नीचे हम डिस्टर्ब होते हैं, क्या हम आपके
ऊपर वाले कमरे में पढ़ाई कर सकते हैं?”

उन्होंने तुरन्त हां कर दी। मैं रोज़ रात को ८ बजे जाता और रात के ११-१२ बजे तक वहाँ पर रुकता था। वो पढ़ाई में बहुत कमजोर थी। उसे अच्छे से कुछ भी याद नहीं होता था, मैंने उसकी मम्मी से कहा तो उन्होने बोला कि अगर नहीं पढ़ती है तो पिटाई कर दिया करो, तो मैंने एक दिन उसे उसकी मम्मी के सामने ही हलका सा एक
थप्पड़ मारा, उस दिन मैंने उसे पहली बार छुआ था, उसका गाल एकदम गरम था, थप्पड़ खा कर वो मुस्कराने लगी।

अगले दिन उसने जींस और शर्ट जिसके बटन सामने खुलते थे पहने हुए थी, मैं उसके सामने बैठा कर उसे मैथ्स समझा रहा था, उसके शर्ट का एक बटन टूटा हुआ था, उसका ध्यान पढ़ाई में था और मेरा ध्यान उसके टूटे हुए बटन के पीछे उसके बूब्स पर था, उसकी काली ब्रा और गोरे बूब्स मेरे सामने दिख रहे थे। अचानक उसका ध्यान अपने टूटे हुए बटन पर गया तो वो शरमाई और नीचे जा कर शर्ट बदल कर आई।

मैंने पूछा- क्या हुआ?

तो उसने बोला- आप मुझे अच्छे से पढ़ा नहीं पा रहे थे।

अगले दिन उसने टाइट टी शर्ट पहनी हुई थी जिसमें उसके बूब्स का उभार गजब ढा रहा था। मेरा ध्यान वहीं पर था।

उसने पूछा, “परेश, क्या हुआ ? तुम्हारा ध्यान कहाँ है?”

मैंने कहा, “मेरा ध्यान तुझमें है !”

वो शरमाई और बोली- धत !

मेरी हिम्मत बढ़ गई। मैंने हलके से उसके गाल पर चपत लगाया और प्यार से मुस्कराया। जवाब में वो भी मुस्कराई।

मेरी हिम्मत और बढ़ी, मैंने उसके दोनो गालों को पकड़ कर उसके होठों को चूम लिया, उसने दूर हटाते हुए कहा- मम्मी आ जायेगी ! और हम वापस पढ़ाई में लग गये।

अगले दिन उसके मम्मी, पापा और उसका भाई किसी काम से बाहर गये थे, जाते समय उसकी मम्मी ने मुझसे कहा- पप्पी घर पर अकेली है, तुम रात को हमारे घर पर ही सो जाना ! मुझे तो जैसे मन मांगी मुराद मिल गई।

रात को ८ बजे मैं उसके घर गया। वो ग्राउन्ड फ़्लोर पर थी। आज उसने सुन्दर सी काले रंग की नाइटी पहन रखी थी। हम दो घण्टे तक पढ़ते रहे। बाद में वो अपने कमरे में जाकर सो गई, मैं बाहर हाल में सो गया। अचानक वहाँ लाइट चली गई। वो कमरे से बाहर आई और मेरे पास हाल में बेड पर बैठ गई और हम बातें करने लगे।

उसने मुझसे कहा,”परेश, आइ लव यू !”

मैंने कुछ नहीं बोला और उसे अपनी बाहों में ले लिया। वो चुप रही, उसने कुछ भी नहीं बोला। मैंने उसे चूमना शुरू कर दिया, वो हल्का सा विरोध करती रही, इतने में लाइट आ गई तो मैंने देख उसका चेहरा एकदम लाल हो रहा है और आँखे अपने आप बन्द हो रही हैं।

मैंने धीरे से उसके बूब्स पर हाथ फिराया तो वो एक दम से मुझसे चिपक गई। मैं उसके रसीले होठों को चूमता रहा और हाथों से धीरे धीरे उसके बूब्स को दबाता रहा, वो मदहोश हो गई।

मैं थोड़ा आगे बढ़ा और मैंने उसकी नाइटी धीरे से उतार दी। अब वो मेरे सामने लेमन रंग की ब्रा और पैन्टी में थी, उसकी फ़िगर देख कर मैं अपने होश खो बैठा। मैंने उसके पूरे बदन को चूमना शुरू कर दिया। वो भी मुझे चूमने लगी और मेरे कपड़े उतारने लगी। अब मैं भी सिर्फ़ अन्डरविअर में था। मैं उसे चूमता रहा और उसके पूरे शरीर पर हाथ घुमाता रहा। उसके स्तन क्या पत्थर की तरह कड़क थे। मैंने अपने हाथ उसके पीछे ले जाकर उसकी ब्रा का हुक खोल दिया, एक झटके से ब्रा उसके हाथ में आ गई और उसके बूब्स आज़ाद हो गये, इससे पहले भी मैंने ३-४ बार सेक्स किया था लेकिन उसका हुस्न देख कर मैं अपने होश खो गया और धीरे से मैंने उसकी चड्डी भी उतार दी। बदले में उसने भी मेरी चड्डी उतार दी।

अब हम दोनों नंगे थे। हम दोनों एक दूसरे को चाटते रहे। मैंने अपना मुँह उसके निप्पल पर लगाया और उसको चूसने लगा उसने मेरे लण्ड को हाथ में ले लिया और उसको सहलाने लगी। मेरा लण्ड लोहे की तरह एक दम कड़क हो गया। मैंने धीरे से अपने लण्ड को उसके मुँह के पास किया तो वो उसे चूमने लगी। मैंने उसे मुँह में लेने को कहा
तो वो उसे मुँह में लेकर चूसने लगी।

मेरा बड़ा बुरा हाल हो रहा था, मैंने अपनी उँगली धीरे से उसकी चूत मे डाल दी। उसकी चूत गरम तवे की तरह तप रही थी। मेरी उँगलियां उसकी चूत की गरमी महसूस कर रही थी।

वो मेरे लण्ड को चूसती रही और मेरी उँगलियां उसकी चूत के साथ खेलती रही। अब वो चुदवाने के लिये एकदम तैयार थी। उसकी चूत मेरी उँगलियों की हरकत से पानी से भर गई और गीली हो गई। मैं अपना मुँह उसकी चूत पर ले गया और उसकी जाँघों और उसकी चूत को चूमने लगा। वो जोर जोर से पाँव हिलाने लगी। मैंने अपनी जीभ उसकी चूत में डाल दी और उसके पानी को पीने लगा। वो एक दम मदहोश हो गई और मेरे लण्ड को दाँत चुभाते हुये और जोर से चूसने लगी।

थोड़ी देर में उसकी चूत ने और पानी छोड़ दिया। मैं उसे पीता रहा। कुँवारी चूत का पानी पीने का मेरा यह पहला मौका था और उसके मुँह में मेरे लण्ड ने भी ढेर सारा पानी छोड़ दिया जो सीधे उसके गले मे गया। उसने बड़े प्यार से मेरा पूरा पानी पी लिया और एक भी बून्द बाहर नहीं गिरने दी, और मेरे लण्ड को चूसना जारी रखा।

३-४ मिनट में मेरा लण्ड वापस तन गया। उसकी हरकतों से मुझे लगने लगा कि वो चुदाई के लिये बहुत आतुर है।

मैंने उसे बेड पर सीधा लिटाया और उसकी गाँड के नीचे एक तकिया लगाया जिससे उसकी चूत ऊपर आ गई। मैं अपने लण्ड को उसकी चूत पर फिराने लगा। उसकी चूत तन्दूर की तरह गरम थी।

उसने कहा कि उसने कभी चुदवाया नहीं है। मेरा इतना मोटा लण्ड उसकी चूत में कैसे जायेगा। मैंने कहा- थोड़ा सा दर्द होगा, लेकिन बाद मे मज़ा आयेगा।

मैंने अपने लण्ड और उसकी चूत पर क्रीम लगाई और अपना लण्ड धीरे से उसकी चूत में घुसाने लगा। उसकी चूत बहुत टाइट थी।

मेरे लण्ड का सुपाड़ा उसके अन्दर जाते ही वो जोर से बोली,”बहुत दर्द हो रहा है !” मैं वहीं पर रूक गया और उसकी चूचियों को सहलाने लगा और उसके होठों को चूमने लगा। थोड़ी देर मे पप्पी जोश में आ गई और अपने चूतड़ उठाने लगी। मैंने ऊपर से थोड़ा जोर लगाया, मेरा लण्ड उसकी चूत में ३ इन्च घुस गया। वो जोर से चिल्लाने
लगी और पसीने में नहा गई, मुझसे कहने लगी,”प्लीज ! बाहर निकालो !”

मैंने उससे बोला- पहली बार में थोड़ा दर्द होता है ! और उसे चूमने लगा।

कुछ देर बाद वो शान्त हो गई।

मैंने उससे बोला- अपना मुँह बन्द रखना। मैं अभी अपना पूरा लण्ड तेरी चूत में डालूंगा।

उसने जोश मे आकर कहा- अगर मैं चीखूं भी तो भी तुम नहीं रुकना।

मैं धीरे धीरे अपने लण्ड को उसकी चूत में ३ इन्च में अन्दर बाहर करने लगा। उसे भी मज़ा आने लगा और वो मुझसे ज्यादा चिपकने लगी। अचानक मैंने एक जोर का झटका दिया और अपना पूरा 7 इन्च का लण्ड उसकी चूत में घुसेड़ दिया। वो बहुत जोर से चीखी और जोर से तड़पने लगी।

मैं वहीं पर रूक गया। उसकी चूत में से खून निकलने लगा था। वो जोर जोर से रोने लगी, मैंने उसे प्यार से समझाया कि मेरा पूरा लण्ड उसकी चूत में चल गया है। अभी थोड़ा सा दर्द होगा लेकिन बाद मे जो मज़ा आयेगा वो पूरा दर्द भुला देगा।

मैंने उसके लाख कहने पर भी अपना लण्ड उसकी चूत से नहीं निकाला।

पाँच मिनट तक मैं सिर्फ़ उसके बूब्स को चूसता रहा और उसके पूरे शरीर पर हाथ फ़िराता रहा। धीरे धीरे उसका दर्द कम हुआ और उसे जोश आने लगा। वो मुझसे चिपक गई और अपने चूतड़ उठाने लगी। उसकी चूत मेरे लण्ड को कभी जकड़ती और कभी ढीला छोड़ती। मैं इशारा समझ गया और मैंने धीरे धीरे अपने लण्ड को उसकी चूत में अन्दर बाहर करना शुरू कर दिया। थोड़ी देर मैं उसे भी मज़ा आने लगा और वो भी हिल हिल कर चुदाइ का मज़ा लेने लगी। १० मिनट तक मैं उसे चोदता रहा। इतनी देर मे उसकी चूत गीली हो गई और उसका दर्द कम हो गया, और वो बहुत मज़े लेकर चुदवाने लगी।

करीब १५ मिनट के बाद मैंने उसे कहा- मैं झड़ने वाला हूँ।

मैंने उसे कस के पकड़ा, जिससे उसके मुंह से आवाज न निकले उसके होंठ अपने होठों में मजबूती से दबा लिये और सरपट घोड़ा दौड़ा दिया। मैं पूरे जोश में आ चुका था और मैं अपना लण्ड पूरा बाहर निकाल कर एक धक्के से पूरा घुसा देता, पूरी फूर्ती से।

अब वो बुरी तरह छूटने के लिये दम लगा रही थी और मैं उसे उतना ही मजबूती से पकड़ रहा था। झटके पर झटके ! धक्के पर धक्के।

एक दो मिनट में उसकी चूत बुरी तरह से मेरे लण्ड को रोकने की कोशिश कर रही थी। और मुझे साफ़ पता चला जैसे कि उसकी चूत ने एक जोर से पिचकारी मेरे लण्ड पर छोड़ दी। अब मैंने रफ़्तार और धक्के की ताकत बढ़ा दी और बड़े दम लगाने पर मैं भी चरम आनन्द पर पहुँच गया। ऐसा लगा जैसे मेरे लण्ड से कोई टँकी खुल गई हो और मैंने बहुत सारा पानी उसकी चूत में भर दिया। करीब १० मिनट तक उसके ऊपर लेटा रहा। हम दोनों की सांस की आवाज से पूरा कमरा गूँज रहा था।

उसके बाद हम दोनो उठे और बाथरूम में जाकर उसकी चूत और अपने लण्ड को धो कर साफ़ किया और वापस आकर बेड पर बैठ गये।

मेरा लण्ड इतनी देर में वापस तन कर खड़ा हो गया। उसे तना देखकर वो बोली- अब नहीं परेश, अभी दो घण्टे सो लेते हैं, उसके बाद करेंगे।

मैंने कहा- ठीक है।

हमने अपने कपड़े पहन लिये और सोने लगे। लेकिन आंखो में नींद कहाँ !

करीब एक घण्टे बाद मैंने उसके और अपने कपड़े फिर उतार दिये। उसने कहा कि प्यार से करना क्योंकि अभी थोड़ा थोड़ा दर्द हो रहा है। मैंने उसके बदन को दबाना शुरू कर दिया, बच्चों की तरह उसका दूध पीने लगा तो वह कसमसा उठी। और उसने भी मुझे चूमना शूरू कर दिया और खुद-ब-खुद 69 की पोजीशन में आ गये। वो मेरे लण्ड को चूस रही थी और मैं उसकी चूत को। फिर मैं काम शास्त्र में बताये एक एक आसन से उसे चोदने लगा और एक ही रात में कली को खिला कर फ़ूल बना दिया। फिर तो हम दोनों को जब भी मौका मिलता वो मुझसे चुदवाती थी।

© Me Mast

सपना को चोद दिया

बात उन दिनों की है जब मेरी ३५ वर्षीय मौसी अपने ३ बच्चों के साथ सहारनपुर से आई थी। उनकी शादी १६ साल पहले एक सरकारी कर्मचारी की साथ हुई थी।

सपना मौसी अपने फिगर का बहुत ख्याल रखती थी। उनका रंग गोरा, गाल गुलाबी थे, पर चुँचियां बहुत बड़ी नहीं थी। पर हां ! उनकी गांड बहुत जबरदस्त थी, जब वो चलती थी तब मेरा ध्यान अक्सर उनकी गांड पर अटक जाता और वो साड़ी ही पहना करती थी! कसम से वो साड़ी में कयामत लगती थी, उनका साड़ी बांधने का अंदाज भी अलग था।

वो नाभि के काफी नीचे साड़ी बांधती थी और सदा गहरे गले का ब्लाउज पहना करती थी जिससे से वो जब भी झुकती थी तो उनकी दूध डेयरी का नजारा मैं बहुत आराम से देख करता था।

मै अपनी मम्मी, बुआ व बहन की चुदाई करने के बाद काफी चुदक्कड़ हो गया था।

मैने एक रात मम्मी को चोदते हुए मौसी की तारीफ की तो मम्मी ने कहा- साले ! मादरचोद ! मुझे पहले ही पता था कि तू मेरी बहन को बिना चोदे नहीं छोड़ेगा,क्योंकि मैं तुझे उसकी दूध डेयरी में झांकते हुए अनेक बार देख चुकी हूँ और जब भी तू उसके चूतड़ों की तरफ देखता है तो मै समझ जाती हूँ कि तू उसकी गांड भी मारेगा और वो छिनाल भी ऐसा ब्लाउज पहनती है कि सारी चूँचियां बाहर ताकती रहती हैं, रंडी ऊपर के हुक भी नही लगाती…

कई बार तो तेरे पिता जी भी मुझसे उसको सही ढंग से कपड़े पहनने के लिए कहने को कहते।

वो कहते- समझा लो मेरी साली को, वरना बाद में ना कहना कि मैंने उसकी चूँची दबा दी !

और मैं हंस कर टाल देती थी। लेकिन अब तू अपनी मौसी को चोदने को कह रहा है, तू भी बहुत हरामी हो गया है।

आप सब जानते ही होंगे कि मम्मी को चुदवाते वक़्त गालियों से बात करना बहुत अच्छा लगता है। तभी मैं जो इतनी देर से मम्मी की बकबक सुन सुने जा रहा था, उनके बड़े-2 ब्लैडर जैसे स्तन दबाते हुए बोला- तो साली हर्ज ही क्या है जो अपनी बहन को मेरा लौड़ा खिला देगी तो उसको भी तेरे जैसे मजा आ जाएगा, वो तो वैसे भी तुझ से छोटी है और वैसे भी मौसा जी ज्यादातर घर से बाहर ही रहते हैं, उसकी चूत भी प्यासी ही रहती होगी। कसम से जब मेरा लौड़ा उसकी टाइट चूत में जायेगा तब बहुत मज़ा आयेगा। मम्मी प्लीज़ ! एक बार चुदवा दो न !

तब मम्मी ने कहा- अच्छा-2 अब अभी तो मेरी चुदाई कर !

उसके बाद मैने मम्मी की चूत को चाट कर उनकी बुर में बहुत ही ज़ोरदार ढंग से अपना पूरा 9" का लौड़ा धंसा कर बहुत बेरहमी से पेला। मम्मी ने थोडी देर बाद ही चूत से पानी छोड़ दिया। फ़िर मैने एक बार पलट कर उनकी गांड मारी जिससे मेरी माँ बहुत थक गई और फ़िर हम दोनों सो गये।

दूसरे दिन जब मैं नहा रहा था तब मैंने मम्मी की आवाज़ सुनी, वो सपनी मौसी से कह रही थी- सपना तुम उदास लग रही हो ?

तो मौसी ने न-नुकर करने के बाद बताया- क्या बताऊँ दीदी ! आजकल रिंकू के पापा मेरी ओर बिल्कुल भी ध्यान नहीं देते, पहले वो मेरे साथ लगभग रोज़ ही सम्भोग करते थे(इतने में मैं नहा कर कमरे मे आ गया था)।

फ़िर माँ ने कहा- मैं तेरी परेशानी समझ गई, तू यही कहना चाह्ती है कि आनंद तेरी ठीक तरह से चुदाई नहीं करता। पर इसमें परेशान होने की कोइ बात नही क्योंकि वो म्हारे लिए ही काम कर रहा है, अब सारा वक्त तो तेरी चूत मारने में नहीं लगा सकता। चल कोई बात नहीं ! आज मैं तेरी प्यास बुझा दूंगी !

तब मौसी ने कहा- किससे? क्या मोमबत्ती से?

तो मम्मी बोली- नहीं पूरे 9" का लौड़ा घुसवाउंगी आज तेरी चूत में।

मम्मी की बात सुन कर मैं खुश हो गया। थोड़ी देर बाद ही मैने सुना कि मम्मी मौसी से बोली,"देख सपना, मैं तुझे चुदवा तो दूंगी, पर एक शर्त है !"

मौसी बोली,"वो क्या?"

मम्मी बोली,"तुझे चूत और लंड की बातें खुल कर किसी रंडी की तरह करनी होंगी !"

मौसी मान गई।

मौसी ने पूछा- आप मुझे चुदवाओगी किससे?

मम्मी ने कहा- यह तो रात को ही पता चलेगा।

रात होते सबके सोने के बाद मम्मी मेरे कमरे में आई और मेरे होंठों पर किस करते हुए बोली,"चल मेरे चोदू राजा ! आज अपनी मौसी की चूत भी चेक कर ले, तूने ऐसी माँ कभी नहीं देखी होगी जो खुद के साथ अपनी बहन को भी चुदवाए !"

तब मैंने कहा- मम्मी, मौसी को बता दिया कि उसकी चूत कौन मारेगा?

मम्मी बोली- बेटा, अभी नहीं बताया ! तू जब करेगा तो खुद ही देख लेगी।

मैं बोला- उसको बुरा नहीं लगेगा?

मम्मी ने कहा- अरे, बुरा कैसे मानेगी? साली की बुर में खुद ही कीड़े काट रहे हैं, और जब कोई औरत एक बार चुदाई कराने का सोचती है तो फ़िर वो किसी से भी चुदवा सकती है।

फ़िर मैं मम्मी के साथ उनके कमरे में चला गया। तब मौसी मम्मी के बेड पर बैठी थी और मुझे देख कर संभल कर बैठ गई।

मम्मी बोली- देख ले अपने चोदू को … आज यही तेरी चूत मरेगा !

यह सुनकर मौसी का मुख लाल हो गया।

वो झपाक से बोली- हाय दीदी ! मैं भला अपने भांजे से कैसे सम्भोग कर सकती हूँ?

तब मम्मी ने कहा- जब मैं अपने सगे बेटे से चुदवा सकती हूँ और इसको अपने सामने ही अपनी बेटी की चूत भी मरवाने का मज़ा दे चुकी हूँ, तब तुझे क्या मुश्किल है?

मौसी बोली- हाय दीदी, आप कितनी निर्लज्ज हो, भला अपने बेटे से भी कोई चुदवाता है।

मम्मी बोली- तू बोल- तुझे चुदवाना है या मैं अपनी चूत की खुजली मिटा लूँ तेरे सामने चुदवा कर ! साली नाटक करती है !और इससे तो घर की बात घर में ही रहेगी।

मौसी के नखरे दिखाने पर मम्मी ने उसकी साड़ी के ऊपर से ही उसकी बुर के पास चिकोटी काटते हुए कहा- रानी एक बार लंड घुसवा लेगी तो ससुराल जाना भूल जाएगी।

यह बोलते हुए मम्मी ने मौसी की साड़ी उतार दी, अब वो सिर्फ़ ब्लाउज़ और पेटीकोट में रह गई। अब मैं बर्दाश्त से बाहर हो रहा था, मैंने मम्मी की चूँची दबाते हुए कहा- पहले एक बार आप चुदवा लो, फ़िर मौसी को देख लेंगे !

मम्मी ने कहा- अब तू अपनी मौसी को ही चोद ! इतने दिनों से तूने रट लगा रखी थी।

मम्मी ने मेरी लुंगी झटके से खोलते हुए मेरा अधखड़ा लंड हाथ मे लेकर मौसी की तरफ़ बढ़ाते हुए उसे हाथ में लेकर लंड की गर्मी महसूस करने को कहा और बोली- साली ले और जल्दी से इसे चूस !

मम्मी ने अपने सारे कपड़े उतार दिए। मौसी अभी भी शरमा रही थी लेकिन मम्मी ने उसके कान के पास चुम्बन लेते हुए उसे शर्म छोड़ने को कहा। मैं झट से मौसी की चूंची दबाने लगा … वाह … बहुत मज़ेदार थी उनकी चियां ! बिल्कुल टाईट । उनके गज़ब के चुचूकों को मैं हाथों से रगड़ रहा था, मम्मी पीछे से उसकी पीठ पर अपनी
छाती रगड़ रही थी। मौसी ओह…… ओफ़्फ़्फ़्… की सिसकियां निकाल रही थी। तब मैंने अपना हाथ साईड से उनकी पेटीकोट में डालकर धीरे से नाड़ा खोल दिया और पेटीकोट निकाल दिया। अब मौसी बिल्कुल नंगी थी, पर उसने दोनों हाथों से अपनी बुर को छिपा लिया था।

मम्मी ने जल्दी से पीछे से उसके दोनों हाथ पकड़ लिए और मुझसे बोली- राज ! चल अब अपनी मौसी को चूत चाटने का मज़ा दे !

ये सुन कर मैं मौसी की बिना बालों वाली फ़ूली हुईं गुलाबी चूत पर हाथ फ़ेरने लगा,उसकी फ़ांके बहुत ही सुंदर थीं।

मैं अपना हाथ फ़ेरने लगा और मेरा हाथ अपनी चूत पर पाकर मौसी चिहुंक पड़ी और उसके मुँह से एस्स्स्स …स्स्स सिसकारियां निकलने लगीं। तभी मैंने अपने हाथों से उसकी फांकों को फ़ैला कर उसकी चूत का करीब से नज़ारा देखा।

उसके अंदर का गुलाबी भाग बहुत ही खूबसूरत था और उसकी भीनी-2 सुगंध आई।

मैंने जैसे ही अपनी ज़बान निकाल कर मौसी की चूत पर रखी, वो एकदम से उछल पड़ी और आईईई…एस्स्स्स्स हाय्य्य्य राज …उफ़्फ़्फ़्फ़्…क्या करते हो? बहुत गुदगुदी होती है
!

तभी मौसी ने मेरा सर पकड़ कर अपनी चूत पर मेरा मुँह दबाने लगी।

कुछ देर चाटने के बाद मैंने उसकी चूत में अपनी ज़बान घुसा दी। वो ज़ोर से फ़िर उछल पड़ी … हाय राम ! दीदी यह राज कितना गंदा है … उफ़्फ़्फ़्फ़ बहुत मज़ा आ रहा है !

मम्मी बोली- अभी तो ये सिर्फ़ तेरी चूत को चूस और चाट ही रहा है पर जब अपने खड़े लंड के झूले पे बिठाकर झुलाएगा, तू फिर देख्ना कितना दम है इसके लंड में !

और यह कह कर मम्मी ज़ोर-2 से मौसी मे स्तन और चुचूक मसलने लगी … कभी अपने होंठों से मम्मी उसकी चूँची को चूस रही थी।

अब तो मौसी के बदन मे आग लग चुकी थी और वो सारी लाज-शर्म भूल कर बोली- आओ मेरे चोदू राज …॥ आईईईइ…इस्स्स्स इस तरह का मज़ा तो तेरे मौसा ने भी कभी नहीं दिया आह्ह्ह्ह्हह्ह,……

और वो अपनी चूत उचकाने लगी और मैं भी उनकी चूत की दरारों को फ़ैला कर उनकी टांगें अपने कंधों में फंसा कर बहुत ही ज़ोरदार तरीके से उसकी चुसाई कर रहा था …

मेरी छिनाल मम्मी ! आज तो तेरी बहन की चूत चाटने मे बहुत मज़ा आ रहा है ! मैं बोला।

मम्मी बोली- मादरचोद अब जल्दी से इसकी चूत से पानी निकाल ! इतनी देर से घुसा पड़ा है।

मैंने कहा- इसकी चूत इतनी चुदी नहीं है और आज पहली बार तो इसकी चुसाई हो रही है, भला इतनी जल्दी पानी कैसे छोड़ेगी ! अब तेरी बात तो अलग है, तेरा तो भोसड़ा बन चुका है !

इससे मम्मी तप गई और मेरे सर पे एक चपत मारते हुए बोली- अब मेरी चूत मारना ! तेरी गांड पे लात मारूंगी।

इतने में मौसी बोली- बात ही करते रहोगे या मेरा पानी भी निकालोगे, मैं झड़ने वाली हूँ… जल्दी… जल्दी जबान चलाओ ! मेरी बुर में ज़ोर से धक्का मारो …

कहते हुए अपनी चूत को उचकाने लगी और उनके मुँह से उईईईईईईईई आअ ह्ह्ह्ह्ह्ह, जल्दी करो…राज्ज्ज्ज…

और तभी मौसी ने पानी छोड़ दिया। उनका ढेर सारा रस मेरे मुँह पे पड़ गया, मैने बहुत ही चाव से सारा कामरस पी लिया।

झड़ने के बाद मौसी एक तरफ बेड पर गिर गई। उसके बाद मैंने अपनी मम्मी की गांड मारी और मौसी को उस रात मैंने चार बार चोदा।

मीरा की गाण्ड चुदाई

बात कुछ साल पहले की है मेरे एक दूर के रिश्ते के मामा जी एक बड़े शहर में उच्च अधिकारी हैं। मेरी मम्मी ने गर्मी की छुटिटयों में मुझे उनके घर भेज दिया कि जाओ घूम कर आ जाओ।

घर में मामा, मामी, व उनकी बेटी मीरा जो उस समय १८ वर्ष की थी । वह बहुत सुन्दर है।

एक दिन मामी जी ने कहा- राज ,तुम मीरा को स्कूटी चलाना सिखा दो !

हालाँकि मैं दीदी से छोटा था फिर भी मैं गाड़ी चलाना जानता था।

मैं दीदी को आगे बिठाता था और मैं पीछे बैठता था । यूँ तो मेरा लंड रोज ही अकड़ जाता था लेकिन एक दिन दीदी ने अपने पिछवाड़े पर कुछ दबाब महसूस किया। घर आकर गाड़ी खड़ी करते ही गुस्सा करने लगी और कहने लगी- अभी मम्मी को बताती हूँ।

शायद उसने अपनी मम्मी को कुछ बताया भी क्योंकि मामी जी ने एक दो बार मेरे अंग की तरफ गौर से देखा, जब मैं लन्च के लिए नेकर पहन कर टेबल पर आता था।

फिर दो दिन के बाद दीदी ने फिर गाड़ी निकाली। लेकिन इस बार भी उसमें तनाव आ गया, परन्तु मीरा दीदी ने घर आकर मुझे डांटा नहीं बल्कि दूसरी मंजिल में अपने कमरे में ले गई और वहाँ जाकर उन्होंने मुझसे कहा- जरा दिखाओ पैंट खोलकर ! मैं भी तो देखूं क्या चुभता है मुझे ।

मैं शरमा गया और दीदी का कहना टाल दिया ।

फिर अगले दिन मामा जी व मामी जी को अचानक दो दिन के लिए गाँव जाना पड़ा तो मामी जी बोलकर गईं कि डरना नहीं, दोनो भाई बहन नीचे ही सोना और कोई बात होने से तृप्ति आँटी को फोन करके बुला लेना।

आज देखा कि मीरा दीदी बहुत खुश थीं। रात को खाना खाने के बाद दीदी ने जल्दी टी वी बन्द कर दिया और ताश ले आई और कहा- जो हारेगा उसे दूसरे की पीठ मालिश करनी पड़ेगी।

मैं पहले से ही डरा था इसलिए समहत हो गया। अब मैं जीत गया तो भी मैं मालिश कराना नहीं चाहता था लेकिन दीदी ने कमर पर ऐसे ही हाथ फिराते हुए एक बार हाथ को लन्ड से छू दिया जो अपने पूरे आकार में था।

फिर इस बार दीदी जीत गई। जब मैंने मालिश शुरू की तो दीदी ने उल्टी होकर धीरे धीरे अपना पजामा और कच्छा नीचे कर दिया। दीदी की दूध जैसी सफेद गाण्ड देखकर मेरे रोंगटे खड़े हो गये और मेरे लन्ड से कुछ चिपचिपा पदार्थ रिसने लगा।

अचानक दीदी ने पलटकर कहा- राजू, तुम क्या देख रहे हो? मम्मी से कह दूंगी और अगर कुछ नहीं देख रहे हो तो यह क्या है दिखाओ पैन्ट खोलकर !

आज मैंने पैन्ट खोलकर दिखा ही दिया।

दीदी तो जैसे पागल हो गई, कहने लगी- बाप रे ! इतना बड़ा और मोटा !

मैंने कहा- अब क्या तुम भी दिखा सकती हो?

मीरा दीदी तैयार हो गई और उन्होंने नीचे के सारे कपड़े उतार दिये। अब उनकी गुलाबी चूत की फ़ांके काली छोटी छोटी झांटों से ढकी दिख रही थीं।

दीदी ने कहा- राजू देखो, जो मैं करती हूं, मुझे करने दो।

और दीदी ने मेरा ८ इंच लम्बा और ढाई इंच मोटा लन्ड चूसना शुरू कर दिया।

मैंने कहा- दीदी, यह गन्दी बात है।

दीदी ने बताया- मैंने एक दिन अपने मम्मी पापा को रात में ऐसा करते देखा है।

कुछ देर चूसने के बाद दीदी ने डॉगी पोज़िशन बना ली और कहा- राजू पकड़ कर धीरे से लगाना, क्योंकि बहुत मोटा है !

इससे पहले मैंने कभी सेक्स नहीं किया था इसलिए बहुत देर के बाद दीदी ने खुद पकड़ कर लगाया। लेकिन ६-७ धक्के मारने के बाद ही मेरी पिचकारी छूट पड़ी।

उस रात को दीदी ने चार बार चुदवाया, परन्तु मेरी इच्छा थी कि एक बार दीदी गोरी गाण्ड में लन्ड डालने दे।

दीदी ने कहा- ना बाबा ! गाण्ड फड़वानी है क्या !

दोस्तो और सहेलियो ! अभी दीदी की शादी हो गई है।

मैंने एक दिन मौका मिलने पर गुजारिश की तो दीदी ने मना कर दिया परन्तु थोड़ी देर बाद उन्होंने कुछ सोचकर मुझे अपने घर बुलाया और उस दिन कहा- तुझे मेरी गाण्ड मारने की बहुत इच्छा थी ना?

मैंने पूछा- यह खयाल कैसे आया?

तो उन्होंने कहा- आजकल सीडी देखकर सब मर्द बिगड़ गये हैं, मेरे श्रीमान भी हफ़्ते में एक बार मेरी पिछली मारते हैं और अब मुझे भी मजा आने लगा है।

और फिर दीदी ने उस दिन गाण्ड भी दो बार मरवाई।

 

© Me Mast

मेरी प्यास बुझा दो

आज से २ साल पहले मेरे ऑफिस में अंजलि काम करने आई। ऑफिस में मेरे अलावा सिर्फ एक चपरासी मैं और मेरे बॉस होते हैं। लकिन जब बॉस टूर पर जाते तो हम अकेले होते हैं। अब अंजलि भी आ गई तो अच्छा लगा। एक तो वो बहुत सुंदर और भरे हुई बदन की मलिका थी और दूसरा वो तलाकशुदा थी। जिस दिन वो पहली बार ऑफिस में आई तो बिना किसी से ज्यादा बात किये सिर्फ सामान्य बात की उसने। उन दिनों बॉस टूर पर थे तो ऑफिस इंचार्ज मैं था।

अगले दिन वो आई तो लाइट नहीं थी। ऑफिस में हम लोग बात करने लगे तो वो अचानक अपनी कहानी बताने लगी कि कैसे उसका पति उसको मारता था और उसको परेशान करता था। मैंने भी रुचि दिखाई सुनने में। मैं सुनता रहा फिर वो रो पड़ी मैंने उसको चुप किया तो वो चुप हो गई। फिर मैंने पूछा कि क्या तुम्हारी कोई संतान भी है? तो वो मुस्कुरा कर बोली कि नहीं। तो मैंने पूछा कि क्यों? हुई नहीं या की नहीं ? तो वो बोली चुप कर गई।

फिर एक दिन बॉस जब टूर पर गए तो उनके जाने के बाद हम लोग जरुरी काम करके बात करने लगे । फिर वो और बाते बताने लगी अपनी बारे में । इस बीच में मेरा हाथ उसके हाथ से लग गया मुझे जैसे करंट लगा पर मैंने हाथ हटाया नहीं और धीरे धीरे सहलाने लगा। वो अपनी बात बताती रही। मैंने धीरे से उसका हाथ अपनी हाथ में ले लिया और बोला कि देखो जिन्दगी बहुत लम्बी है, ऐसे परेशान ना हो और खुश रहना सीखो। मैं जब उसका हाथ सहला रहा था । वो बोली कि मुझे पता है कि तुम क्या करने की कोशिश कर रहे हो?

मैंने कहा- क्या ?

तो बोली कि कुछ नहीं पर मुझे इससे कुछ फरक नहीं पड़ता । यह तो मुझे अपनी बेइज्जती लगी तो मैंने कहा एक मौका दो, तुमको भी फरक पड़ेगा !

तो वो बोली- ठीक है।

मैंने उसके हाथों पर, कंधों पर सहलाना शुरु कर दिया। उसकी सांसें तेज हो गई पर वो अपने आप को सामान्य ही दिखाती रही। फिर मैं उसके पीछे गया और उसके बालों को सहलाने लगा। उसके बालों के नीचे गर्दन पर अपनी गरम सांसे छोड़ने लगा तो वो बुरी तरह गरम हो गई, उसकी सांसे और तेज हो गई और उसकी मोटी मोटी चूचियां ऊपर नीचे होने लगी। उसकी साँसों के साथ मैं उसके सामने आ गया और फिर उसके गले पर ऊँगली से सहलाने लगा तो उसकी आंखे लाल हो गई थी और उसके निप्पल इतनी टाइट हो गए कि उसके सूट के ऊपर से भी नजर आने लगे तो मैंने उसको छोड़ दिया।

वो बोली- क्या हुआ ?

तो मैंने कहा- तुमको तो कुछ होता ही नहीं है, पर मेरी हालत खराब हो रही है !

तो बोली कि जीतू आज ३ साल बाद फिर से किसी ने मुझे इतना गरम किया है ऐसे छोड़ कर मत जाओ, मुझे माफ़ कर दो मेरी प्यास बुझा दो।

मैंने कहा कि लो मेरा लण्ड चूसो !

तो वो फट से तैयार हो गई और मेरा 6.5" इंच लम्बा लंड निकाल कर बोली- तुम्हारा तो बहुत लम्बा है और मोटा है, मेरे पति का तो छोटा सा ही था।

मैंने कहा- लम्बे लंड से चुदने में जो मजा तुमको आएगा वो कहीं नहीं आएगा।

वो बोली- तो जल्दी से चोद दो ना ! और मेरा लंड जल्दी जल्दी चूसने लगी। मैंने उसके सलवार का नाड़ा खोल दिया और उसकी सलवार निकाल कर उसकी पैंटी भी उतार दी और उसकी चूत में ऊँगली डाल दी। मैं ऊँगली से चोदने लगा, वो ऑफिस के फर्श पर लेट गई और मैं उसकी चूत चाटने लगा। वो मेरा लंड चूसने लगी ६९ की पोजिशन में।

तभी उसने मेरा लंड छोड़ कर मेरा मुंह अपनी चूत पर दबा दिया और आआआआआअह्ह्ह्ह्ह्ह्ह्ह्ह्स ह्ह्ह्ह्ह्ह्ह्ह्ह्हा आआआआऊऊउईईईईइ मम्म्म्म्मम्म्म्म्मा करने लगी और जोर से झड़ गई। मैंने उसका पूरा पानी साफ़ कर दिया चाट चाट कर ।

फिर मैंने उससे कहा कि अपना सूट उतार दो तो उसने उतार दिया और मैंने उसकी चूची चूसनी शुरू कर दी। वो फिर से गरम होने लगी और आआआआआआअह्ह्ह्ह्ह्ह्ह मम्म्म्म्म्म्माआअ करने लगी और अपनी चूत रगड़ने लगी।

मैंने उसके मुंह में अपना लंड डाला और उसने उसको चूसा तो उसका थूक उस पर लग गया तो मैं उसकी टांगों के बीच में आ गया और अपना लंड उसकी चूत पर रगड़ने लगा। वो बोली कि अब मत तड़पाओ, जल्दी से डाल दो।

मैंने एक धक्का दिया तो वो चिल्लाने लगी- निकालो ! मैं मरी !

मैंने कहा कि तुम्हारे पति ने तुमको चोदा हुआ है, फिर भी ऐसे चिल्ला रही हो जैसे पहली बार चुदवा रही हो !

तो बोली कि एक तो तुम्हारा मोटा है, दूसरा मुझे चुदवाये हुए ३ साल हो गए, जरा धीरे करो ना ।

मैंने कहा- ठीक है ! तो फिर मैं फिर से धक्का लगाने लगा और उसकी चूची चूसने लगा।

उसने कहा- आराम से !

तो मैंने सोचा कि इसको अगर आराम से चोदा तो यह चोदने नहीं देगी तो मैंने उसके मुंह पर अपना मुंह लगा कर किस करने लगा। फिर एक जोर से धक्का दिया तो लंड पूरा उसकी चूत में घुस गया पर वो बुरी तरह मचलने लगी । उसकी आंखें बुरी तरह खुल गई और वो रोने लगी । मैं थोड़ी देर रुक गया और उसकी चूची चूसने लगा।

वो बोली- तुम जानवर हो ! मुझे छोड़ दो ! मेरी चूत फट गई ! मेरी जान निकल रही है, बाहर निकालो।

मैंने झटके लगाने शुरू कर दिए तो वो और चिल्लाने को हुई तो मैंने उसके मुंह पर हाथ रख दिया और जोर जोर से चोदने लगा। 5 मिनट बाद उसको मजा आने लगा और वो भी मेरा साथ देने लगी और फिर शुरू हुआ असली चुदाई का मजा ।

मैं जितनी तेज ऊपर से झटके मारता वो नीचे से उतनी ही तेजी से जवाब देती। सच दोस्तों क्या बताऊँ क्या क़यामत चुदाई चल रही थी कि तभी वो मुझसे चिपक गई और मेरे कंधे पर काटने लगी और उसने अपने नाखून मेरी पीठ में चुभा दिए। वो आआआआआ आआआआह्ह्ह्ह्ह्ह्ह्ह्ह्ह्ह करती हुई झड़ गई । फिर कहने लगी जल्दी करूं अब सहन नहीं हो रहा है।

मैंने उसको घोड़ी बनाया और पीछे से चोदने लगा और अपनी स्पीड बढ़ा दी। 15-20 झटके लगाने के बाद मैंने अपना माल उसकी पीठ पर निकाल दिया। वो सीधी हो कर लेट गई और बोली कि जीतू आज तुमने मेरी सालों की प्यास एक बार में ही बुझा दी, पर तुमने अपना माल बाहर क्यों निकाला ?

मैंने कहा- अगर तुम प्रेग्नेंट हो जाती तो ?

वो बोली कि मैं पिल ले लेती, पर तुम्हारा माल मेरे अंदर जाता तो और मजा आता।

मैंने कहा- कोई बात नहीं, अगली बार जरुर तुम्हारी कोख में अपना बीज डालूँगा।

फिर हमने जल्दी से कपड़े पहने। (यहाँ में यह बताना भूल गया कि जिस दिन यह सब हुआ, उस दिन ऑफिस के चपरासी को ऑफिस के किसी काम से हेड ऑफिस भेजा था तो ऑफिस में मैं और अंजलि ही थे)। उसके बाद मैंने अंजलि के साथ दो और बार सेक्स किया क्यूंकि ना तो रोज बॉस बाहर जाते थे, ना रोज हेड ऑफिस में कोई
काम होता था।

© Me Mast

उषा मेरी ओपन नौकरानी

I am 35 years young contractor living in Mumbai and have immense attraction towards women since my teenage. I got married 5 years back and have quite a good sex life. But of late, my wife, due to workload in her office, has lost some interest in sex. On the contrary , I am as usual, always looking, fantasizing about woman.

We have a maid ‘Usha’who is probably 30 to 35 years young. She has been only for the last 2 months with us. She has to do cooking, washing clothes, cleaning utensils and cleaning the house. As I was busy initially, I could not or rather, you can say, she could not get enough time to look at each other. But as my work slowed down in rainy season, I stayed at home the whole day doing my yearly work on computer. At 10 morning my wife goes for office. She takes tiffin with her. “Usha” comes at nine, finishes her cooking and then my wife takes the tiffin and goes for office. After that, Usha does her remaining household works. On the first day of my “stay home period”, I got up at around 9.30 am. My wife was about to leave for office so she told usha to make a cup of tea for me. By the time usha made tea it was 10 am and my wife had gone for office. After making tea usha entered my bedroom. I was still on the bed reading newspaper. She said ‘saheb chaha’ . I looked up at her. She smiled, when I looked at her, so I too smiled back. I said ‘I just wash my face and come’. So she sat there in a chair waiting for me to come. After washing my face, as I entered the bedroom , she got up and said it seems tea is not hot enough .I will just make it hot’.I said let it be it doesn’t matter’. But she insisted and brought hot tea . As I was reading paper and enjoying my tea, she stood there infront of me and asked how is it. I said ‘good’ . As I was taking tea I saw her sweating so I said sit for a while and relax. She smiled and sat there on the edge of the bed. I was in a chair beside her around 3 feet from  her. As I was reading the paper she took one page and started reading . As she was reading and I too, I just looked at her to ask her something. But as she was reading something keeping her head and eyes down I just looked at her for a moment. She was hardly 3 feet away from me so I could have very close look of hers.

She was wearing an ash colored sari with white colored transparent blouse. She had her front breast part neatly covered by sari’s pallu so I could see only the strips of her bra through the transparent blouse at her shoulder side. She was sitting in such a way that I could see her from her left side. She had tied her hair up on the head so her long neck was fully visible. She was looking very sexy in that hair style. From her left side, her side pallu was slightly up so the angular curves of her left boob covered with blouse was visible. It was very prominent, pointed and big like a pointed ‘hapus’ mango. I tried to see through the transparent blouse but I could see only white bra inside. I just had wild imagination to reach there, press my face against that mango and suck it. As I was enjoying the side scene, she suddenly looked at me and caught me watching her beautiful mango. To my surprise, she reacted as if nothing happened, blushed and lowered her pallu to cover her boob side slowly, smiled at me and went to kitchen for work She was average height about 5.3, about 65 kgs and well figured. When she went inside slowly, making a cat walk, I watched her. She was in good shape. Suddenly I wanted to be with her, talk to her and enjoy her smile, her boobs, suck her nipples, go through her pubic part and fuck her.

These things started since then every day. Every day she would give me tea only after making sure that my wife had left for office. I also used to get up late so that I could enjoy her company from tea itself. Then she would smile at me then I used to take bath. Very often I would intentionally forget towel and she would give me the towel and while giving it, she would give me a naughty smile. I have a good body so one day she said ‘after bath you look very good in bear chest’. Encouraged by her words, I used to stay for sometime at home after bath, bear chest and with shorts only. I noticed many times, when I was busy in doing my work she would stare at me. I caught her many time. I asked her ‘what’ she would smile and run for work.

One day when I was doing some work on computer she came to my computer room. I asked ‘finished your work’. She said ‘yes’. She said ‘I want to learn computer’. I said ‘come sit. I will teach you’. She sat beside me in a chair on my left side. She said if you teach me ‘I will give you gurudakshina if you want. I asked ‘what will you give me?’.

She said ‘anything you want’.

I said ‘anything?’.

She said ‘yes’ . I said ‘see, otherwise after learning this you will forget. She said ‘no way I will not. whatever you say I will give’ and then she gave me a naughty smile and said ‘I know, by the way what you can ask for’ . I asked ‘what?’ . She stared at me for a moment and said ‘I will not tell but that dakshina will give you great pleasure I am sure’ and again she smiled. One day when I was teaching her the basics of computer, she was busy looking at monitor, I noticed her pallu slipped off her shoulder and rested on her left arm exposing her boobs. I just couldn’t help myself from staring at her boobs. I could see the big cleavage in between the 2 boobs. The white blouse was hardly seemed to be holding those mangoes. Both were pointed forward. From the corner of her eyes, she noticed that I was enjoying those heavy tits but neither she lifted her pallu nor showed any sign of discomfort. This teaching continued for 10 to 12 days and by then we were very free with each other but in front of my wife we use to be as distant as possible. On one day when my wife had gone, I suddenly heard her calling me from kitchen. I rushed there and saw her sitting on the floor holding her knee. ‘I just slipped here’, she said. I held her hand, made her stand on her feet and put my left hand around her waist and her right hand on my shoulder and took her to my bedroom. I could see the pain on her face. She said ‘please slowly, my leg is paining’. I took her slowly and asked her to lie down on the bed and relax, I will bring iodex. She lay on the bed. I brought iodex and gave her to apply on her knee. She said ‘saheb I can’t do. Please can you do it for me. It’s paining a lot’ . I said ‘ok’ and she straightened her leg on the bed and sat on the bed resting her back on the wall.

I took some iodex on my fingers and asked her ‘where’. She pointed towards her leg so I pulled her sari from feet slightly up and said ‘here?’ . She said ‘no! Slightly up’ . Slowly I pulled her sari up again to her knee and she said ‘here at knee’. I could see her legs , her black petticoat and suddenly I started getting excited. I started massaging the iodex to her knee very slowly. She again started paining and as I was enjoying the massage she said ‘a little up’ and again I continued massaging with both my hand taking her full thigh. She again said ‘a little up’ and then I looked at her . She was staring at me with little moaning sound. It was sounding little seductive now ‘aaaaaaaaaaaah! aaaaaaaaaaaah!’.First time I could see the hunger in her eyes. I was massaging her thigh portion so I was already excited. Again she said ‘up a little’ with some sexy voice looking straight in my eyes. That encouraged me and I went up further massaging her thigh. I was becoming more and more hot and it was very difficult for me to control myself . Suddenly I touched something. I understood it was her panty. I could feel the touch of her pubic hair coming out from the edge of her panty. My ears had become hot and penis had become very hard. I looked up at her Usha had closed her eyes and she had started moaning.’ aaaaaaaaah! Aaaaaaaah!’. It was sounding very seductive. It again gave me courage and I continued massaging gently around her pubic hair and entire thigh with my both hands, up and down, sometimes slightly touching the edge of her panty. She was moaning. Her expressions showed she was not in her senses. I asked her ‘how is it?’. She said in a seductive voice ‘little up saheb I am feeling much better now. Please do it a little up’ . This gave my more courage. I had lost my control my hands again moved up. I then put my full right palm on her panty from beneath the sari and petticoat and squeezed the panty top portion hardly. This gave her some kick and she moaned loudly. I asked ‘what happened?’. She said ‘go on saheb.

Please!

I am feeling better now’. She was breathing fast and so was I. I could feel her triangular pubic part covered with panty. I could feel the jungle of pubic hair under the panty. Now I wanted to see the panty So I pushed the sari and petticoat up till I saw the panty. It was pink. I caught hold of the pubic part, squeezed it hard and lowered my face few centimeters from the panty. Usha moaned and so I looked up. Usha was staring at me and her pallu had slipped off her shoulder and chest. I could see the big pointed boobs in white blouse exposed inviting me. The blouse was very low cut so it could see the big cleavage between those big boobs. Usha was sitting 1 foot away from me,staring at me. She had untied her hair and they were free now. She was looking very sexy now. As I was staring at her boobs she suddenly bent forwards towards me, caught hold of my head and pulled me and said ‘its all yours saheb. This is yourgurudakshina. Please accept it’. And she pulled me towards her and put her lips on mine pressed it hard and then took my lips inside hers and started sucking my lips very hard, pushed me on the bed on my back and lay on me without leaving my lips. It was heavenly pleasure for me. I was completely in touch of her entire body. Her boobs were pressed against my chest. I could feel those soft boobs. She was breathing heavily and sucking my lips. We both had closed our eyes. This continued for 10 minutes. When my lips started paining, I took my lips off her mouth, pushed her down on her back and and lay on her, took her lips and started sucking those soft lips hard. she was moaning loudly. She was moving her fingers through my hair. Then She gave me her tongue when I was sucking her lips and I sucked her tongue too . She was experienced looking. When I was sucking her lips she took my right palm and put it on her left boob. Then she tore my banyan and threw it and unbuttoned my short and with her foot she pushed it down and I then removed it. I started massaging her boob, pressed it, squeezed it and then brought my hand towards her blouse buttons. I touched and pressed that portion and took my lips off hers and lowered down, pressed it against her boobs. I started kissing both her boobs without removing the blouse. Usha was moaning aaaaaaaaaah!aaaaaaaaaaah! It was loud. I was pressing my lips and face hard against her boobs. They were very soft. As she was moaning louder and louder I was getting harder and harder. Finally I started unbuttoning the first button of her white blouse , then second , I could see the bra a little . I then slowly unbuttoned it completely. The view was very seductive. Her bra was white with some decorated flowers on it. I again lowered and pressed my face against her bra and kissed both the boobs for some time. I then removed the blouse from her arms and took my right hand under her back to unhook her bra . She lifted her back a little so that I can unhook her bra. I unhooked it and slowly removed the left strip of her bra from the left arm and then removed the cups of the bra from her boobs . She had 2 very beautiful, big , juicy, round, with black nipples on top of the boobs. The nipples were erected and pointed. My face was few centimeters from her boobs.

Usha was watching me . She said ‘go ahead saheb its all yours’. I just couldn’t stop any more and lowered my face pressed it against the boobs and started kissing both the boobs one after the other. I then took both the boobs in my hands and started squeezing gently . She started moaning loudly. aaaaaaaaaaaah!aaaaaaaaaa ah! I pressed my face against her left boob with her nipple in my mouth, sucking it hard. My left hand was squeezing her right boob . She had very hard boobs . She must have been hungry for a long time and so was I . Then I took her right nipple of her right boob in mouth and started sucking hard and kept squeezing her left boob by my right hand. After playing with her boobs for some time , she started pushing my head downwards and whispered in my ears bringing her mouth near my ears ‘kiss me down saheb please’. ‘Those lips at the bottom are also tasty and juicy. You will enjoy it’. I understood she wanted me to go under her panty . I quickly removed her sari and untied her petticoat’s string and pushed the petticoat down up to the thighs. She then threw the petticoat out. I could see the pink panty now . I put my right palm on her panty and pressed it on her pubic part. I went down slightly parted her legs and lay in between her legs on my knees. She was lying on the bed on her back now and moaning aaaaaaaaaaaa!aaaaaaaaaaaaah!.

I then inserted my face hard on her panty pubic part. It was very soft.After kissing for few minutes, I slowly lowered the panty slightly down. I saw little hairy part of her pubic area. I lowered the panty completely down and pushed my face and literally tried to insert in her hairy triangle pubic part and stared kissing all over the hair . She moaned ‘shaeb kiss me down’. I then went down. It found those spicy lips of her clit in that heavy jungle of hair.

I finally parted those wet lips apart slightly by my fingers and inserted my tongue in between. It was wet slightly salty. I licked the juice accumulated between those lips and took both the lips in my mouth and started sucking. It was very tasty. I wanted to take the entire portion of the clit in my mouth . With my face pressed hard against,I continued sucking both the lips of her clit.

Usha was moaning very loudly now aaaaaaaaaaaah!aaaaaaaaaaaah!. I removed panty completely out of her legs by one hand and threw it and again started sucking those wet lips of her clit. After 10minutes she suddenly sat up, pulled my head up towards her head , pushed me on my back, went on top of me , held my face and then took my lips in her mouth and started sucking very hard. She was moving her fingers all through my hair and was just eating my lips like a hungry lioness. She was fully naked lying on me with her legs touching mine , her pubic part was brushing my penis and her boobs to my chest.

She then realized that my underwear is still on so she lowered it by her foot and removed out of my legs. Now we both were fully naked lying on each other. My penis was touching her pubic hair and her boobs pressed against my chest. My lips were still in her mouth . She was just eating , sucking , biting those lips of mine. My hand was now moving around her back, then lowered to her buttocks . I squezed the buttocks with my both hands . She moaned without leaving my lips. Suddenly she left my lips and went down and started kissing from my face till she reached my nipples. She took the nipple in her mouth and started sucking. It gave me immense pleasure and I started moaning now. She knew I am enjoying so she sucked it hard. She then lowered her right hand and caught hold my penis and started rubbing and squeezing and at the same time sucking my nipples hard. She could control the heat of my penis for few minutes and she sat up on my body and said ‘are you ready saheb’ . I said ‘you better sit on me .You will enjoy more than if you go down’. She said ‘I have never done like this before with my husband. He always ride on me’ . I said ‘you try this time riding on me’ ‘you feel great’. She said ‘ok’. So she stayed sitting on me I said you take my penis in your hand and and give it the touch of your hole and then I will insert myself’ . She guided my penis keeping it in her hand and then touched the hole surface. I slightly adjusted my penis with her hole to insert. I pressed hard and it went inside. She moaned loudly.. Aaaaaaaaaaaaaaaaaaa!.. We both then took the position, adjusted properly and then she started moving her hole in and out for some time. We both were paining with heavenly joy when her hole and my penis were in friction. She was vibrating as if she was riding a horse. Finally she said ‘I am about to release please you also do’. I said ‘I am about to explode’. She said ‘go ahead saheb. I am in my safe period. Nothing will happen. Go and explode . Release your liquid’. I was just waiting . I was in my peak of excitement and so was she. I immediately released, same moment she also released hers. It was a great moment of excitement.

Now we both had lost out energy. She lay her head on my chest in the same position without removing my penis for half an hour. We both were tired and it was time to relax in each other’s arms. So we let ourselves cool down. After half an hour she sat up and said ‘remove your penis?’ I said ‘ok’. So she slowly removed mine and came beside me and lay beside me keeping her right arm round my chest. Holding my face in her both hands with lots of love, ‘saheb’ she said, ‘I have not had this much pleasure till now. This is the first time I have reached my highest limit of pleasure’ and she kissed my lips with satisfaction and love.

She further whispered in my ear ‘you have really given me all I want. You have fully satisfied me. Are you satisfied too?’ I took her in my arms, kissed her lips and said ‘yes it was a great pleasure’. It was 3 o’clock by then she said I have to finish my work let me go I didn’t remove my hands, hugged her tight. She moaned. ‘Please saheb. After this I have to go home also. If I am late my husband will get angry’. Still I did not leave her. She then kissed me hard on my lips and said ‘saheb don’t worry. I am all yours . I know you are not getting enough from your wife so do I from husband. I am equally like this sex love as you do. The fire is at both ends equal. Is it not?’ I said ‘you are right. Now I cannot live without you. I want you always in my arms’. She said ‘control yourself saheb. I am going to stay here only and so do you. So we will always be together for sometime of the day. Atleast for few hours’. She then kissed me. I too kissed her on her lips. She got up naked, collected her bra from under my head, panty from under the bedsheet, petticoat from floor, and sari lying on the floor . She then wore the panty. I was watching her. She said ‘what are you looking at saheb?. You have just had every thing.’ I  said ‘I am still hungry’ . She said ‘tomorrow’ . I said ‘but tomorrow I want you in what I give you for wearing’ . She said ‘ok’ then she wore the petticoat, sari and bra and blouse and then went in kitchen for finishing her work.

चुद गई बन्नो

मैं एक बहुत ही चुदासी औरत हूँ ! स्कूल से लेकर कॉलेज टाइम में मैंने बहुत नाम कमाया! लड़कों के साथ मेरे किस्से जुड़ने आम बात थी! कॉलेज के अच्छे से अच्छे लड़के के साथ मेरा नाम जुड़ता ! कम उम्र के लड़कों का चस्का मुझ में हवस डाल गया!

तभी मेरे कॉलेज के किस्से जब घर तक आने लगे तो माँ ने लड़का ढूंढ़ लिया और मेरी शादी का फैसला ले लिया, जिसका मैंने बहुत विरोध किया और माँ को कई खरी खोटियाँ सुनाई ! आखिर उनके ही बनाये गए माहौल में जो देख देख कर बड़ी हुई थी !

आखिर मुझे हां करनी ही पड़ी और मैंने एक लड़के के लिए हां कर दी और शादी करवा के ससुराल आ गई ! यहाँ मेरा ज्यादा वक़्त तो घरेलू काम काज में निकल जाता! अपनी सारी शौकीनी अब काम में लगने लगी! टाइट सूट डाल कर लड़कों को बहकाना और फिर उनसे चुदवाना सब कुछ अब पीछे रह गया !

अपनी ननद के साथ मेरी बहुत पटती थी और मैं उसको उसके आशिकों से मिलने में उसकी मदद करती रहती! मेरे पति का लौड़ा इतना बड़ा नहीं था, ऊपर से मेरी रांड ननद सुन्दर – सुन्दर लड़कों से मिलती ! उसका एक आशिक उसे आधी रात को मिलने आता था और कभी कभी उसको चोद भी लेता था ! सब मिलना मिलाना मेरे राह से निकल कर जाता था ! मैंने जल्दी ससुराल में पकड़ बना ली ! मैं किसी से डरती नहीं थी! अब कोई काम-काज किस से कैसे करवाना है, जान गई थी !
उसके आशिक ने जिस रात मिलने आना होता, वो मेरे मोबाइल पे ही कॉल करता और पूछ लेता की आज गीता कहाँ सोयेगी, उसको कहना चौकन्नी रहना !

एक दिन मेरे दिमाग ने पलटी खाई, सोचा अब जब उसका फ़ोन आयेगा तो तो तो  ????

वैसा ही हुआ शाम को मुझे कॉल आई ! उस दिन मेरे पति घर पे नहीं थे! मैंने उसको कह दिया कि आज गीता मेरे कमरे में होगी क्यूंकि मैं आज सासू माँ के कमरे में सो जाउंगी ! तू आराम से मिलना, पिछली खिड़की खुली होगी !
वो बोला- ठीक है भाभी !

मैंने गीता को कुछ नहीं बताया और आराम से अपने कमरे में सो गई और कमरा बंद कर लिया !

करीब रात १२ बजे उसने दस्तक दी ! बत्ती बंद थी, उसने टॉर्च से बेड ढूंढा ! मैंने भी बारीक सी कुर्ती डाली थी ! वो मेरी चादर में घुस गया, मैं भी उसके साथ लिपट गई !

उसने अपने होंठ मेरे होंठों पे रख दिए और चूसने लगा- गीता मेरी जान !
मैं भी गरम हो उसका साथ देने लगी ! उसने मेरी कुर्ती में हाथ डाल मेरे मम्मे दबाने शुरु कर दिए !

वहां से उसको शक हुआ ! मेरे मम्मे गीता से कहीं ज्यादा सेक्सी और गोल थे ! उसने टॉर्च चेहरे पर की !

मैंने आंख मारते हुए कहा,”हाय राकेश ! और मसल न !”

भाभी………. आप ??

हां मैं ! क्यों क्या हुआ ??

वो ख़ुशी से पागल हो गया- वाह भाभी ! जिसके बारे में सोचते हुए गीता को चोदता हूँ, मुठ मारता हूँ, वो आज मेरे नीचे लेटी है !!

मैंने अपनी कुर्ती उतार फेंकी और उसको नंगा करते हुए उसका मोटा लौड़ा निकाल लिया!

हाय ! क्या शानदार लौड़ा था उसका ! कितना मोटा लंबा !”

वो मेरे मम्मे को चूसने लगा ! मैं, हाय ! हाय ! करने लगी ! मैंने भी उसको पीछे लिटा कर उसका लौड़ा मुहं में डाल कर चूसना शुरू किया !

ओह मेरे राजा, चोद मुझे ! हाय बहुत दमदार है ! कब से तेरा मूसल अपनी चूत में डलवाना चाहती थी!”

अभी ले, मेरी कमीनी कुतिया ! भाभी, तेरा यह  देवर है न तुझे रौंदने के लिए !

हाय रानी, तू तो साली गीता से भी ज्यादा बढ़िया माल है !”
तजुर्बा है, लल्ला जी !

हाय……. !!!!”

उसने ६९ में ला मेरी चूत पे जैसे तपते होंठ रखें, मैं सी सी सी करने लगी और उसने अपनी ज़ुबान के खेल से मुझे मोहित कर दिया !! बोला अब चोद दूँ ?? सब जाग जायेंगे !

हट साले, मेरे कमरे में कौन आयेगा ?

यह कह कर मैंने टांगें खोल दी और उसको बीच में आने को कहा और उसने अपना मूसल लौड़ा चूत पे रख घस्सा मारा (पंजाबी में झटके को घस्सा कहते हैं) !

हाय और घस्से मार ना कस कस के !

हाय ! साईं, तेरी दीवानी रांड भाभी तुझसे चुदाना चाहती है !”

कम ओन, फाड़ डाल !” हाय !!! और और और !!!!!!!!!

वो भी ज़बरदस्त प्रहार करने लगा और और मेरे बालों को नोंचते हुए कहा,”चल बहिन की लौड़ी, बन जा घोड़ी !

यह ले, यह ले !!”

मैंने घोड़ी बन गांड उठा ली उसने तेज़ तेज़ धक्के मारे और मैं झड़ गई !! मैंने उसे कहा- मैं झड़ गई ! हाय !!
उसने बाहर निकाला और थूक लगा कर गांड में डालते हुए करीब ५ मिनट की चुदाई में सारा माल मेरी गांड में डालते हुए मुझ से लिपट गया ! मैं भी बेल की तरह उसके बदन से चिपक गई !!

पूरी रात में मैंने उस नौजवान पट्ठे को निचोड़ दिया !!

वो ठहरा था गीता की कभी-कभी लेने वाला और मैं थी जनम जनम से प्यासी चुदाई की हसीना !!!!!!”

उसका बुरा हाल हो गया ! उसने सोचा नहीं होगा कि सारी रात दम लगाना पड़ेगा ??

खैर !! चुद गई बन्नो !!!

(c) DevBlue

मौसी की चुदाई

ये तब की कहानी है जब मैं २१ साल का था, मेरी मौसी की आगे करीब ४५ की थी. एकदम मस्त गांड की मालकिन. और चूचो की तोह क्या कहना, हमेशा उसनके ब्लौसे से बाहर आने को तैयार रहते थे. मैं मौसी को जब भी देखता मुझे जोर से गुदगुदी होती थी. आखिर उनका सुडौल गेहूआ बदन बड़ा ही हसीन था. एक बार उन्होंने मुझे आपने यहाँ रहने के लिए बुलाया, मेरे मौसा कुछ काम से सहर के बाहर जा रहे थे. मैं १५ दिनों के लिए उनके घर में शिफ्ट कर गया. उनका घर काफी छोटा था सिर्फ दो ही कमरे थे एक कित्चें और दूसरा उनका हॉल. जब मैं उनके घर जाया तोह मौसी की खुसी का ठिकाना नहीं रहा. और मुझे अपनी बाहों में भर लिया उनके .jisse unke boobs mere seene se dab gaye.

mujhe bhi maza aaya us din.maine bhi unhe gale laga lia aur gaal pa kiss bhi di.meri mousi ghar mein jyadatar gown hi pehna karti thi.jisse jab wo ghar ka kaam karne ke kiye jhukti to unke boobs ka bhugol dekhkar mera 8″ lamba l*** khada hone lagta. Wo mujhse bahut pyar karti thi.
Ek baar mousi kisi kaam ke liye niche jhuki to maine dekha ki unhone bra panty nahi pehni hui thi,to mujhe unke boobs aur chut dikhayi di.mera ye dekhkar bura haal ho gaya tha,unki chut par baal nahi the,main tabhi bathroom mein jaakar muth maar kar aaya,mera dil mousi ko chodne ke liye machal raha tha,lekin meri himmat hi nahi ho rahi thi,main, mousi aur mousaji ek hi bed par sote hai,bed bada tha isliye hum teeno ko ek hi bed par sone mein koi dikkat nahi hoti thi,pehle mousi fir mousaji fir main is tarah line mein sote the. Sone se pehle mousi mousa ji aur mujhe doodh jaroor deti thi, sote time ghar mein andhera rehta hai koi kisi ki shakal bhi nahi dekh sakta itna andhera rehta hai,ek baar meri raat ko meri aankh khuli to mujhe mehsoos hua ki mousa mousi ki chudai kar rahe hai.Maine jab gour se dekha to mousa mousi ke upar lete hue the aur mousi nangi niche leti hui thi aur mousa mousi ki chudai kar raha tha,mousi bich bich me aaaahh huu n naauuccch uun kar rahi thi.ye dekhkar mera l*** khada ho gaya.maine apne l*** ko pakadkar usnhe dekhkar wahi muth karli. Dono aapas mein kafi der tak chudai karte rahe ye dekhkar mujhe pata hi nahi chala ki mujhe kab neend aa gayi.Ab mera man aur kharaab hone laga mousi ki chudai ke liye.

Ab main 4-5 din tak roz jaldi sone ka bahana karke leit jaata tha aur mousi ki chudai dekha karta tha.ek baar maine dekha ki mousi nangi aankh bandh karke leti hui hui aur mousa unki chut mein apna muh daalkar choos rahe hai.mujhse raha nahi gaya maine apna ek haath badhakar mousi ki ek choochi par rakh di,mousi ko kuch pata nahi chala ki kiska haath hai.mujhme aur himmat aayi to main jor jor se musi ki choochi ko dabane laga. Mousi ki chuchi itni badi thi ki mere haath mein hi nahi aa rahi thi.mousi bhi maze se apni chuchi dabwarahi thi.aur main dusre haath se apne l*** ko pakadkar muth maar raha tha.fir thodi der baad mera paani nikal gaya to maine mousi ki chuchi se haath hata liye aur so gaya.In dono ki chudai mein maine dhayan diya ki dono mein se koi baat nahi karta tha, fir saturday aaya.sunday ko mousa ki chhutti hoti hai to wo saturday night ko mousi ko jamkam chhodte hai.isliye shayad mousi bhi thodi jyada taiyaari rakhti hogi. Ab mujhse raha nahi gaya to main medicial store gaya aur waha se neend ki goli ye kehkar le aaya ki mere dad ko 3 din se neend nahi aa rahi hai unke liye koi neend ki goli dijiye,unhone bataya ki 2 goli kafi hogi lekin main 4 goli le aaya.ab main raat ka intezar karne laga.raat ko mousi ne mujhe kitchen mein bulaya aur doodh dekar kaha ki le apne mousa ko de aa.main unki nazar bacha kar neend ki 4ro goli mousa ke doodh mein mila di.fir maine doodh mousa ko diya to mousa ne pee liya.aaj raat mousi ne nighty peheni hui thi,fir wo dono leit gaye aur main bhi light off karke let gaya 1 ghante baad maine mousa ko halke se hilakar dekha to unpar neend ki goli ka asar ho gaya tha,wo so gaye the maine unhe Apni jagah sarka diya aur unki jagah main aakar leit gaya,mousi ka muh dusri taraf tha to unhe pata nahi chala,ab maine pehle apne saare kapde utar diye aur mousi ki kamar par apna haath rakha mujhe laga ki mousi so gayi hai,lekin wo jagi hui thi,ab maine apna haath unke boobs par rakha aur unhe nighty ke upar se dabane laga,aur unse chipak kar leit gaya jisse mera l*** mousi ki gaand ko touch kar raha tha,aurmaine apni ek taang mousi ke pairo ke beech mein daal di,aur apne pair se mousiki chut ko ragad raha tha,Mousi thodi der baad hot hone lagi thi,thodi der baad mousi ne apna muh meri taraf kiya to maine unke lips par apne lips rakh diye,ahhh kya taste tha unke lips ka main to pagal ho gaya,ab main apna haath unki nighty ke andar daalkar mousi ki chuchi dabane laga.mousi ne apna haath mere haath par rakh diya aur dabane lagi.mousi ne niche bra nahi pehni hui thi,maine mousi ki nighty utar di aur unke upar lait gaya aur apne badan se unka badan ragadne laga jisse unki chuchiya mere seene se ragad rahi thi aur mera l*** unki panty ke upar se unki chut par ragad raha thaaaa,mujhe bahut achcha lag raha tha,ab main unke honthon par kiss karta hua unke gaal par kiss karne lagafir unke gale parrrrr mmmuuuuh mousi ko bahut maze aa rahe theee.mousi dheemi awaaz mein kehne lagi ki aaj kya hua hai tumhe aaj to bahut achchi tarah se kar rahe ho.main kuch nahi bola.Main apne kaam mein laga raha.fir main kiss karta hua unki chuchiyo ki daraar par aa gaya maine unki chuchiyo ki daraar par halka sa bite kiya to mousi poori tarah hil gayi,fir main unki rightwali chuchi ko muh mein lekar choosne laga aur left wali chuchi ko haath se dabane laga.meri mousi pagal hotii jaa rahi thiiiiii,maine unke nipple par bite kar diya to wo dheere se kehne lagi ki aaaahh aaaraam sssseee kaarooo tttuummhaaree liiiiiye hhhhiiiiiiii to haai.maine unka left chuchi ko ragad ragad kar laal kar diye the,,,,to mujhe kehne lagi ki araaaam see jaaaalaan hoone laaagi hai,fir maine mousi ke pait par kiss kiyaa fir unki navel par. Maine unki navel mein apni jeebh se andar bahar karne laga to unhone mere baal pakad liye aur mera muh apni navel mein dabane lagi.unhe dar tha ki paas mein leita hua main yaani “kush” jag na jau kahi unki chudai se isliye jyada awaaze nahi kar rahi thi.fir main mousi ki chut ki taraf apna muh laakar unki jaangh par paglo ki tarah kiss karne laga.hum 69 ki position mein ho gaye the.

Fir main apni mousi ki pyari chut jo abhi tak panty mein kaid thi us par apna haat rakh diya,mujhe mousi ki Panty geeli mehsoos hui to maine sungh kar dekha to badi madak khusboo aa rahi thi unki panty se to maine apni jeebh se unki panty ko chaatne laga chut ke upar se hi.dusri taraf mousi mere l*** ke chaaro tarf se apni jeebh se chaat rahi thi,kabhi mere tatto ko bhi chaat rahi thi daba rahi thi,mujhe bahut maza aa raha tha fir unhhone mere l*** ki topi ko apne muh mein rakh kar aandar bahar kar rahi thi,mujhse raha nahi gaya to maine ek halka sa jhatka maara to mera 4″inch l*** unke muh mein chala gaya,is hamle se mer pyari mousi ke aankh se aansoo nikalne lage lekin unhone mera l*** bahar nahi nikala balki aur choos rahi thi.Idhar maine mousi ki panty nikaalne laga to mousi ne apni gaand uthakar meri help ki panty nikaalne mein,ab mousi ki wo chut mere saamne thi jo mujhe roz pareshan kare rakhti thi,ab main apni jubaan ko mousi ki chut par fira raha tha,upar se niche aur niche se upar ki taraf.meri mousi ka bura haal tha.fir maine apne haatn ki do ungli se mousi ki chut ko khola aur usme apni jeebh daal di aur jeebh se blah blah karne laga,meri pyari mousi paglo ki tarah apni gaand ko upar niche karne lagi.

Fir maine apni 3 ungli se unki chut se blah blah karne laga.issi douran meri mousi 2 baar jhad chuki thi aur Main unka ras pee gaya tha maine fir apni 1 ungli ko unki chut ki ras se bhigokar unki gaand ke chhed par rakh di unke upar niche hone ki wajah se meri ungli unki gaand mein andar bahar hone lagi.Udhar mera l*** ka bhi bura haal tha,mousi ne choos chooskar mere l*** ka paani nikal diya tha.mousi fir se mere l*** ko khada karne ke liye usse choos rahi thi kyouki unhe apni chut ki bhi sewa karwani thi.15-20 min. Baad mera l*** fir se khada hone laga to main mousi ki chut chhodkar unke muh ke paas aa gaya, mousi mera chehra pahadakar mera kaan apne muh ke paas laakar boli ki jaan aaj sex karne mein bahut maza aa raha hai aaj kaha se seekhkar aaye ho.maine unke honthon par apni ungli rakhkar unhe chup kara diya,kyouki main bhi bhi kuch nahi bol raha tha.to wo fir kuch nahi boli.Ab maine apne honth pyari mousi ke honthon par rakh diye unhone apna muh khola aur apni jeebh mere muh mein daal di.maine unki jeebh ko apne hontho se pakadkar apni jeebh se choosne laga,badi tasty thi meri pyari mousi ki jeebh aaaah mere se raha nahi gaya to maine unke dono chuchiyo ko apne haatho mein lekar jor de daba di,unke muh se cheekh nikalti nikalti reh gayi.kyouki unke muh ko mere muh ne bandh kiya hua tha.mera l*** mousi ki chut par dastak de raha thaaaaa. Mousi se raha nahi gaya wo mere kaan mein boli ki jaaan aab sssaahaaa naaahiiii raaaaaaheee hoooooo.maine mousi ka haath pakad kar apne l*** par rakh diya.Mousi ne apni taango ko failakar mera l*** apni chut ke dwar par rakh diya. Lekin main mousi ko aur tadpaana chahta tha isliye l*** andar nahi daala.5 min.

Baad mousi fir se mere kaan mein boli ab daaal bhiiiii dooo kyoo taadpa raaaahe hooo.itnaaa sunna tha ki maine ek jordar jhatka maarato mera l*** poora ka poora mousi ki chut mein chala gaya.mousi ki halak se ek halki si cheekh nikli to maine apna haath mousi ke muh par rakh diya mousi ki chut mujhe thodi tight lagi shayad mousa ka l*** mere se thoda chhota aur patla hoga.mousi ne mera haath hataya aur boli aaj tumhe kya ho gaya hai mujhe maar hi daaloge kya.aapka l*** bhi thoda baada baada laaaag raaaaaha haaaaai kya baaaaaat hai koooooi dawayi li hai kya aaaaaaj.maine unke hothon par apne honth unke honth par rakhkar fir se chup karwa diyaaaaa.Main mousi ki chut mein jordar l*** daalta gaya.aur mousi dheere se bolti jaa rahi thi ki uiiimaaa mmaaarrr ggggaayyyiiii aaaahhh merii cchhtttttt phaaatt ggaayyiii.aaaaarrrr rrr jjjjoooor ssssseee jaaaaaan faaad ddoooo aaaaaaaaj merrrrri chuuuut.mousi shayad bhool gayi thi ki ghar mein uska bhanja bhi so raha hai,lekin mousi ko kya pata ki bhanja hi chudai kar raha hai unki.mousa to neend ki goli lekar soya hua hai.mousi niche se uchchal uchchal kar mujhse chudwa rahi thi,is douran mousi 2 baar jhd chuki thi lekin main abhi jhadne nahi wala tha.maine mousi ko 25 min.tak lagatar jordar chudai kar raha tha.ab main thakne laga tha to maine mousi ko pakadkar apne upar bitha liya aur main niche lait gaya.mousi samajh gayi thi ki main kya chahta hu wo mere l*** ko pakdkar apni chut par set karke ek dam se mere l*** par baith gayi.aur apna muh mere muh kepaas laakar mujhe kiss karne lagi.aur dheere se boli ki itna maza to suhaagraatwali raat ko bhi nahi aaya tha jaan.jitna maza aaj aap tum de rahe ho.Mousi jaanti thi ki mousa ji sex karte hue bolte nahi the isliye unhe koi shak bhi nahi ho raha tha.maine mousi ki gaand ke niche haath rakha aur use upar niche karne laga jisse mousa ko ishara mil jaaye ki main kya chahta hu.mousi mere l*** par upar niche hokar chudai rahi ti.aisa lag raha tha ki.main mousi ko nahi mousimujhe chod rahi ho.aise hilte hue mousi ki chuchiya badi mast lag rahi Thi.maine haath badhakar mousi ki chuchiyo ko pakad liya aur mousi ko apni taraf kheecha jisse maine Mousi ko apne se chipka liya aur mousi mera l*** apni chut mein le rahi thi maine mousi ki ek chuchi ko muh lekar choosne laga to mousi apni dusri chuchi khud hi dabaane lagi.aise karte hue mousi ek baar aur jhadi.mousi ka paani mere l*** par aa raha tha maine apna haath apne l*** ke paas laakar mousi ki chut ka paani ko chhua to mera haath poora geela ho gaya.maine fir us haath ko apne muh ke paas laakar chaatne laga.mujhe achcha lag raha tha.main fir se chut ke paas haath rakha to fir geela ho gaya is baar maine mousi ke muh ke paas unhi ki chut ka paani laga hua haath le gaya.

Pehle to wo apna muh idhar udhar karti rahi.fir maine unke baal pakadkar apna haath unke muh mein de diya.jisse unhone chaat liya.meri ab thakaan mit chuki thi.maine mousi ko niche letaya aur unki taango ko bed ki side mein utar diya aur main unki taango ke paas jaakar khada ho gaya.maine unki gaand ke niche ek takiya lagaya jisse unki chut aur ubhar gayi.maine mousi ki ek taang apne kandhe par rakhi jisse mousi ki chut aur khul gayi thi.maine mousi ka haath pakadkar apne l*** par rakha mousi ne mera l*** pakadkar apni chut par rakha aur mera l*** daba diya.main samjh gaya.maine ek jhatka maara to mera l*** unki chut mein poora chala gaya.fir main dheere dheere mousi ki chudai kar raha tha to mousi boli ki jaaaaan joorrrr seee karo naaahii.Main fir jor se dhakke lagaane laga mousi bhi apni kamar utha uthakar mujhse chudwa rahi thiiiiii.mousi ki chut ne fir se paani chhod diya.maine ye mehsoos kiya to maine do ungli se chut ke paani se bheegokar mousi ki gaand par rakh di.jisse unke hilne se ungliya andar bahar hone lagi.Mousi ne shayad koi gaand nahi marwayi hogi.isliye wo baar baar meri ungli ko hata deti thi.45 min. Ke baad mujhe laga ki main jhadne wala hu maine mousi ki chudai ki speed aur bada di.mere saath saath mousi bhi ek baar ek jhad gayiiii mousi boliii is chudai mein mousi kam se kam 6 baar jhadi hogi.main apna l*** chut mein daale hue mousi par gir gaya.mousi mujhe choomne lagi aur kehne lagi jaan jaisa aaj choda hai waise roz kyo nahi chodte ho.tab main kiss karta hua bola meri pyari mousi darling aaj se pehle tumne mujhe mouka diya hi kaha tha.ye sunna tha ki mousi ek dam chouk gayi aur boli tere mousa ji kaha hai.maine kaha mousi wo to so rahe hai itni der se main hi aapki chudai kar raha tha mousi jaan.mousi mujhe apne se alag karne lagi.lekin maine mousi ko chhoda nahi.maine kaha aap bahut namkeen ho mousi,dil karta hai ki aapko chodta hi rahu.ye kehte hue main fir se mousi ki chut mein ungli karne laga aur unke boobs ko dabane laga.mousi ko bhi meri chudai achchi lagi thi isliye maan gayi.

मामी की समाज सेवा

हमारे पड़ोस में मेरा दोस्त रवि रहता है। रवि पड़ोस में अकेला रहता है उसका सारा परिवर गांव में है।

 

एक बार उसकी मामी किसी अधिवेशन के सिलसिले से उसके घर पर करीब दो महीने रही। सबसे पहले उसके मामी के विषय में आप लोगों को बता दूँ।

 

मामी का नाम फ़रीदा है वो करीब चालीस साल की सांवली, सुडौल, शादीशुदा महिला है। वैसे तो वो हाउसवाइफ़ है लेकिन गांव में मशहूर समाजसेविका है। उसके चूतड़ और वक्ष काफ़ी बड़े बड़े और भारी हैं। शकलसूरत से वो खूब सेक्सी और तीस साल से कम लगती है।

 

अकसर मैं शनिवार या रविवार जो कि मेरे छुट्टी के दिन हैं, रवि के साथ गुजारता हूँ। जबसे उसकी मामी आई है तब से मैं मामी से दोतीन बार मिल चुका हूँ। वो जब भी मिलती तो मुझे अजीब निगाहों से देखती थी। मुझे देख कर उसकी नज़रों में एक अजीब नशा छा जाता था या यूं कहिये उसकी नज़र में सेक्स की चाहत झलक रही हो !

 

ऐसा मुझे क्यों महसूस हुआ यह मैं बता नहीं सकता हूँ लेकिन मुझे हमेशा ही लगता था कि वो नज़रों ही नज़रों में मुझे सेक्स की दावत दे रही हो। मैं जब भी उनसे मिलता तो कम ही बातचीत करता था मगर जब वो बातें करती तो उनकी बातों में दोहरा अर्थ होता था

 

जैसेतुम खाली समय में कुछ करते क्यों नहीं?

 

मैंने कहामामी जी, क्या करुँ आप ही बतायें?

 

वो बोलीतुम्हें खाली समय का और मौके का फायदा उठाना चाहिये।

 

मैंने कहाजरूर फायदा उठाऊँगा अगर मौका मिले तो।

 

वो बोलीमौका तो कब से मिल रहा है लेकिन तुम कुछ समझते नहीं ! ही कुछ करते हो !

 

मैं उनकी बातें सुन कर चकराया और बोलामामी जी, आपकी बातें मेरे दिमाग में नहीं घुस रही हैं।

 

वो बोलीदेखो आज और कल यानि शनिवार और रविवार तुम्हारी छुट्टी होती है तो तुम्हें कुछ कुछ पार्टटाइम जोब करना चाहिये ताकि तुम्हारी आमदनी भी हो जायेगी और टाइम पास भी होगा।

 

इसी तरह की दोहरे शब्दो में मामी जी बातें करती थी और वो जब भी मुझसे बातें करती तब रवि या तो बाथरूम में होता या फिर किसी काम में व्यस्त होता।

 

एक दिन जब सुबह करीब 11 बजे रवि के घर पहुंचा तो घर पर उसकी मामी थी। रवि मुझे कहीं नज़र नहीं आया।

 

मैंने पूछामामी जी ! रवि नज़र नहीं रहा है ! कहाँ गया वो?

 

मामी: वो बाथरूम में कब से नहा रहा है। मैं उसी के बाहर निकलने का इन्तज़ार कर रही हूँ।

 

लेकिन वो तो ज्यादा समय बाथरूम में लगाता ही नहीं ! तुरंत 5 मिनट में जाता है।

 

मामी हंसते हुए: अरे भाई, बाथरूम और बेडरूम ही तो ऐसी जगह है जहां से कोई भी जल्दी निकलना नहीं चाहता है।

 

मैं कोई जवाब नहीं दे सका, वो भी चुप रही।

 

थोड़ी देर बाद रवि बाथरूम से नहाधो कर बाहर आया। उसके बाथरूम से आते ही मामीजी बाथरूम में गई और मेरी तरफ़ नशीली नज़रों से देखती हुई बोली घबराना मत मैं ज्यादा समय नहीं लगाउंगी। आप लोग नाश्ते के लिये मेरा इन्तज़ार करना !

 

कहते हुए वो बाथरूम में घुस गई करीब 20 मिनट बाद वो तैयार होकर हमारे साथ नाश्ता करने लगी।

 

नाश्ता करते वक्त रवि ने कहायार, आज मुझे ऑफ़िस के काम के सिलसिले में सूरत जाना है। और मैं कल रात को या सोमवार दोपहर को वापस लौटूंगा। अगर सोमवार दोपहर को लौटूंगा तो तुम्हें कल फोन कर दूंगा। अगर तुम्हें ऐतराज़ न हो तो तुम, जब तक मैं नहीं आता हूँ, मेरे घर रुक जाना ताकि मामी को बोरियत महसूस नहीं हो, ही मुझे उनकी चिंता रहेगी क्योंकि वो दमन में पहली बार आई हैं।

 

मैंने कहाठीक है ! मुझे कोई परेशानी नहीं !

 

वो 12:30 बजे वाली ट्रेन से सूरत चला गया। मैं भी उसे ट्रेन में बिठाने के लिये बोरिवली गया। जब वापस लौट रहा था तो मैंने एक बार में जाकर 3 पेग व्हिस्की पी और लौट कर रवि के घर गया। घर पर मामी जी हाल में बैठ कर कोई किताब पढ़ रही थी। मुझे नशीली निगाहों से देखा और बोलीरवि को बैठने की सीट मिल गई थी क्या ?

 

मैंने कहाहां ! क्योंकि ट्रेन बिल्कुल खाली थी।

 

वो बोलीमैंने खाना बना लिया है! भूख लगी हो तो बोल देना।

 

मैंने कहा अभी भूख नहीं है जब होगी तो बोल दूंगा।

 

मामी की निगाहों में अजीब नशा देख कर मैंने पूछामामी जी ! आप करती क्या हैं?

 

थोड़ी देर तक मेरे नज़रों से नज़रें मिलाती रही, फिर बोलीसमाजसेवा !

 

यह सुनते ही अचानक मेरे मुँह से निकल गयाकभी हमारी भी सेवा कर दीजिये ताकि हमारा भी भला हो जाये।

 

वो हल्के से मुस्कुराई और बोलीतुम्हारी क्या परेशानी है?

 

मैंने कहावैसे तो कुछ खास नहीं है, लेकिन बता दूँगा जब उचित समय होगा।

 

वो मेरे आंखों में आंखें डालती हुए बोलीयहाँ तुम्हारे और मेरे अलावा कोई नहीं है, बेझिझक अपनी परेशानी कह डालो ! शायद मैं तुम्हारी परेशानी हल कर दूं?

 

मैंने कहाआप किस प्रकार की समाज सेवा करती हो?

 

वो बोलीमैं जरुरतमंद लोगों की जरुरत पूरी करने की मदद करती हूँ, उनकी समस्या हल करती हूँ।

 

मैंने कहामेरी भी जरुरत पूरी कर दो !

 

वो बोलीजब वक्त आयेगा तो कर दूंगी !

 

फिर वो चुप रही और मैगज़ीन पढ़ने लगी।

 

थोड़ी देर बाद मैंने पूछामामी जी, आप क्या पढ़ रही हैं? कुछ खास सब्जेक्ट है क्या इस मैगज़ीन में?

 

वो मुस्कुराते हुए बोलीइस मैगज़ीन में बहुत अच्छा लेख है पत्नि और पति के सेक्स के विषय में।

 

फिर वो पढ़ने लगी। थोड़ी देर बाद उसने पूछायह सिडक्शन का क्या मतलब होता है?

 

मैं सोचने लगा !

 

वो मेरी ओर कातिल निगाहों से देखती हुई बोलीबताओ !

 

मेरी समझ में नहीं आया कि हिंदी में उसे कैसे बताऊँ।

 

वो लगातार मेरी ओर देख रही थी। उसकी आंखों में नशा छाने लगा। मैं उसे गौर से देख रहा था, उसके होंठ खुश्क हो रहे थे। वो अपने होंठों पर जीभ फेर रही थी। मैंने सोचा अच्छा मौका है मामी को पटाने का।

 

वो इठलाकर बोलीबताओ क्या मतलब होता है?

 

उसकी इस अदा को देखते हुए मैंने कहाशायद चुदास !

 

वो बोलीक्या कहा? क्या मतलब होता है?

 

मैंने कहाक्या तुम चुदास नहीं समझती हो?

 

वो बोलीकुछ कुछक्या यही मतलब होता है?

 

मैंने कहाहां शायद यानि कि…… !

 

कैसे समझाऊँ तुम्हें मामीजी ! मैंने उलझ कर कहा।

 

वो हंसते हुए बोलीचुदास का मतलब सेक्स करने की चाहत तो नहीं?

 

मैं उसे एकटक देखने लगाउसके होंठों पर चंचल मुस्कुराहट थी।

 

मैंने कहाठीक समझी आप।

 

वो मेरे आंखों में आंखे डाल कर बोलीकिस शब्द से बना है चुदास?

 

मैंने उसकी आवाज में कंपकपी महसूस की। मेरे दिल ने कहागधे वो इतना चांस

दे रही है तू भी बन जा बेशरम, वरना पछतायेगा।

 

मैंने कहाचुदास चोदना शब्द से बना है।वो खिलखिला कर हंसने लगी और मैगज़ीन के पन्ने पलटने लगी। मैं सोचने लगा अब क्या करूं?

 

अचानक उसने पूछाये वेजिना क्या होता है?

 

मेरे दिल ने कहासाली जानबूझ कर ऐसे सवाल पूछ रही है।मैंने बिंदास होकर कहायोनि को वेजिना कहते हैं।

 

उसने फिर पूछायह योनि क्या होता है?

 

मैंने कहाक्या आप योनि नहीं जानती हो?

 

वो बोलीनहीं।

 

मैंने कहाचूत समझती हो?

 

उसने झट से मुँह पर हाथ रखा और मैगज़ीन के पन्ने पलटती हुई बोलीहाँ !

 

मैंने हिम्मत कर के कहाचुदास की बहुत चाहत हो रही है?

 

उसने हल्के से मुस्कुराते हुए कहाचुदास की प्यास?

 

मैंने कहावाकई चुदास की प्यास लगी है?वो बोलीमैं दो साल से प्यासी हूँ, क्योंकि दो साल पहले मेरा पति से तलाक हो गया था।

 

मैंने कहाओह ! इसका मतलब कि दो साल से तुम्हारी चूत ने लंड का पानी नहीं पिया है।

 

वो सिर झुका कर बोलीआज तक तुम्हारे जैसा कोई मिला ही नहीं।

 

मैं बोलाअगर मिल जाता तो?

 

वो बोलीतो मैं अपनी चूत को उस लंड पर कुर्बान कर देती।

 

मैं बोलाआओ मेरा लंड तुम्हारी चूत पर न्यौछावर होने के लिये बेकरार है।

 

तुरंत उसे अपने बाहों में ले लिया और उसके होंठों में होंठ डाल कर चुम्बन करने लगा। मैंने महसूस किया कि उसके हाथ मेरे लंड की तरफ़ बढ़ रहे थे और उसने पैंट की ज़िप खोल कर मेरे लंड को पकड़ लिया, फिर धीरे धीरे सहलाने लगी। मेरा लंड लोहे की तरह सख्त हो गया। मुझसे बरदाश्त नहीं हुआ और मैं पैंट और अंडरवीयर निकाल कर बिल्कुल नंगा हो गया। अब उसने फिर मेरे लंड को पकड़ कर अपने मुँह में ले लिया और लॉलीपोप की तरह चूसने लगी। मुझे बड़ा मज़ा आ रहा था। कभी वो मेरे लंड के सुपाड़े को चूसती, कभी जबान से लंड को जड़ तक चाट रही थी। ऐसा उसने करीब 15 मिनट तक किया। आखिर में रहा गया, मैंने उसके मुँह में ढेर सारा वीर्य डाल दिया।

 

फिर हम दोनों सोफ़े पर आकर बैठ गये। मेरा लंड फिर सामान्य हो गया। वो अब भी साड़ी पहने हुई थी मैंने उसकी साड़ी में हाथ डाल कर जांघों को सहलाया फिर हाथ को उसके चूत पर ले गया। उसकी पैंटी गीली हुई थी इतनी गीली थी जैसे पानी से भिगोई हो। मैंने उसके पैंटी के ऊपर से ही चूत को मसलना शुरु किया। वो बिन पानी के मछली की तरह तड़पने लगी। फिर मैंने उसकी पैंटी में हाथ डाला। उसकी चूत फूली हुई और गरम भट्टी की तरह सुलग रही थी।

 

मैं उसकी चूत की दरार में उंगली डाल कर चूत के दाने को मसलने लगा जिस कारण वो बेकरार होने लगी। अब मैंने उसे सोफ़े पर लिटा कर उसकी साड़ी और पेटीकोट को ऊपर सरकाया। उसकी पैंटी चूत के अमृत से तरबतर थी। मैंने पैंटी को पकड़ा और जांघों तक सरका दिया। अब उसने खुद उठ कर अपनी पैंटी निकाल दी और फिर सोफ़े पर लेट गई। उसके घुटने ऊपर थे और टांगें फैली हुई थी। उसकी सांवली चूत अब बिल्कुल साफ़साफ़ दिखाई दे रही थी। मैंने अपने एक उंगली उसकी चूत में डाली तो मुझे लगा मैंने आग को छू लिया हो क्योंकि उसकी चूत काफ़ी गरम हो चुकी थी। मैं धीरेधीरे अपनी उंगली उसके चूत में अंदरबाहर करने लगा, उसके मुंह से आअह्हह्हाअ ऊऊऊफ़्फ़फ़्फ़ की आवाज निकल रही थी।

 

अब मैंने दो उंगलियाँ उसकी कोमल चूत में घुसाई। चिकनी चूत होने से दोनों उंगलियाँ आराम से अंदरबाहर हो रही थी। लगभग पचास साठ बार मैंने अपनी उंगलियों से उसकी चूत की घिसाई की। इधर मेरा लंड भी फूल कर तन गया था। अब मैं उठ खड़ा हुआ और उसे लेकर बेडरूम में ले गया। वो आंखें बंद किये मेरे अगले कदम का इन्तज़ार करने लगी।

 

मैंने शर्ट निकाल कर उसकी साड़ी और पेटिकोट दोनों उतार दिये और हम बिल्कुल नंगे हो गये। वो करवट लेकर लेट गई। अब उसके चूतड़ साफ़ झलक रहे थे। मैंने उसकी गांड पर हाथ फ़िराया।

 

क्या गांड थी ! गोल मटोल गांड थी उसकी !

 

मैं करीब 5 मिनट तक उसकी गांड को सहलाता रहा, फिर उसकी कमर पकड़ कर चित्त लिटा दिया। और जितना हो सका उतनी उसकी टांगें फैला दी। फिर उसकी चूत की दरारों को फैला कर अपनी जीभ से चूत चाटने लगा। उसके मुंह से हाअ ऊऊफ़्फ़फ़्फ़ की नशीली आवाजें निकल रही थी। अपनी जीभ से उसकी चूत के एकएक भाग चाट रहा था। बीच बीच में चूत को जीभ से चोद रहा था। वो बिल्कुल पूरी तरह से गरम हो चुकी थी।

 

वो बोलीअब हटो ! मेरी चूत काफ़ी गरमा चुकी है।

 

अपना लंड मेरी गरमगरम चूत में घुसेड़ दो राजा। उफ़्फ़फ़। अपने लंड से मेरी चूत की गरमी और प्यास बुझा दो ! आज इतना कस कस कर चोदो कि मेरे पूरे अरमान निकल जायें।

 

जैसे ही मैंने उसकी चूत से अपना मुंह हटाया उसने अपनी टांगें मोड़ ली। मै उसकी उठी हुई टांगों के बीच बैठ गया। मैंने उसकी टांगें अपने हाथ से उठा कर अपना लंड उसकी चूत के मुंह पर रखा। जिस कारण उसके शरीर में झुरझुरी मच गई। लंड को चूत के मुंह में रखते ही चूत की चिकनाहट के कारण अपने आप अंदर जाने लगा। मैंने कस कर एक धक्का मारा तो लंड पूरा का पूरा उसकी चूत में घुस गया।

 

गरमागरम चूत के अंदर लंड की अजीब हालत थी। अब मैं धीरे धीरे अपना लंड उसकी चूत के अंदर बाहर करने लगा। उसकी चूत के घर्षण से मेरा लंड फूल कर और मोटा हो गया। मेरे हर धक्के पर वो ऊऊफ़्फ़फ़्फ़ आआह्हह ऊऊह्हह्हह की आवाजें निकालने लगी। करीब 20 मिनट तक मैं उसके चूत में अपना लंड अंदरबाहर करता रहा। फिर मैंने अपनी स्पीड बढ़ा दी और दना दन लंड को चूत में मूसल की तरह घुसाता रहा।

 

उसने मुझे कस कर बाहों में जकड़ लिया, मैं समझ गया कि वो झड़ रही है, और कराह रही थी, बोल रही थीहाय! दो साल बाद मेरी चूत की खुजली मिटी है। वाकई तुम पक्के चुदक्कड़ हो। चोदो मुझे ! जोर जोर से चोद।

 

मेरा लंद फच फच की आवाज के साथ अंदरबाहर हो रहा था। पूरे कमरे में चुदाई की फ़चाफ़च फ़चाफ़च की आवाजे गूंज रही थी। मेरा लंड उसकी चूत को छेदता जा रहा था कुछ देर बाद उसके झड़ने के कारण मेरा लंड बिल्कुल गीला हो चुका था और वो निढाल होकर लम्बी लम्बी सांसें ले रही थी। करीब 50-60 धक्कों के बाद मेरे लंड से आखिर जोरदार फ़व्वारा निकला और उसकी चूत में समा गया। जब तक लंड से एक एक बूंद उसकी चूत में समाती रही मैं धक्कों पर धक्के लगाता रहा। आखिर में मैंने अपना लंड बाहर निकाला और उसके बाजू में लेट गया। हम दोनों की सांसे तेज चल रही थी, वो दाहिने करवट से लेटी हुई थी। करीब 15-20 मिनट तक हम ऐसे ही लेटे रहे।

 

फिर मेरी नज़र उसकी गांड पर पड़ी। गांड का ख्याल आते ही लंड फिर से हरकत करने लगा। मैंने अपनी एक उंगली उसकी गांड के छेद पर रख कर घुसाने की कोशिश की। उसकी गांड का छेद बहुत टाइट था। मैंने ढेर सारा थूक उसकी गांड के छेद पर और अपनी उंगली पर लगाया और दुबारा उसकी गांड में उंगली घुसाने की कोशिश करने लगा। गीलेपन के कारण मेरी उंगली थोड़ी गांड में घुस गई

उंगली घुसते ही वो कसमसाहट करने लगी। वो तड़प कर आगे खिसकी जिस वजह से

उंगली गांड के छेद से बाहर निकल गई और मुड़ कर बोलीक्या कर रहे हो?

 

मैंने कहातुम्हारी गांड सचमुच खूबसूरत है।

 

वो बोलीउंगली क्यों घुसाते हो? लंड क्या सो गया है?

 

उसकी यह बात सुनकर मैं खुश हुआ और उसे पेट के बल लिटा दिया और दोनों हाथों से उसके चूतड़ फ़ैला दिए जिससे उसकी गांड का छेद और खुल गया।

 

वो धीरे से बोलीनारियल तेल या कोई चिकनी चीज मेरे गांड और लंड पर लगा लो तो आसानी रहेगी।

 

मैंने कहामैडम इससे भी अच्छी चीज है मेरे पास वेसलीन !

 

मैं उठ कर ड्रायर से वेसलीन ले आया और ढेर सारी वेसलीन अपने लंड और उसकी गांड पर लगाई और उसकी गांड मारने को तैयार हो गया। अब मैंने अपना लंड उसकी गांड के सुराख पर लगाया और थोड़ा जोर लगा कर धकेला। लंड का सुपाड़ा गांड में थोड़ा सा घुस गया। फ़िर थोड़ा जोर लगा कर और धक्का दिया तो सुपाड़ा उसकी गांड में समा गया।

 

सुपाड़ा गांड में घुसते ही वो बोलीथोड़ा आहिस्तेआहिस्ते डालो ! दर्द हो रहा है ! दो साल हो गये गांड मरवाये।

 

अब मैं सिर्फ़ सुपाड़े को ही धीरेधीरे गांड के अंदर बाहर करने लगा। थोड़ी देर बाद ही उसकी गांड का छेद पूरा लंड खाने के काबिल हो गया। मुझे लगा कि अब मेरा लंड पूरा उसकी गांड में घुस जायेगा और ऐसा ही हुआ। उसकी गांड के छेद में चिकनाहट की वजह से लंड थोड़ा थोड़ा और अंदर समाने लगा। दोतीन मिनट की मेहनत से मेरा लंड पूरा का पूरा उसकी गांड में घुस गया। मैं धीरे धीरे अपना लंड उसकी गांड से अंदर बाहर करने लगा।

 

उसकी गांड कसी होने से मुझे बड़ा मजा रहा था। उसे भी गांड मरवाने का मजा आ रहा था और मुंह से ऊफ़्फ़ आह्हा की आवाजें निकाल रही थी। 40-50 धक्कों के बाद मेरे लंड ने घुटने टेक दिये और उसकी गांड में ढेर सारा वीर्य छोड़ दिया। वो भी अपनी गांड को सिकोड़ने लगी।

 

अब हम दोनों निढाल होकर बिस्तर पर लेट गये। जब तक मेरा दोस्त नहीं आया मैंने उसकी मामी की कई बार चूत और गांड मारी।

 

जब मैं वापस अपने घर लौटने लगा तो मामी बोलीकैसी रही मेरी समाज सेवा?

 

मैंने हंस कर कहामामी जी, आप सच्चे तन मन से समाज सेवा करती हो !

 

फिर मैं घर लौट आया।

 

© Me Mast

भाभी और शिष्य

मैंने एक फ्लैट किराये पर लिया था जिसमें आगे की तरफ माकन मालिक और पीछे के रास्ते से मेरा फ्लैट था जो कि दो कमरों का अच्छा सेट था। मैं कब आऊँ, कब जाऊँ किसी को कोई मतलब नहीं था। पीछे के दरवाज़े की एक चाभी भी मेरे पास रहती थी। कभी कभी मकान मालिक का बेटा ही उस तरफ आता था जो मुझसे काफी बड़ा था। या कभी मकान मालिक अपने पोतों के साथ आते थे।

इस मकान को लेने के बाद मुझे ऐसा लगा कि गलती कर दी क्यूंकि कोई भी माल नज़र नहीं रहा था। कुछ एक जो थे वो काफी दूर रहते थे और कोई जुगाड़ बन नहीं रहा था। करीब डेढ़ महीने बाद एक भाभी जी करीब ३० साल की होगी, सामने के मकान में आई। उनके परिवार में बच्चे और उनके पतिदेव थे। बच्चे भी ठीक ठीक उम्र के थे एक लड़की करीब १० साल की, एक लड़का साल का और एक साल का।

aपहले कुछ दिन तो मैंने ध्यान नहीं दिया और अपने ऑफिस आता जाता रहा लेकिन एक दिन शाम को जब मैं चाय पी रहा था तो देखा कि भाभी जी छत पर खड़ी हैं और घूर घूर कर मुझे देख रही हैं। मैं थोड़ा सा झेंप गया लेकिन सोचा कि शायद नए हैं इसीलिए देख रही होंगी कि कौन कौन आस पास रहता है। पर फिर ये ही मंज़र रोज रोज होने लगा वो छत पर आती और घूरती रहती थी। वैसे मेरी और उनकी खिड़की भी लगभग आमने सामने ही थी और दरवाज़ा भी, लेकिन मेरा फ्लैट उनके फ्लैट से थोड़ा ऊंचाई पर बना था तो मैं तो आराम से देख सकता था कि उनके कमरे में क्या हो रहा है पर वो नहीं देख सकती थी। अगर मैं खिड़की पर खड़ा होता तभी नज़र आता।

उनके पति जो करीब ४४४६ साल के थे दरअसल एक सरकारी विभाग में थे और सुबह जल्दी जाते थे और शराब के शौकीन थे इसलिए रात को देर से ही आते थे।

एक दिन मकान मालिक को कुछ काम था और उनका बेटा भी घर पर नहीं था, तो उन्होंने मुझसे कहाबेटा तुम्हारे सामने जो नए लोग आए हैं उन्हें जरा ये सरकारी पेपर दिखा लाओ और पूछो कि इसमें क्या कर सकते है।

मैंने कहाठीक है !

और पेपर लेकर मैं उनके घर गया घंटी बजाई तो भाभी जी ने दरवाजा खोला और अन्दर बुलाया। मैंने भाई साहब यानि उनके पति के बारे में पूछा तो बोली कि वो तो देर से आएंगे, मैं उन्हें ही बता दूँ !

मैंने पेपर दिखा कर जानकारी ली, उन्हें जो कुछ मालूम था मुझे बताया और कहा कि मैं रात को उनके पति से मिलकर पूरी बात समझ लूँ।

मैं उठने लगा तो बोलीबैठिये ! आप तो पड़ोसी हैं !

फिर वो चाय नाश्ता वगैरह लाई और बातें करने लगी।

वो बोलीमैं तो इतने दिनों से आपको आते जाते देखती हूँ, पर आप कभी इधर देखते ही नहीं।

मैं क्या कहता, मैंने कहाबस अपने ही काम में व्यस्त रहता हूँ !

लेकिन अन्दर ही अन्दर मैं जानता था कि सच्चाई क्या है। दरअसल भाभी जी बड़ी सेक्सी थीं, वो हलकी सांवली इकहरे बदन की थी, साथ ही एक दम कसा हुआ ब्लाउज पहनती थी, जिससे उनके गोल गोल उभार नज़र आते थे और मेरे मकान मालिक के बेटे की नज़र भी उन पर थी। साथ ही साड़ी का पल्लू भी लटकता था जिससे सब कुछ साफ था, पर मैं चुप ही रहा।

बात बात में उन्होंने मेरा नाम पूछा और मैंने उनका !

तो उन्होंने बताया कि उनका नाम सुगंधा है और उन्होंने यह भी कहा कि मैं शाम को चाय उनके यहाँ ही पिया करूँ और उनके बच्चों को पढ़ा भी दिया करूँ !

तो मैंने कहापढ़ाना तो मुश्किल है क्यूंकि मेरे पास फिक्स टाइम नहीं है पर जब भी जरुरत हो बता देना, मैं आकर उन्हें मदद कर दूंगा।

धीरे धीरे वो रोज ही मिलने लगी। जब मैं शाम को ऑफिस से लौटता तो वो सड़क पर ही खड़े होकर बात करने लगती। लोगों की नज़र में भी कुछ गलत नहीं था क्यूंकि मैं अक्सर उनके बच्चो को सड़क पर ही किताब से सवाल समझा देता या वो मेरे पास आकर पूछ लेते, और मेरे और भाभी के बीच करीब साल का अंतर भी था।

एक दिन मैं उनके घर गया तो वहां कोई नहीं था। अन्दर तक देखने पर कोई नहीं दिखा तो मैंने आवाज़ दीभाभी जी !

फिर भी कोई जवाब नहीं आया मुझे लगा कि शायद छत पर होंगी और मैं लौटने लगा और फिर आवाज़ दी तो बोलीइधर जाओ ! मैं यहाँ हूँ !

मैं उस तरफ गया तो कोई नहीं दिखा। अचानक से उनके बाथरूम का दरवाज़ा खुला और मैं सकपका गया। वो बिलकुल गीले बदन नहाई हुई मेरे सामने खड़ी थी और बदन पर सिर्फ एक झीने से कपड़े की चुन्नी थी। मैं घूमने लगा तो बोलीशरमा गए क्या शर्मा जी? लगता है तुमने आज तक कोई नंगी लड़की या औरत नहीं देखी !

बात भी सच थी कि मैंने गांड तो बहुत मारी थी और नंगी लड़कियाँ किताबों और इन्टरनेट पर देखी थी पर सामने कोई नहीं।

मैंने कहाशर्माने की ही बात है, मुझे माफ़ कीजिये, मुझे पता नहीं था, मैं बाहर इन्तज़ार कर रहा हूँ !

वो बोलीइन्तज़ार में कहीं गाड़ी छूट जाये ! और मेरा हाथ पकड़ लिया।

उन्हें देख कर मेरे लंड से पानी चूने लगा था। वो बोलीजब मैं लड़की होकर नहीं शरमा रही, तो तुम क्यों शरमा रहे हो !

और उन्होंने मुझे अपने करीब घसीट लिया। अब मेरे और उनके बीच में सिर्फ इंच की दूरी थी। सर नीचे करता तो निगाहें उनकी चुचियों पर जाती और ऊपर करता तो उनकी आँखों की हवस मुझे खाए जा रही थी। मेरा लण्ड भी तन रहा था और धीरे धीरे उनकी नाभि से टकराने लगा। उसे देख कर वो बोलीतुम शरमा रहे हो पर तुम्हारा ये नहीं शरमा रहा ! देखो कैसे मेरे बदन को सलामी दे रहा है !

और उन्होंने मेरा लंड पकड़ लिया। फिर तो ऐसा लगा कि अभी झड़ जायेगा। मैंने बड़ी मुश्किल से अपना लण्ड छुड़ाया और उनसे पूछाआपको क्या चाहिए?

वो बोलीवही जो अभी पकड़ा था।

मैंने कहामेरे पास कंडोम नहीं है !

वो बोलीकोई बात नहीं, डरो मत ! मैं भी कोई ऐसी वैसी नहीं हूँ सिर्फ अपने पति से ही खुश हूँ, लेकिन तुम्हें देख कर मेरे मन में फिर से चुदाई के बादल उमड़ने घुमड़ने लगे हैं और मैं यह भी जानती हूँ कि तुम भी छुप छुप कर अपने खिड़की से मुझे देखते हो।

जब बात खुल ही गई थी तो मैंने भी कह दियाहाँ, आप मुझे अच्छी लगती हो !

उन्होंने मुझे जोर से भींच लिया और मेरा सर झुकाकर अपनी चुचियों में दबा लिया। मैंने भी उनकी चूचियां चूसनी चालू कर दी।

तो वो बोलीयहीं करोगे या बिस्तर पर?

फिर मैं उनके बेडरूम में गया, जहाँ उन्होंने चुन्नी हटा दी और मुझे नंगा करने लगी। वैसे भी उन्हें ज्यादा दिक्कत नहीं हुई क्यूंकि मैंने एलास्टिक वाला निक्कर और टीशर्ट पहनी थी। उसे उतार कर उन्होंने मेरे कच्छे पर भूखी शेरनी
जैसी निगाह डाली और एक ही बार में उसे नीचे कर दिया। मेरा लंड तन चुका था। उन्होंने तुंरत उसे चूसना शुरू किया और मिनट बाद मुझे लगा कि मैं झड़ने वाला हूँ, तभी मैंने उसे निकाल लिया।

वो बोलीक्या हुआ? फ़ुस्स हो गए क्या ?

मैंने कहानहीं ! हो जाऊंगा !

वो बोलीकोई बात नहीं ! मुझे मालूम है कि तुम्हारा लण्ड अभी कुंवारा है इसीलिए मैं तुम्हें प्रैक्टिस करा रही हूँ जिससे तुम्हारी बीबी को दिक्कत हो।

वो फिर चूसने लगी और मैंने उनके मुँह में ही सारा माल टपका दिया और वो बड़े प्यार से उसे निगल गई।

अब तो मेरा पौने सात इंच का लण्ड सिकुड़ कर सिर्फ ढाई इंच का ही रह गया था तो मैं शरमाने लगा। वो बोलीशरमाओगे ही या कुछ और भी करोगे ?

मुझे लगा कि अब तो इसकी चूत का भोसड़ा बनाना ही पड़ेगा। अब यह वो वक़्त था जब मेरा गांड मारने का अनुभव काम आता।

मैंने उसकी चुचियों को चूसना शुरू किया और उनसे खेलने लगा। पहले दाईं वाली फिर बाईं वाली और कभी कभी दोनों ! चूसते दबाते करीब आधा घंटा हो गया था। उसकी दोनों चुचियाँ सांवले से लाल रंग की हो गई थी और चूचुक ऐसे लग रहे थे जैसे उनसे अभी खून टपक जायेगा। वो बोलीक्या हाल कर दिया है तुमने इनका !

मैंने कहासॉरी ! अभी नया नया हूँ !

तो वो मुस्कुरा उठी और फिर मेरा लंड चूसने लगी। अब तो मेरा लंड अखाड़े में खड़े दारा सिंह जैसा हो गया था। सारी नसें खून से भरी थी और लग रहा था कि अभी शायद पौने सात से बढ़कर १५ इंच का हो जायेगा। आखिर पहली बार चूत का स्वाद जो मिल रहा था। वो मेरे लंड को मुँह में लेकर अन्दर बाहर कर रही थी। कभी कभी मैं उसका सर दबा देता तो वो उसके गले के अन्दर तक धंस जाता और वो खांसने लगती।

करीब १० मिनट बाद मैंने कहाअब मेरी बारी !

मैंने उसकी टांगे फैलाईं और किताबों में पढ़े हुए अनुभव आजमाने लगा। उसकी चूत पर हलके हलके जीभ फिराने लगा और फिर अन्दर बाहर करने लगा। उसकी भगनासा फूल कर मोटी हो गई थी। उसकी चूत को दस मिनट तक ऐसा चूसा कि वो सूज गई और अचानक से भाभी अपनी कमर उचकाने लगी, ऊपरनीचे, ऊपरनीचे !

मैंने कहाक्या कर रही हो ! चूसने तो दो !

वो बोलीबहुत चूस चुके, अब जरा असली काम करो !

तो मैंने अपने लंड को सहलाया और सुपाड़े के ऊपर से खाल को पीछे सरका कर उनकी चूत के मुँह पे रख दिया। उनकी चूत एक दम कुंवारी लड़की जैसी टाइट थी, वो बोलीडाल दो !

क्यूंकि अब वो बहुत गरम थी, लेकिन मैं नहीं चाहता था कि वो इतनी जल्दी झड़े। मैं उनकी चूत के ऊपर अपना लंड घिसने लगा और मिनट बाद सिर्फ सुपाड़ा ही अन्दर सरकाया तो वो कराह उठी। मैंने कहातुम्हें तो अनुभव है, फिर क्यों चिल्ला रही हो?

वो बोलीकरीब तीन साल से एक भी बार सेक्स नहीं किया है, जबसे छोटा बेटा हुआ है, क्यूंकि कम उम्र में ही शादी हो गई थी और तब मैं १८ साल की थी और तुम्हारे भैया करीब ३४ साल के ! गाँव की शादी थी, उन्होंने तब चोदा था जम के। फिर पहला बच्चा होने के बाद हमारे बीच में सम्बन्ध के बराबर ही बने सिर्फ गिनती के। शराब के कारण मैं उन्हें मुँह नहीं लगाती और कभी कभी वो लंड खड़ा करने की गोली खाकर आते थे तब चुदाई होती थी। लेकिन अब जब वो करीब तीस की थी और भैया हो चुके थे। ४४४५ के तो भैया के लंड में दम नहीं रह गया था और वो सही से खड़ा भी नहीं होता था।

मैंने कहासारी कहानी अभी बता दोगी या चुदवाओगी भी?

वो बोलीआराम आराम से करो !

फिर तो मैंने उस कुंवारी जैसी चूत को कुंवारा जैसा ही चोदा।

धीरे धीरे मिनट हलके से ही सिर्फ सुपाड़ा ही अन्दर बाहर करके पहले रास्ता बनाया फिर एक हल्का झटका देकर करीब आधा लंड अन्दर किया तो उनके आँखों में संतुष्टि नज़र आई और फिर स्पीड बढ़ाई और करीब मिनट बाद एक ही झटके में अपनी फतह का झंडा जैसे ही उनकी चूत की जमीन पे फहराया तो उनकी आँखों से आंसू निकालने लगे, वो बोलीबाहर करो !

मैंने कहाभाभी अब तो ये बोफोर्स तोप झंडा फहरा कर ही वापस आयेगी !

भाभी की आँखों से आंसू बह रहे थे जो उनकी चूत के कुंवारे होने का सुबूत दे रहे थे। तभी भाभी की आँखों के आंसू थमने लगे और और वो जोर जोर से सिसकियाँ लेने लगी। अचानक से उन्होंने मुझे बड़ी जोर से पकड़ा और चूत उछालने लगी और मुझसे लिपट गई।

मैंने कहाक्या हुआ भाभी?

वो बोलीबस, अब रुक जाओ !

मैंने कहावो तो ठीक है लेकिन अभी तोप में गोले बाकी हैं ! इन्हें कहाँ करूँ ?

वो बोलीमेरे मुँह में कर दो !

मैंने कहावो तो हो चुका, अब जरा कुछ और !

वो बोलीक्या ?

तो मैंने उनकी गांड में ऊँगली डाल दी।

वो बोलीनहीं !

तो मैंने कहाफिर मैं गुस्सा हो जाऊंगा और दोबारा फिर ये कभी नहीं होगा।

आखिर वो भी मजबूर थी और मान गई।

अब मैंने उनकी टांगे अपने कन्धों पे रक्खी और एक ही बार में पूरा लंड उनकी गांड में पेल दिया। उनकी तो गांड फट गई, वो चिल्लाने लगी जैसे मैं उनका गला दबा रहा था।

मैंने कहाचिल्लाओ मत ! और उनका मुँह अपने हाथ से बंद किया और मिनट तक अपने लंड वैसे ही उनकी गांड में पड़े रहने दिया। फिर जब वो थोडा संभली तब मैंने फिर से चोदना शुरू किया और मिनट में ही भाभी अपनी गांड भी चूत की ही तरह उछालने लगी।

फिर मैं भी थक गया था, स्पीड बढा दी और कुछ ही देर में मैंने उनके अन्दर अपना वीर्य छोड़ दिया। भाभी अब काफी संतुष्ट थी। फिर मैं भी अपने लंड पर इतरा रहा था और भाभी भी उसकी मर्दानगी की प्रशंसा कर रही थी।

फिर मैं घर गया और इसी तरह कई बार जब वो अकेले में होती तो उन्हें जमकर चोदा, कभी कुत्ते वाली स्टाइल में तो aभी ६९ पोजीशन में और जो भी उलटी सीधी पोजीशन किताबों में दिखी उसमें ! क्यूंकि वो तो मुझे प्रैक्टिस करवा रही थी और मैं उनका शिष्य था।

 

© Me Mast