उस समय मैं और रेनू सिर्फ १८ वर्ष के थे। रेनू छोटे क़द की, भरे जिस्म की और बड़ी-बड़ी चूचियों वाली सुन्दर लड़की थी।

हमने अपना मकान दोमंज़िला बना लिया। हम लोग ऊपर वाले नए मंजिले में आ गए। नीचे की मंजिल किराए पर दे दिया। रेनू के पापा ने मकान किराए पर लिया। रेनू मेरे मक़ान में अपने माता-पिता, एक बड़ी बहन, और एक छोटे भाई के साथ किराए में रहती थी। रेनू के पिता टेलीफोन ऑफिसर थे। रेनू  वाणिज्य प्रथम वर्ष की छात्रा थी। रेनू की बड़ी बहन नौकरी कर रही थी। उसका छोटा भाई दसवीं कर रहा था। मैं उस समय बी. एस. सी. प्रथम वर्ष में था। रेनू और मैं एक ही मक़ान में होने के कारण हम अक्सर ही मिलते तथा कम ही बात कर पाते थे।

कुछ दिनों के बाद रेनू की बहन का रिश्ता तय हो गया। रेनू की बहन की सगाई से शादी तक लगभग तीन महीने में कई आयोजन हुए और सारे आयोजनों में मैंने और मेरे घरवालों ने रेनू के घरवालों की पूरी मदद की। इसी सब के कारण मैं और रेनू काफ़ी क़रीब आ गए। मैं और रेनू कभी-कभी किसी ना किसी बहाने से अक्सर एक-दूसरे के यहाँ आने-जाने लगे थे। रेनू की मुझ से बहुत अच्छी दोस्ती हो गई थी। मैं और रेनू एक-दूसरे को दिल से चाहने भी लगे थे। शादी के बाद रेनू की बहन अपनी ससुराल चली गई। जिस वज़ह से रेनू बहुत उदास रहने लगी। मैं अक्सर उसे खुश करने की कोशिश करता। उसका ध्यान बँटे इसलिए मैं उसे कैसेट में रोमांटिक गाने रिकॉर्ड करवा देता। रेनू को मेरी गानों की पसन्द बहुत पसन्द आती।

मैं और रेनू एक-दूसरे के काफी क़रीब आते जा रहे थे। अब मैं कभी-कभी रेनू के साथ बस में दिल्ली उसके कॉलेज जाता और उसे कॉलेज छोड़कर वापिस आ जाता। कभी-कभी मैं और रेनू कॉलेज में अनुपस्थित होकर गार्डन में सारा दिन बैठकर बातें किया करते।

कभी-कभी मैं और रेनू प्लाज़ा सिनेमा में कोई रोमांटिक फिल्म देखते। कभी-कभी जब मेरा कॉलेज जल्दी छूट जाता तो मैं दिल्ली रेनू के कॉलेज चला जाता और फिर हम दोनों कुछ देर किसी रेस्तराँ में बैठ कर कोल्ड-ड्रिंक
पीते या आईसक्रीम खाते और साथ-साथ वापस आ जाते। फिर बस-स्टॉप से हम अलग-अलग थोड़ी-थोड़ी देर में घर वापस आ जाते। बड़े मज़ेदार दिन थे वो।

फिर गर्मियों की छुट्टियों में कॉलेज बन्द हो गए। मैं और रेनू घर पर ही मिलने लगे। मैं अक्सर घर पर अकेला होता था। मम्मी-पापा तो पहले से ही स्कूल में थे। दीदी ने भी बी. एड. करने के साथ-साथ एक जगह काम भी करना शुरु कर दिया। मैं सारा दिन लगभग ४ बजे तक अकेला घर में रहता। इसलिए अक्सर रेनू ही किसी बहाने से ऊपर मेरे यहाँ आती और फिर हम दोनों एक-दूसरे से लिपट-चिपट कर एक-दूसरे को चूमते। फिर एक-दूसरे को बाँहों में भर कर चूमने से बात आगे बढ़ कर एक-दूसरे के अंगों को छूना भी शुरु हो गया। रेनू अधिकतर स्कर्ट-टॉप पहनती थी। इसलिए मैं रेनू के टॉप या टीशर्ट के ऊपर से ऊसकी चूचियों को दबाने और फिर स्कर्ट के ऊपर से उसकी चूत को दबाने और फिर स्कर्ट के नीचे से अन्दर से हाथ डाल कर उसकी पैन्टी के ऊपर से ही उसकी चूत पर हाथ फिराने तक पहुँच गया।

मैं अधिकतर टीशर्ट और लोअर पहनता था। मैं अपने लोअर की ज़िप या जिन लोअर में ज़िप नहीं होती थी उन्हें ज़रा सा नीचे सरका कर अपना लण्ड निकाल कर रेनू के हाथ में थमा देता। रेनू भी मेरे लण्ड को बेझिझक अपने हाथ में थाम लेती और हल्के-हल्के दबाती या मुट्ठी में भर कर हिलाती और आगे-पीछे करती। कुछ दिन बाद तो वो ख़ुद ही मेरे लोअर की ज़िप खोल कर मेरा लण्ड निकालनेऔर दबाने तक पहुँच गई।

ये सारी बातें लगभग १०-१५ मिनट तक चलती। हम दोनों बेहद गरम हो जाते और मेरे लण्ड और रेनू की चूत से पानी निकल आता। लेकिन फिर भी हम एक नहीं हो पाते और ना ही कोशिश भी करते, क्योंकि रेनू की मम्मी बड़ी शक्की थी और जैसे ही रेनू को ऊपर आए हुए १०-१५ मिनट हो जाते तो वो नीचे से आवाज़ लगानी शुरु कर देती या रेनू के भाई को ऊपर भेज देती। फिर भी हम दोनों ये सब लगभग एक महीना तक करते रहे। मगर चाहते हुए भी सहवास न कर सके।

एक दिन तो हम दीवार से लग कर खड़े हो गए और मैंने रेनू की स्कर्ट के नीचे से अन्दर हाथ डाल कर उसकी पैन्टी को उतार कर नीचे उसके पैरों में गिरा दिया। फिर मैंने उसकी चूत के घने बालों पर हाथ फिराने के बाद उसकी चूत के भग्नों को रगड़ना शुरु कर दिया। जब उसकी चूत से चिकना-चिकना सा निकलने लग गया तो मैंने खड़े-खड़े अपना लण्ड उसकी चूत की फाँकों के बीच में फँसा कर ऊपर-ऊपर से धक्के मारने शुरु कर दिए। मेरा लण्ड उसकी चूत के अन्दर तो नहीं जा सका, सिर्फ ऊपर से उसकी चूत के भग्नों को रगड़ता रहा। लेकिन उस
दिन हम दोनों ख़ूब झड़े।

उस दिन ये सब करके बहुत मज़ा आया और हम एकांत में मिलने का बहाना ढूँढ़ने लगे। उसके बाद वो दिन आया जब हमने जम कर सेक्स के मज़े लूटे। रेनू की दीदी और जीजाजी घर आए और वो उसकी मम्मी को लेकर मार्केट चले गए। वो लोग रेनू को भी ले जाना चाहते थे लेकिन उसने सिर दर्द का और सोने का बहाना कर दिया।

उसका भाई पिछले कई दिनों से दिल्ली अपने मौसी के यहाँ गया हुआ था। उनके जाते ही उसने मुझे फोन कर दिया। मैंने उसे ही ऊपर आने को कहा, लेकिन उसने मुझे ही नीचे आने की ज़िद की। मैं नीचे आ गया। फिर मुख्य-द्वार बन्द करके मैंने रेनू को अपनी बाँहों में भर लिया और उसके माथे को और फिर उसके गालों को चूमने लगा। रेनू ने सफेद गाउन पहना हुआ था।

रेनू बोली "बड़े बेसब्र हो रहे हो। रुको पहले मैंगोशेक पिएँगे। मैंने बना रखा है। ओह प्लीज़ छोड़ो मुझे।"

मैंने रेनू को छोड़ने की बजाय उसे और ज़ोर से पकड़ लिया और गाउन के ऊपर से ही उसकी चूचियों को दबाता हुआ बोला "रेनू मेरी जान, आज मैंगोशेक नहीं, मुझे तो इनका शेक पीना है।"

रेनू बोली "बड़े बेसब्रे हो। अच्छा चलो बेडरूम में चलते हैं।"

मैंने रेनू को छोड़ दिया। रेनू भागकर बेडरूम में घुस गई और दरवाज़े के पीछे छिपने का नाटक करने लगी। मैं अन्दर आ गया और फ़िर मैंने बेडरूम का भी दरवाज़ा बन्द कर दिया।

अब मैंने रेनू को अपनी बाँहों में भर लिया। मैंने अपने जलते हुए होंठ रेनू के होंठों पर रख दिए। फिर मैं उसके नरम-नरम होंठों को अपने होंठों में भर कर चूसने लगा। रेनू ने भी मुझे अपनी बाँहों में कस लिया।

मैं बोला "ओह रेनू, कितने दिनों के बाद आज मौक़ा मिला है, तुम्हें अपनी बाँहों में भरने का। आई लव यू, आई लव यू सो मच।"

रेनू बोली "हाँ राज, सच कितने दिन हो गए, तुम्हारी बाँहों में आए हुए। मैं भी तुमसे बहुत प्यार करती हूँ।"

फिर मैं रेनू का हाथ पकड़ कर उसे बिस्तर के पास लाया और उसे धकेल कर बिस्तर पर गिरा दिया। फिर उसके ऊपर लेट कर उसके गालों को चूमने लगा। फिर मैं उसके बगल में लेटकर उसके गाउन के ऊपर से उसकी चूचियों को दबाने लगा। उसकी फूली हुई चूत उसके गाउन के ऊपर से भी महसूस हो रही थी। फिर मैं उसके गाउन के ऊपर से पावरोटी की तरह उभरी और फूली हुई उसकी चूत को दबाने लगा। फिर मैं बिना देर किए उसके गाउन को उतारने लगा।

रेनू बोली, "ये क्या कर रहे हो? प्लीज़ इसे मत उतारो। प्लीज़ छोड़ो मुझे। मुझे डर लगता है।"

मैंने रेनू से कहा "रेनू, मेरे होते हुए डरने की क्या बात है! मैं तुमसे बहुत प्यार करता हूँ। देखो रेनू, मैं तुमसे सच्चा प्यार करता हूँ। तुम्हें दिल से चाहता हूँ। तुम्हें अपना बनाना चाहता हूँ। आज मुझे तु्म्हें जी भरकर प्यार करने दो। अगर कोई आ गया तो मेरा मूड बहुत ख़राब हो जाएगा। इसलिए पहले हम एक दूसरे को जी भरकर प्यार करेंगे। फिर आगे कोई बातें करेंगे और तुम्हारा बनाया मैंगोशेक पीएँगे।"

यह कह मैंने कुछ हद तक ज़बर्दस्ती ही उसका गाउन उतार कर फेंक दिया। रेनू ने गाउन के नीचे लाल रंग की पारभासी ब्रा और पैन्टी का सेट पहना हुआ था। इस सेट में वो बहुत ही सेक्सी लग रही थी।

पारभासी ब्रा में से उसकी गोरी-गोरी चूचियाँ आधे से अधिक नज़र आ रहीं थीं और लाल पारभासी पैन्टी में से उसकी चूत के बाल तक नज़र आ रहे थे। रेनू को इस तरह से देख कर मैं पागल हो गया और मैंने उठ कर अपने सारे कपड़े उतार कर फेंक दिए और फिर मैं मुख्य बत्ती बन्द करके सिर्फ चड्डी में रेनू से लिपट गया। कमरे में खिड़की के परदों से हल्की रोशनी आ रही थी।

मैंने रेनू को अपनी बाँहों में भर लिया। मैंने अपनी टाँगें रेनू की टाँगों पर रख दीं और अपने जलते हुए होंठो उसके होंठों पर रख दिए। मैं उसके नरम-नरम होंठों को अपने होंठों में भरकर चूसने लगा। रेनू ने मुझे अपनी बाँहों में कस लिया। मेरे हाथ रेनू के भरे-पूर जिस्म पर फिर रहे थे। कुछ देर बाद मैंने रेनू को बिस्तर पर सीधा लिटा दिया। फिर उसके चिकने पेट पर अपने जलते हुए होंठ रख दिए। फिर मैं उसके नरम-नरम गोरे-गोरे पेट को अपने होंठों में भर कर चूसने लगा। रेनू के मुँह से आह निकलने लगी। फिर मैं उसकी ब्रा के ऊपर से उसकी चूचियाँ दबाने लगा। कुछ देर बाद मैं उसकी ब्रा के अन्दर से हाथ डालकर उसकी सख्त हो चुकी चुचियों को दबाने लगा।

फिर मैंने उसे अपनी ओर करवट दिला कर अपनी बाँहों में कस लिया और उसकी चिकनी पीठ पर हाथ फिराने लगा। उसकी पीठ पर हाथ फिराते-फिराते मैंने उसकी ब्रा के हुक खोल दिए और फिर आराम से उसकी चिकनी पीठ पर हाथ फिराने लगा। पीठ पर हाथ फिराते-फिराते मैंने अपना हाथ उसकी चड्डी में घुसा दिया और उसके बड़े-बड़े चूतड़ों पर हाथ फेरने लगा। रेनू मेरे से लिपटी हुई थी। उसने मुझे कस कर अपनी बाँहों में भरा हुआ था।

कुछ देर बाद मैंने उसे अपने से अलग करके बिस्तर पर सीधा लिटा दिया औऱ फिर मैंने उसकी ब्रा भी खींच कर उसके तन से जुदा कर दी। रेनू ने कोई विरोध तो नहीं किया पर अपनी चूचियाँ अपने हाथों से ढँक ली। मैं ज़ोर लगा उसके हाथों को उसकी चूचियों से हटा कर उसकी गोरी-गोरी और बड़ी-बड़ी सख्त चूचियों को दबाने लगा। साथ-साथ उसकी भूरी घुण्डियों को भी हल्के-हल्के मसलने लगा। फिर मैं उसकी नरम-नरम गोरी-गोरी चूचियों को अपने होंठों में भर कर चूसने लगा। रेनू के मुँह से सिसकियाँ निकलने लगीं। फिर मैं उसकी चूचियों को चूसता हुआ उसके पेट पर हाथ फिराते हुए उसकी पैन्टी के ऊपर से पाव रोटी की तरह उभरी हुई उसकी चूत को सहलाने और दबाने लगा। रेनू ने अपनी आँखें बन्द कर रखीं थीं।

फिर मैं उसकी पैन्टी के अन्दर से हाथ डाल कर उसकी चूत के घने बालों पर हाथ फिराने लगा। कुछ देर उसकी बड़ी-बड़ी झाँटों के भँवर में अपना हाथ फिराने के बाद मैं उसकी पैन्टी को उतारने लगा।

रेनू ने एकदम से मेरा हाथ पकड़ लिया और बोली "क्या करते हो! प्लीज़ इसे मत उतारो। मुझे डर लगता है।"

मैंने कहा "रेनू मेरी जान, डरने वाली क्या बात है। ये तो प्यार है। आज सारे कपड़े उतार कर लिपट-चिपट कर ख़ूब प्यार करेंगे।" यह कह कर मैं फिर उसकी पैन्टी को उतारने लगा।

रेनू ने कस कर मेरा हाथ पकड़ लिया और बोली "प्लीज़ इसे मत उतारो। क्या कर रहे हो? मुझे बहुत शरम आ रही है।"

मैंने कहा "अपनी आँखें बन्द कर लो। नहीं आएगी।"

रेनू ने सचमुच अपनी आँखों पर अपना हाथ रख लिया और मैंने उसकी पैन्टी उतार कर अलग कर दी। रेनू का कुँवारा नंगा बदन कमरे की हल्की-हल्की रोशनी में चमकने लगा। मैं उसे निहारने लगा। उसके हाथ उसकी आँखों पर थे। उसके फूले हुए गुलाबी होंठ, तनी हुई बड़ी-बड़ी चूचियाँ, सपाट चिकना पेट, पेट के बीच गहरी नाभी, टाँगों के बीच में पावरोटी की तरह फूली हुई उसकी चूत, चूत के ऊपर काले घने घुँघराले बाल, केले के पत्ते की तरह चिकनी-चिकनी उसकी टाँगें। मैं एकटक उसे देखता ही रह गया।

कुछ देर बाद उसने अपनी आँखों पर से अपना हाथ हटा लिया और पूछा "क्या देख रहे हो?"

मैंने कहा "ओह रेनू, तुम कितनी सुन्दर हो। तुम्हारी ख़ूबसूरती को अपनी आँखों में क़ैद कर रहा ।" यह सुनकर रेनू शरमा गई और पलट कर पेट के बल लेट गई और अपना चेहरा बिस्तर में छुपा लिया। उसके ऐसा करने से उसके बड़े-बड़े चूतड़ उभर कर आ गए। उसे इस तरह से देखकर मेरे मुँह में पानी भर आया।

मेरा लण्ड तन कर खड़ा हो गया था और चड्डी फाड़ कर आने को हो रहा था। मैंने चड्डी उतार कर फेंक दी। फिर मैं रेनू के ऊपर आकर लेट गया। मेरा लण्ड तन कर रेनू के दोनों चूतड़ों के बीच टाँगों में घुस गया। मैं रेनू के ऊपर आकर लेट कर उसकसे कन्धों को और गर्दन को चूमने लगा। फिर धीरे-धीरे अपनी कमर उठा कर अपना लण्ड रेनू के चूतड़ों से रगड़ने लगा।

थोड़ी देर बाद मैं उसके ऊपर से हट कर बगल में लेट गया और मैंने उसे धीरे से बिस्तर पर सीधा लिटा दिया और एक हाथ उसकी चूचियों पर रख उसे दबाने लगा। वो गरम होने लगी थी. मैं दोनों हाथों से उसकी दोनों चूचियों को
दबाने लगा। फिर मैंने रेनू को अपने साथ-साथ सटा कर लिटा लिया। मेरा लण्ड उसकी झाँटों से टकरा रहा था। मैं रेनू की चिकनी टाँगों पर हाथ फिराने लगा। वो सिसकारियाँ लेने लगी और मुझसे ज़ोर से लिपट गई। मैं भी उससे लिपट गया।

फिर मैंने उसको ख़ुद से अलग करके बिस्तर पर लिटा दिया और उसके ऊपर आ गया और चूमना शुरु कर दिया। कुछ मिनटों तक मैं उसे चूमता रहा। मेरा हाथ रेनू के जिस्म पर फिर रहे थे। फिर मैं थोड़ा नीचे सरका। मेरे नीचे सरकते ही उसकी दूध सी चूचियाँ उछल कर मेरे नीचे से बाहर आ गए। मैं उन गोरी-गोरी सख्त चूचियों को दबाने लगा। उसकी घुण्डियों को मुँह में भर लिया और चूसने लगा। फिर मैं उसकी चूचियों को दबाते हुए साथ-साथ उसकी गुलाबी घुण्डियों को अपने होंठों में भर कर चूसने लगा।

रेनू के मुँह से सिसकारियाँ निकलने लगीं। वो हल्के हल्के आह राज…ओओओहहहहह… आआआहहहह… सिस्स्स्सस्सस्स्स..… आह्ह्ह्ह……आआआह्हह्हह्हह्हहा…… आआआह्हह्हह्हहाह्हह्हह….… कर रही थी। मैं उसकी
चूचियों को काफ़ी देर तक ऐसे ही चूसता रहा।

फिर मैं उसकी पावरोटी की तरह उभरी हुई उसकी चूत को दबाने लगा। रेनू ने अपनी आँखें बन्द कर रखीं थीं। मैं उसके चूत के बालों पर हाथ फिराने लगा। कुछ देर बाद मैंने उसकी चूत के बालों को अपने मुँह में भर लिया। वो
सिसकारी भर रही थी।

उसके मुँह से "आआआह्ह्ह्ह्ह ओअहाआआह्ह्ह अस्सस्सशहस आआआअह्हह्हह्हह्हस्सस्स स्सशाआ आआहस्सह्हस्सस अह्हह्हह्हह्हह ह्हहह्हहहस्साआ आअह्ह ह्हहा ह्हह्हाआ ह्हह्हाहह" निकल रहा था।

फिर मैंने रेनू का हाथ पकड़ कर अपने खड़े हुए लण्ड पर रख दिया। रेनू ने बिना झिझक मेरे लण्ड को अपने हाथ में थाम लिया और उसे हल्के-हल्के दबाने लगी। फिर वो मेरे लण्ड को मुट्ठी में भरकर हिलाने और आगे-पीछे करने लगी। वो मेरे लण्ड को हाथ में लेकर खींच रही थी और कस कर दबा रही थी। फिर वो मेरी तरफ करवट लेकर लेट गई ताकि मेरे लण्ड को ठीक तरह से पकड़ सके। वो मुझसे पूरी तरह से सटे हुए मेरे लण्ड को बुरी तरह से मसल रही थी और मरोड़ रही थी।

मैं रेनू की चिकनी टाँगों पर हाथ फिराने लगा। फिर मैं रेनू की चूत के बालों में हाथ फिराने लगा। फिर हाथ फिराता-फिराते मैंने अपनी ऊँगलियाँ रेनू की चूत के अन्दर डाल दीं। फिर मैं ऊँगलियों से रेनू की चूत के दोनों
फाँकों को खोलने और बन्द करने लगा। रेनू ने मेरा लण्ड छोड़ कर अपनी आँखें बन्द कर लीं। फिर मैं अपनी एक ऊँगली से रेनू की चूत के भग्नों को रगड़ने लगा। रेनू के मुँह से सिसकारियाँ निकलने लगीं। मेरे सब्र का बाँध टूट रहा था। अब मैं रेनू की चूत मारने को बेताब हो रहा था।

मैं रनू के ऊपर आकर लेट गया। रेनू का नंगा जिस्म मेरे नंगे जिस्म के नीचे दब गया। फिर मैंने रेनू की टाँगें खोलकर अलग कर दी। रेनू की टाँगें खोलने से उसकी चूत की पंखुड़ियाँ खुल गईं और उनके बीच से उसकी गुलाबी चूत दिखने लगी। फिर मैंने अपने आप को रेनू की टाँगों के बीच में सेट किया और अपने लण्ड को मुट्ठी में भर कर रेनू की गुलाबी चूत के गुलाबी भग्न को ऊपर-नीचे करके रगड़ने लगा। रेनू के मुँह से सिसकियाँ निकलने लगीं।

कुछ देर बाद रेनू की चूत से कुछ चिकना-चिकना सा निकलने लगा था। रेनू ने मस्त होकर अपनी आँखें बन्द कर लीं थीं और हाथों से बेडशीट को पकड़ रखा था। मैं चुपचाप उसके चेहरे को देखते हुए अपने लण्ड को मुट्ठी में भर उसकी चूत के भग्न को ऊपर-नीचे रगड़ता रहा। रेनू की चूत में से कुछ चिकना सा निकलने की वज़ह से मेरा लण्ड आसानी से उसकी चूत के भग्नों के ऊपर-नीचे फिसल रहा था।

कुछ देर बाद मैंने यह सोचकर कि कहीं रेनू ऐसे ही ना झड़ जाए, अपने हाथ से लण्ड को पकड़ॉ कर उसकी चूत के ठीक निशाने पर लगा दिया और एक हल्का सा धक्का दिया। पहले ही धक्के में मेरे लण्ड का सुपाड़ा रेनू की चूत के
अन्दर चला गया। रेनू के मुँह से आह निकली और उसने हाथों से बेडशीट को कस कर पकड़ लिया और अपना मुँह दूसरी ओर घुमा कर फिर से अपनी आँखें भी कसकर बन्द कर लीं। मैंने थोड़ा और ज़ोर लगाया। मेरा लगभग आधा लण्ड रेनू की चूत में समा गया। रेनू के मुँह से सिसकारियाँ निकलने लगीं।

इससे पहले कि रेनू सम्भले या करवट बदले, मैंने तीसरा और आख़िरी धक्का लगाया और मेरा पूरा का पूरा लण्ड रेनू की मक्खन जैसी चूत की जन्नत में दाखिल हो गया। रेनू के मुँह से एक ज़ोर की आह सी निकली और उसने बेडशीट को छोड़कर मुझे अपनी बाँहों में पूरी ताक़त से कस लिया। हम दोनों एक-दूसरे में पूरी तरह से समा गए।

कुछ देर तक मैं ऐसे ही रेनू के अन्दर समाए हुए उसके ऊपर लेटा रहा। फिर मैंने भी रेनू को अपनी बांहों में भर लिया। फिर मैंने अपने जलते हुए होंठ रेनू के होंठों पर रख दिए और मैं उसके नरम-नरम होंठों को अपने होंठो में
भर कर चूसने लगा ताकि वह अपना दर्द भूल जाए और सामान्य हो जाए। रेनू को वाक़ई इससे कुछ राहत मिली और उसने भी मेरे होंठों को अपने होंठों से चूमना शुरु कर दिया और अपनी कमर भी हल्के-हल्के हिलानी शुरु कर दी।

मेरा पूरा लण्ड उसकी चिकनी चूत के अन्दर तक समाया हुआ था। हम दोनों ने एक-दूसरे को इस क़दर अपनी बाँहों में जकड़ा हुआ था कि हवा भी हम दोनों के बीच से ना निकल सके। रेनू का नंगा जिस्म मेरे नंगे जिस्म के नीचे दबा हुआ था। मेरी टाँगें रेनू की टाँगों के बीच फँसी हुई थीं। मैं रेनू के होंठों को चूसना छोड़ कर उसके माथे पर, फिर आँखों पर तथा फिर उसके गोरे और नरम-नरम गालों को चूमने लगा। रेनू भी मेरे गालों को अपने नरम-नरम होंठों से चूमने लगी। कुछ देर हम दोनों इसी तरह से एक-दूसरे को चूमते रहे।

फिर मैंने रेनू से पूछा "ठीक लग रहा है? कोई दिक्क़त तो नहीं हो रही है?"

रेनू बोली "नहीं, ठीक लग रहा है। कोई दिक्क़त नहीं है। आई लव यू राज।"

मैंने कहा "मैं भी तुमसे बहुत प्यार करता हूँ रेनू। तुम मेरी जान हो। तो फिर करें क्या?"

रेनू ने कहा "हाँ राज, मगर थोड़ा धीरे-धीरे करो।"

यह सुनकर मैंने अपने लण्ड को धीरे से रेनू की चूत से थोड़ा सा बाहर निकाला और फिर धीरे से वापस अन्दर घुसा दिया। रेनू ने कोई ऐतराज़ नहीं किया। इसलिए मैं अब धीरे-धीरे अपने लण्ड को रेनू की चूत में अन्दर-बाहर
करने लगा।

कुछ देर तो मैं ऐसे ही रेनू को धीरे-धीरे चोदता रहा। बाद में मैंने उसकी टाँगें ऊपर की तरफ मोड़ लीं और अपनी कमर के दोनों ओर लपेट लीं। मैंने फिर से अपने लण्ड को धीरे-धीरे रेनू की चूत के अन्दर-बाहर करना शुरु कर दिया। रेनू की टाँगें ऊपर की तरफ मोड़ने की वजह से अब मेरा लण्ड रेनू की चूत की गहराई तक आ जा रहा था। मैं आराम से अपना पूरा लण्ड रेनू की चूत से बाहर खींचता और फिर धीरे-धीरे अपना पूरा का पूरा लण्ड उसकी चूत में घुसा देता। इस तरह कुछ देर तो मैं ऐसे ही उसे धीरे-धीरे चोदता रहा। फिर रेनू ने मुझसे अपनी रफ्तार बढ़ाने को कहा। मैंने रफ्तार बढ़ा दी और तेज़ी से उसकी चूत में लण्ड पेलने लगा।

अब रेनू को भी पूरी मस्ती आ रही थी और वो भी नीचे से कमर उठा-उठा कर मेरे हर झटके का जवाब देने लगी। रेनू की चूत में मेरा लण्ड समाए हुए तेज़ी से अन्दर-बाहर हो रहा था। मुझे लग रहा था कि जैसे मैं जन्नत में पहुँच गया हूँ। कमरे में हमारी चुदाई की फच्च-फच्च की आवाज़ें गूँज रहीं थीं। रेनू ने अपनी टाँगों को मेरी कमर के ऊपर रख कर मुझे अपनी बाँहों में जकड़ लिया और ज़ोर-ज़ोर से अपने चूतड़ उठा-उठा कर चुदाई में मेरा साथ देने लगी। मैं भी अब रेनू की चूचियों को मसलते हुए ठका-ठक शॉट पर शॉट लगा रहा था। कमरा हमारी चुदाई की आवाज़ से गूँज रहा था। मैं रेनू के ऊपर लेट कर दनादन शॉट लगाने लगा।

रेनू अपनी कमर हिला-हिला कर, चूतड़ उठा-उठा कर चुदवा रही थी और बोले जा रही थी "अह्हह आअह्हह्हह उनह्हह्ह ऊओह्हह्ह ऊऊह्हह्हह हाआआन हाआऐ मेरे राररराज्जज्जजा, आआआह्ह्ह्ह्ह तेज़-तेज़। आआयीई रीईई तेज़-तेज़ करो,और-ज़ोर से करो मुझे। मेरे राज्जज्जा" और वो अपने चूतड़ों को हिलाने लगी।

मैंने लगातार थोड़ा-थोड़ा रुक-रुक कर लगभग ३० मिनट तक उसे चोदा। जब मुझे लगा कि मैं अब डिस्चार्ज होने वाला हूँ। तो मैं रुक कर रेनू के ऊपर लेट कर उसे अपनी बाँहों में भर लेता। पिर मैं अपने होंठ रेनू के होंठों पर
रखकर चूसने लगा। ताकि वह भी सामान्य हो जाए और जल्दी से डिस्चार्ज ना हो। रेनू को भी वाक़ई इससे राहत मिलती और वो भी मेरे होंठों को अपने होंठों से चूसना शुरु कर देती। मेरा पूरा लण्ड रेनू की चिकनी चूत के अन्दर तक समाया रहता। हम दोनों एक-दूसरे को अपनी बाँहों में जकड़ लेते। दोनों के नंगे जिस्म आपस में चिपक जाते।

रेनू अपनी टाँगों को बिस्तर पर फैला लेती क्योंकि शायद अधिक देर तकत अपनी टाँगों को ऊपर उठ कर रखने के कारण वह थक जाती थी। कुछ देर बाद मैं रेनू के होंठों को चूसना छोड़ कर उसके माथे पर, फिर आँखों पर तथा फिर उसके गालों पर चूमने लगता। रेनू भी मेरे गालों को नरम-नरम होंठों से चूमने लगती। फिर जब रेनू अपनी कमर को हिला कर मुझे फिर से उसे चोदने का इशारा करती तो मैं फिर से उसकी टाँगों को अपने कंधे पर रख कर उसे चोदना शुरु कर देता।

अब रेनू पूरे जोश के साथ अपनी गाँड को उछाल-उछाल कर मेरा लण्ड अपनी चूत में ले रही थी। मैं भी पूरे जोश के साथ उसकी चूचियों को मसल-मसल कर उसे चोदे जा रहा था। अब मेरा लण्ड रेनू की चूत में तेज़ी से अन्दर-बाहर हो रहा था।

मैं रेनू की चूत में अपने लण्ड के तेज़-तेज़ धक्के मार रहा था। हम दोनों ही सेक्स के नशे में चूर हो रहे थे। रेनू को भी भरपूर मज़ा आने लगा था। वो मेरे हर धक्के का स्वागत कर रही थी। उसने मेरे चूतड़ों को अपने हाथों
में थाम लिया। अब वह नीचे से मेरे धक्कों के साथ-साथ अपने चूतड़ों को ऊपर-नीचे कर रही थी। जब मैं लण्ड उसकी चूत में से बाहर खींचता तो वो अपनी चूतड़ों को ऊपर उठा देती। जब मैं लण्ड उसकी चूत के अन्दर घुसाता तो वह अपनी चूतड़ों को पीछे खींच लेती। मैं तेज़ी से धक्के मार कर उसे चोदने लगा। मैं बिस्तर पर हाथ रख कर रेनू के ऊपर झुक कर तेज़ी से उसकी चूत मारने लगा। अब मेरा लण्ड उसकी चिकनी चूत में तेज़ी से आ-जा रहा था। रेनू भी अब आँखें खोल कर चुदाई का भरपूर आनन्द ले रही थी। मैं उसे पागलों की तरह से चोद रहा था। अब मैं अपनी पूरी रफ्तार पर था और कूद-कूद कर उसे चोदे जा रहा था। रेनू इस चुदाई के नशे से मदहोश हो रही थी।

मैंने रुक कर रेनू से पूछा "रेनू, अच्छा लग रहा है क्या?"

रेनू बोली, "हाँ बहुत ही अच्छा लग रहा है। पर प्लीज़ रुको मत। तेज़-तेज़ करते रहो।"

रेनू के मुँह से यह सुनकर मैंने अपनी गति और बढ़ा दी। मैंने उसके चूतड़ों को हाथों से जकड़ लिया और छोटे-छोटे मगर तेज़ शॉट मार कर उसे चोदने लगा।

रेनू के मुँह से मस्ती में "ओह्ह्ह्ह्ह्होहोहोह सिस्स्स्स्स्स्सह्ह्ह्ह्ह्ह्ह हाहाह्ह्हआआआ हा-हा करो-करो ऽअआह हाहअआ प्लीज़ राज, तेज़-तेज़ करो ना।"

मैं रेनू के ऊपर लेट गया और मैंने रेनू को अपनी बाँहों में भर लिया। फिर मैंने अपने होंठ उसके होंठों पर रख दिए और उसके नरम-नरम होंठों को अपने होंठों में भर कर चूसते हुए उसे और तेज़ी से चोदने लगा। रेनू ने भी अपने
हाथों से मेरी कमर को जकड़ लिया और अपनी टाँगें ऊपर की तरफ करके मोड़ लीं और मेरी कमर के दोनों तरफ लपेट भी लीं। अब मैं रेनू के होंठ अपने होंठों से चूसते हुए उसे और भी तेज़ी से चोदने लगा। मेरा लण्ड सटासट रेनू की चूत में तेज़ी से अन्दर-बाहर हो रहा था। मैं रेनू की चूत में अपने लण्ड के तेज़-तेज़ धक्के मार रहा था। रेनू भी अपने होंठों से मेरे होंठों को चूसती हुई मज़े से चुदाई का मज़ा ले रही थी। मैं रेनू को काफ़ी देर तक ऐसे ही चूमते हुए कस कर चोदता रहा।

लगभग ५ मिनट तक हम एक-दूसरे के होंठों को चूसते हुए चुदाई का मज़ा लेते रहे। फिर उसने अपने होंठ मेरे होंठों से अलग करके एक ज़ोर की आह भरी और बोली "अह्ह राज! उह्ह बस ऐसे ही तेज़-तेज़ करते रहो। ओह राज, प्लीज़ तेज़ करों। मैंने होने वाली हूँ। करो-करो। और तेज़-तेज़ करो। ज़ोर-ज़ोर से, और ज़ोर से आईएएएए मेरे राज्जजा। रुको मत, रुको मत। आहहहह…. मैं हो गई हाहह्हह्हहहहह।"

फिर अचानक रेनू ने मुझे कस कर अपनी बाँहों में भर लिया। मैं समझ गया कि वह झड़ चुकी है। मैंने रुक कर उससे पूछा "मेरी जान, तुम हो गई क्या?"

रेनू ने कहा "हाँ राज, मैं तो हो गई। तुम नहीं हुए क्या?"

मैंने कहा "मेरी जान मैं भी होने वाला हूँ। मैं तो बस तुम्हारे होने की प्रतीक्षा कर रहा था। लो बस दो मिनटों में हो जाऊँगा।

रेनू बोली "प्लीज़ तुम भी जल्दी से हो जाओ और प्लीज़ जब होने लगो तो इसे बाहर निकाल लेना और बाहर ही होना। प्लीज़ मेरे अन्दर मत होना। मुझे डर लगता है।"

मैंने कहा "ठीक है मेरी जान। तुम चिन्ता मत करो। मैं बाहर ही होऊँगा।" और यह कह मैंने फिर से उसकी चूत में अपने लण्ड के ज़ोरदार प्रहार शुरु कर दिए।

मैं भी छूटने वाला ही था, इसलिए मैं लगातार ज़ोरदार प्रहार करके उसकी चूत मारने लगा था। अब मेरा लण्ड उसकी चूत में तेज़ी से आ-जा रहा था। वह निढाल हो चुकी थी और अपनी आँखें बन्द करके मेरे झड़ने की प्रतीक्षा कर रही थी। लगभग २ मिनट तक उसे काफ़ी तेज़-तेज़ चोदने के बाद जब मैं छूटने लगा तो मैंने अपना लण्ड उसकी चूत में से बाहर खींच लिया और उसकी चूत के बाहर झड़ गया।

मेरा गाढ़ा-गाढ़ा रस मेरे लण्ड से ज़ोरों से छूट कर रेनू की झाँटों और पेट पर गिर गया। फिर मैं हाँफते हुए उसकी बगल में उससे चिपक कर लेट गया। रेनू चुपचाप आँखें बन्द करके लेटी हुई थी। कमरे की हल्की रोशनी में उसका
गोरा बदन, झाँट और उस पर गिरा मेरा रस चमक रहे थे। कुछ देर तक मैं उसके साथ लेटा रहा और अपनी तेज़ चल रही साँसों को क़ाबू में इन्तज़ार करता रहा। रेनू भी चुपचाप मेरे साथ आँखें बन्द करके लेटी हुई थी। मेरा वीर्य
रेनू के शरीर पर चिपक गया था।

कुछ देर बाद मैंने उठकर अपने अण्डरवियर से रेनू की झाँटों और उसके पेट पर गिरे मेरे वीर्य, व साथ ही अपने लण्ड को साफ किया और उसकी बगल में उससे चिपक कर लेट गया। हम दोनों कुछ देर ऐसे ही चुपचाप लेटे-लेटे अपनी-अपनी साँसों पर नियंत्रण में आने की प्रतीक्षा करते रहे।

कुछ देर बाद मैंने रेनू को अपनी बाँहों में भर लिया और कहा "मैं तुम्हें बहुत प्यार करता हूँ रेनू। तुमने मेरी ज़िन्दगी में खुशियाँ ही खुशियाँ भर दीं हैं। तुम बहुत ही लाजवाब हो। मैं चाहता हूँ कि हम दोनों हमेशा के लिए एक-दूसरे के लिए होकर रह जाएँ। मुझे इस प्रेम-क्रीड़ा का अत्यंत आनन्द आया और तुम्हें भी आया ही होगा। जब भी हमे मौक़ा मिलेगा तो क्या तुम मेरे साथ यह पुनः करना पसन्द करोगी?"

रेनू बोली "ओह राज हाँ। मुझे तो बहुत ही मज़ा आया और जब भी मौक़ा मिलेगा तो हम फिर करेंगे। लेकिन राज अब तुम जाओ। सब लोग आने वाले होंगे। अब तुम कृपा करके जाओ।"

मैंने कहा "ठीक है मैं जा रहा हूँ।"

यह कह कर मैं रेनू के माथे पर, फिर आँखों पर, तथा फिर गालों पर चूमने लगा। फिर मैं उसके नरम-नरम होंठों को अपने होंठों में भर कर चूसने लगा। कुछ देर तक मैं इसी तरह से उसको चूमता-चूसता रहा और उसके बालों पर हाथ फिरा कर उसे सहलाता रहा। फिर कुछ देर बाद रेनू ने भी अपनी बाँहें मेरी गर्दन में डाल दीं। मैंने भी रेनू को अपनी बाँहों में कस लिया। कुछ देर तक हम दोनों एक-दूसरे को इसी क़दर अपनी बाँहों में भरे रहे।

फिर रेनू बोली "प्लीज़ राज, अब तुम जाओ। सब लोग आने वाले होंगे। प्लीज़ उठो।"

अब मैंने कोई नख़रा नहीं किया और रेनू के यह कहते ही मैंने उठकर अपने कपड़े पहन लिए। रेनू ने भी उठकर अपने कपड़े पहन लिए। मैंने कपड़े पहन कर अपनी बाँहें उसकी ओर फैला दीं। रेनू भाग कर मेरी बाँहों में समा गई। मैं कुछ देर उसे अपनी बाँहों में भरे हुए उसके बालों पर हाथ पिरा कर उसके सहलाता रहा। रेनू कुछ देर तक मेरे सीने से चिपकी रही।

फिर कुछ देर बाद रेनू बोली "प्लीज़ राज, अब तुम जाओ। सब लोग आने वाले होंगे।" मैंने कहा, "ठीक है, बाय रेनू। मैं जा रहा हूँ।" कह कर मैं ऊपर अपने यहाँ चला आया।

रेनू और उसके घरवाले हमारे यहाँ लगभग डेढ़ साल किराए पर रहे। लेकिन रेनू के साथ इस सम्भोगानुभव के लगभग छः माह उपरांत ही वे चले गए। इन छः माहों में मैंने और रेनू लगभग १४ बार सम्भोग किया। फिर रेनू के पिता का स्थानांतरण हो गया और वे सपरिवार चले गए। हमारी बातें अक्सर फोन पर होती रहती। फोन पर ही हम अपने पुराने अनुभवों के बारे में बातें करते। फोन पर ही कार्यक्रम बन जाता और फिर कभी-कभी मैं और रेनू कॉलेज से भाग कर गार्डन में सारा दिन बैठकर बातें किया करते और एक-दूसरे के अंगों को छूकर, दबा कर स्पर्श सुख लिया करते।


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