बात उस समय की है जब मैं १८ साल का था। मेरे पड़ोस में एक आंटी किरण अपनी बेटी नेहा और ससुर के साथ रहती थी। उनके पति का स्वर्गवास हो चुका था और सास भी नहीं थी। एक बेटा था जो विदेश में रहता था। परिवार धनी था। मेरा और उनका मकान सटा हुआ है और मेरे घर की छत से उनके आंगन में देखा जा सकता था।

एक दिन शाम के समय मैं छत पर घूम रहा था कि अचानक मेरी नजर उनके आंगन में पड़ी। मैंने देखा कि नेहा नाली के पास बैठकर पेशाब कर रही थी। उसकी चिकनी गाण्ड देखकर मेरा लण्ड खड़ा हो गया।

उसने लाल रंग की पैन्टी पहन रखी थी। उसके चूतड़ काफी बड़े थे। मैंने इससे पहले कभी इस तरफ ध्यान नहीं दिया था। वह उठी पैन्टी उपर चढ़ाई और अंदर चली गई। मैंने उस रात सपने में उसे चोदा और मेरा झड़ गया। सुबह मैं जल्दी उठा क्योंकि मुझे उठना पड़ा। नहाकर मैं कपड़े फैलाने छत पर गया तो मैं उसके आंगन में झांका, कोई नहीं था। मैं छत पर टहलने लगा। इस दौरान मैंने उसके आंगन में कई बार झांका। जब मैं वापस जाने लगा तो सोचा एक बार और देख लूँ शायद उसकी गाण्ड दिख जाए।

ज्योंही मैं वहाँ पहुँचा, मैंने इस बार आंटी को पेशाब करते पाया। वह बड़े इत्मिनान से अपनी मैक्सी उठाकर मूत रही थी। उसने काली पैन्टी पहन रखी थी। जब वह उठी तो उसने अपनी पैन्टी में से एक कपड़े का टुकड़ा निकाला और उसे पास रखे कूड़ेदान में डाल दिया। उनका मासिक चल रहा था। वह ज्योंही पीछे मुड़ी मैं तेजी से पीछे हटा पर शायद उसने मुझे देख लिया। मैं डर गया कि अब तो वह मेरी शिकायत मेरे घरवालों से जरुर करेगी। खैर कुछ दिनो तक मैं छत पर नहीं गया।

फिर एक दिन हिम्मत करके मैं छत पर गया। मैंने किरण आंटी को नेहा के साथ टहलते छत पर पाया। किरण आंटी ने मेरी ओर घूर कर देखा फिर दोनो रेलिंग से सट कर मेरी ओर पीठ कर खड़ी हो गई। नेहा जीन्स तथा किरण आंटी मैक्सी पहने हुई थी। वे रेलिंग पर झुककर बातें करने लगी। इस दौरान मैं उनकी गाण्ड निहारता रहा।

मेरे घर पर कुछ कन्सट्रक्शन का काम चल रहा था। दूसरी मंजिल की छत बन रही थी। चूंकि हमारा हैण्डपंप काफी पुराना था इसलिए हमें किरण आंटी से पानी के लिए कहना पड़ा। खैर वह खुशी से तैयार हो गई। मैंने एक वाटर पंप उनके छत पर टंकी में लगा दिया। मुझे वहाँ करीब एक घण्टा रुकना पड़ता था। चूँकि जून का महीना था इसलिए गर्मी काफ़ी अधिक थी। खैर इस दौरान मैं सीढ़ियों पर बैठा रहता। कभी कभार वह मुझे चाय पानी पूछ लेती।

एक दिन मैं सीढ़ियो पर बैठा था कि आंटी मेरे पास आई और बोली- मैं नहाने जा रही हूँ कोई आये तो देख लेना।

मैंने कहा- ठीक है।

कुछ देर बाद उनका दूध वाला आ गया। मैंने कहा वो नहा रही हैं तुम इंतजार करो।

उसने कहा- आप ही ले लो ! किचन में कोई बर्तन पड़ा होगा।

मैंने सोचा- आंटी से एक बार पूछ लूँ।

मैं बाथरुम की ओर बढ़ा। ज्योंही दरवाजे पर पहुँचा तो देखा दरवाजा पूरी तरह बंद नहीं है। अंदर देखा तो आंटी फर्श पर बैठकर कपड़े साफ कर रही थी, वह पूरी तरह नंगी थी। उनकी गाण्ड मुझे दिखाई दे रही थी। जब वह कपड़ों पर ब्रश लगाने के लिए आगे झुकती तो उनकी गाण्ड ऊपर उठ जाती और छेद दिखाई दे जाता। मेरा लण्ड खड़ा हो गया। मैं पूरी तरह उत्तेजित था। मन कर था कि अंदर घुस जाऊँ और उनकी गाण्ड़ मारने लगूँ।

खैर मैं किचन में गया और एक बर्तन लाकर दूध ले लिया। तभी मेरे घर से पानी के लिए बुलावा आ गया। मैं पानी चलाकर लौटा तो आंटी नहाकर कपड़े फैलाने आ रही थी। मैं सीढ़ियों पर बैठ गया और जब वह सीढ़ियाँ उतरने लगी तो मैं उनकी गाण्ड निहारने लगा। कुछ देर बाद वह तमतमाते हुए आई और मुझसे पूछा- दूध तुमने लिया है?

मैंने कहा- हाँ !

किससे पूछकर?

किसी से नही। क्यो? मैंने कहा- दूधवाले को जल्दी थी तो उसने कहा कोई बर्तन लाकर मैं ही ले लूँ ! गाण्ड मराने जाना था क्या साले को ! वह बुदबुदाई।

इस पर मैं हँस दिया तो वह बोली- वो तेरा यार लगता था क्या? मुझसे नहीं पूछ सकता था?

आप नहा रही थी।

तो आकर दरवाजा तो खटखटाया होता?

मैं गया था पर आपको उस हालत में देखकर लौट आया।

क्यों इससे पहले तो छत पर से छुप-छुप कर देखता था इस बार क्या हुआ?

मैं सकपका गया।

क्यों जानकर फट गई।

तेरी माँ से तेरी शिकायत करुंगी।

प्लीज आंटी ! ऐसा मत करना ! मैं गिड़गिड़ाया।

ना तुझे सबक सिखाना जरुरी हैं, वह बोली।

मैंने उनके पैर पकड़ लिए और गिड़गिड़ाने लगा- प्लीज आंटी ! इतनी छोटी गलती की इतनी बड़ी सजा मत दो।

सजा तो और भी बड़ी मिलेगी, जब मैं कालोनी के सब लोगों को बताउंगी कि इनका लड़का छत पर से मेरे आंगन में झांकता है और हमारी गाण्ड देखता है।

मेरी बुरी तरह फट गई। मैं थोड़ा और गिड़गिड़ाया।

तब उन्होने पूछा- अच्छा ये बता तू मेरी गाण्ड क्यो देखता है?

बस दो बार देखी है।

और मेरी बेटी की?

एक बार ! वह भी गलती से। देखकर क्या करता है?

मुठ मारता हूँ।

यह बता कि किसकी गाण्ड ज्यादा सेक्सी है?

आपकी !

क्यों?

क्योंकि आपकी ज्यादा चौड़ी और मांसल है और आपका छेद भी बड़ा लगता है अंकल ने काफ़ी मेहनत की थी।

वह थोड़ा मुस्कराई।

मैं समझ गया कि लोहा गर्म हो रहा है।

मैं फिर बोला- जब आप चलती हैं तो आपके दो नितम्ब बारी-बारी ऐसे ऊपर नीचे होते हैं मानो कयामत चल रही हो।

और उन्होने फिर पूछा- और? बस- मैं बोला।

फिर वह बोली- तू बैठ मैं चाय लाती हूँ।

हमने सीढ़ियों पर बैठ कर चाय पी। इस दौरान वे काफ़ी खुल गई। उन्होने मेरी गर्ल-फ्रेन्ड के बारे में पूछा। उन्होने फिर पूछा कि मैंने किसी को चोदा है कि नहीं।

मैं बोला- नहीं ! अभी तक मौका नहीं मिला।

फिर वो बोली- मैं बर्तन रखकर अभी आई।

जब वह जा रही थी तो मैंने देखा कि उनकी मैक्सी उनकी गाण्ड के ठीक नीचे गीली हो गई थी। मैं समझ गया कि वह उत्तेजित है और उनकी बुर पानी छोड़ रही है। मैंने सोचा- साली बहुत अकड़ रही थी, मादरचोद को इतना उत्तेजित करता हूँ कि झड़ जाए।

वह आई और मेरे पास बैठ गई। मैंने कहा- एक बात पूछूं ? आंटी !

वह बोली- पूछ !

अंकल आपकी गाण्ड मारते थे न?

वह बोली- हाँ !

बहुत मजा आता है क्या मरवाने में?

कभी किसी की ले के देख !

एक बार ली है !

किसकी?

जहॉ पहले दूध लेने जाता था, उस दूध वाले की एक लड़की थी, मुझसे दो साल छोटी रही होगी। मैं रोज उसके साथ खेलता था। बगल में एक नया मकान बन रहा था। हम रोज उसमें लुक्का-छिप्पी खेलते थे।

अच्छा तो तूने उसे बहलाकर अपना शिकार बनाया?

सुनिए तो आंटी ! एक दिन उसने मुझसे कहा कि उसे मुझे कुछ दिखाना है।

अच्छा ! तो साली ने तुझे अपना शिकार बनाया?

पूरी बात बात तो सुनिए ! वह मुझे एक कमरे में ले गई और कहा- ऊपर कुछ किताबें है, उन्हें उतारिए।

मैंने टाँड पर रखी दो-तीन किताबें उतारी। वे सब अश्लील साहित्य से संबंधित थी।

मैंने उससे पूछा- तुझे पढ़ना आता है?

वह बोली- नहीं !

फिर मैंने कहा- ये तेरे काम की नहीं हैं।

उसने वि किताबें मुझसे ले ली और उन्हें उलटने-पलटने लगी, फिर बोली- एक और होगी !

मैंने उछलकर देखा- वह सही थी।

मैंने उसे उतारा। वह अश्लील चित्रों की पुस्तक थी, उसमें संभोग की विभिन्न क्रियाएँ दर्शाई गई थी।

मैंने पूछा- ये कहाँ से मिली तुझे?

वह बोली- यही थी, कई दिनों से यहीं पड़ी हैं।

वह बोली- ये लोग क्या कर रहे हैं?

मैंने कहा- तू किसी से कहेगी तो नहीं?

वह बोली- नहीं कहूँगी।

मैंने कहा- ये लोग चुदाई-चुदाई खेल रहे है।

यह कौन सा खेल है?

यह बड़ों का खेल है, तू बड़ी हो जाएगी तो तू भी खेल सकेगी !

अभी नहीं खेल सकते- वह बोली।

उसके लिए तेरा पति चाहिए !

तू नहीं खेल सकता?

मैं?

मैं सकपकाया, फिर सोचा कि देखने में क्या जाता है !

फिर उसने अपनी चड्डी सरका दी। मैंने भी अपनी पैंट की जिप खोल कर लूली बाहर निकाली। फिर उसके पीछे चिपक गया। कुछ देर में मेरी लूली बढ़ने लगी और मैंने पहली बार अपनी लूली को लण्ड होते देखा।

मैंने उसकी गाण्ड पर अपना दबाव बढ़ा दिया। उसे भी अच्छा लगा तो उसने और जोर लगाने को कहा।

इधर मेरी बातें सुनकर आंटी की साँसें तेज हो गई। वह बार- बार फिर ! फिर ! कह रही थी।

खैर मैं आगे बढ़ा !

फिर मैंने दो-चार बार धक्का लगाया और हमें काफ़ी अच्छा लगा। मैं फिर धक्का लगाने लगा।

एक दिन मैंने उसकी गाण्ड में अपना आधा लण्ड भी डाल दिया उसे काफ़ी दर्द हुआ और १० दिन तक उसने मुझे छूने नहीं दिया। लेकिन ज्यादा दिनों तक वह खुद को रोक नहीं पाई। फिर उसकी आदत हो गई। अब मैं अराम से अपना पूरा लण्ड उसकी गाण्ड में डालकर उसे चोदता। मुझे तो काफ़ी मजा आता पर उसकी प्यास शांत नहीं हो पा रही थी।

मेरा वीर्य भी निकलना शुरु हो गया। एक दिन उसकी बड़ी बहन ने हमें पकड़ लिया और फिर मैं उसे कभी नहीं चोद पाया।

आंटी ने कहा- बस बहुत हो गया ! मैं अभी आई !

वह उठी और जाने लगी। उनकी मैक्सी पीछे से चूतड़ के नीचे पूरी तरह भीग चुकी थी, फर्श भी गीला था। लोहा पूरी तरह गर्म हो चुका और हथौड़ा भी तैयार था। मैं उनके पीछे चल दिया, वे बाथरुम में घुसी पर दरवाजा बंद नहीं किया। मैं पहुँचा तो देखा- वह पेशाब के लिए मैक्सी उपर उठा कर बैठी थी और अपनी बुर में उंगली डाल-निकाल रही थी।

मैं उनके पीछे जाकर बैठ गया और अपनी उंगली उनकी गाण्ड में डाल दी, फिर अंदर-बाहर करने लगा। वह उत्तेजना में आवाजें निकालने लगी और अपनी गाण्ड उठाकर डॉगी स्टाइल में हो गई। फिर मैंने उनकी जांघों को फैलाया और अपनी जीभ से उनकी बुर चाटने लगा।

आनंद से उनका बदन ऐंठने लगा, आवाज ऊंची हो गई। वे जोर जोर से अपनी गाण्ड मेरे चेहरे पर मारने लगी, काबू करना मुश्किल हो रहा था तो मैंने अपना लोअर और चढ्ढी उतार फेंकी फिर मैंने उनकी चोटी को घोड़े की लगाम की तरह पकड़ी और उनकी गाण्ड में अपना लण्ड सटाया और चोटी को जोर से खीचा। वह दर्द की वजह से पीछे हटी और मेरा लण्ड उनकी गाण्ड में तेजी से घुस गया। वह चिल्लाई- अरे हरामी ! जानता नहीं कि बहुत दिनों से किसी ने मेरी गाण्ड नहीं मारी है ! आराम से नहीं कर सकता क्या !

फिर मैंने धीरे-धीरे धक्के लगाने शुरु किए। उन्हें आनंद आने लगा तो मैंने स्पीड बढ़ा दी। वह गाण्ड उठा-उठा कर मेरा साथ दे रही थी। फच्च-फच्च की आवाजें आ रही थी। वे आह ! आहऽऽ आउच ! पेल दे ! फॉड़ दे ! चोद दे ! छोड़ना मत साले ! करके चिल्ला रही थी।

मैं चरम पर पहुँच गया तो वे बोली कि वह झड़ने वाली है।

मैंने अपनी पूरी ताकत समेटी और स्पीड बढ़ा दी, वह झड़ गई। मैंने दो तीन इतने जोर के धक्के लगाए कि मानो मेरा लण्ड उनके मुँह से निकल आएगा।

मैं तेजी के साथ झड़ा और उनकी गाण्ड अपने गर्म लावे से भर दी। मैं उसी के ऊपर निढाल होकर लेट गया। हम कुत्ते की तरह हाँफ रहे थे। वह सीधी हुई और मेरा माथा चूमकर बोली- आज कई सालों बाद किसी ने इतनी मस्त चुदाई की है ! जी करता है कि तेरा लण्ड चूम लूँ।

मैंने कहा- तो चूम लो !

ला ! तू भी क्या याद करेगा कि किसी मादरचोद से पाला पड़ा़ है ! पर पहले एक कप चाय हो जाए ! यह बोलकर वह उठी और किचन में चली गई। मैंने अपना लण्ड साफ किया, कपड़े पहने और उसके पीछे हो लिया। हम दोनों बातें करने लगे।

बातों बातों में उन्होंने मुझे बताया कि उनके ताऊ का बेटा जो करीब उसकी ही उम्र का था, एक बार जाड़े में उसके यहाँ रहने आया। चूंकि उसके लिए सोने की कोई अलग से व्यवस्था नहीं थी इसलिए मैंने उसे अपने बगल में जगह दे दी। उसकी पैर फेंककर सोने की आदत थी। वह मेरे उपर अपना पैर डाल देता। मैंने कई बार उसका पैर अपने ऊपर से हटाया, उसे जगाया और कहा भी ठीक से सोए।

उसने कहा कि वह कोशिश करेगा !

पर कर न सका। फिर मेरी भी आदत हो गई। हम एक ही रजाई में चिपककर सोने लगे। एक दिन मैंने नींद में अपनी गाण्ड पर किसी कड़ी वस्तु का दबाव पाया। मेरी नींद खुल गई। मुझे लगा कि उसने अपनी जेब में कुछ रखा है और मैंने पलटकर उस चीज को पकड़ लिया। वह उसका औजार था। मैंने उसे खींचा तो मुझे अपनी गलती का अहसास हो गया। पर तब तक उसकी नींद खुल चुकी थी। उसने पूछा- क्या हुआ?

जब मैंने बताया तो वह हंस पड़ा।

मैंने पूछा- क्या हुआ?

तो उसने कहा कि तू इतनी बड़ी हो गई पर तुझे इतनी छोटी सी बात नहीं पता।

फिर उसने कहा- ऐसा हो जाता है, तेरी चिपक कर सोने की आदत नहीं है न, इसलिए तुझे अजीब लगा।

मैंने सोचा- सामान्य बात है, फिर मैंने ध्यान नहीं दिया।

मुझे भी अब अच्छा लगने लगा। एक दिन उसने रात अपना लण्ड मेरी गाण्ड से सटाकर कुछ धक्के लगाए तो मैंने कोइ विरोध नहीं किया। फिर क्या ! उसे हरी झण्डी मिल गई और वह चालू हो गया। वह रोज धक्के लगाता। वह मेरी चड्डी में हाथ डालकर मेरी गाण्ड व बुर सहलाने लगा। मुझे भी अच्छा लगने लगा। अब वह मेरी चड्डी उतारकर मेरी गाण्ड मारने लगा। पर जब वह वह मेरी बुर में धक्का लगाता तो मुझे ज्यादा आनंद आता। इसलिए मैं बार बार उसका लण्ड अपने बुर में सटाती और उसे धक्का लगाने को कहती। वह कुछ देर तक करता फिर गाण्ड मारने लगता।

खैर ये सब चलता रहा जब तक वह वापस नहीं चला गया। वह चला तो गया पर मुझे बुरी लत लगा गया। मेरी हवस बढ़ती गई। पहले मैंने उँगली डालना शुरु किया फिर मोमबत्ती फिर न जाने क्या क्या। मेरी झिल्ली भी फट चुकी थी।

दो साल बाद ताऊ के यहाँ शादी पड़ी। हम वहाँ गए। चूंकि गाँव का इलाका था इसलिए हमें खेत में जाना पड़ता।

एक दिन दोपहर में मैं फ्रेश होने निकली और गन्ने के एक खेत में घुस गई। जब मैं करके उठी तो पीछे से किसी ने मेरा मुँह जोर से बंद कर दिया। सामने ताऊ का लड़का आ गया और उसने मेरी सलवार का नाड़ा खोल दिया और उसे नीचे कर दिया फिर मेरी पैन्टी के उपर से ही मेरी बुर चाटने- चूसने लगा।

मुझे अपनी गाण्ड पर किसी हथौड़े जैसे लण्ड का दबाव महसूस हो रहा था। मैं बहुत दिनों से चुदवाना चाहती थी इसलिए प्रतिरोध नहीं किया तो उन्होंने मुझे छोड़ दिया। फिर मेरी पैन्टी उतार दी और मुझे टाँगें फैलाने को कहा।

मैंने वैसा किया तो एक ने मेरी बुर और दूसरे ने गाण्ड चाटनी शुरु कर दी। शीघ्र ही मैं झड़ गई।

फिर एक ने पीछे से और दूसरे ने आगे से डालना शुरु किया। थोड़ा दर्द हुआ पर जल्दी सब ठीक हो गया। दोनों ने मुझे जमकर चोदा। मेरी दो साल की प्यास मिटा दी। हम वहाँ एक हफ़्ते रुके, इस दौरान मैंने ६ बार चुदाई करवाई।

आंटी की कहानी सुनकर मैं फिर उत्तेजित हो गया। मैंने उनके पास पहुँच कर उनको अपनी बाहों में भर लिया, उनसे चूमा-चाटी करने लगा। मैंने गैस बुझा दी और आंटी से कहा- चाय बाद में पियूंगा, पहले मैं दूध पियूंगा।

वह मुस्कराई।

मैं उन्हें उनके बेडरुम में ले आया और बिस्तर पर लिटा दिया और फिर मैक्सी उतार दी। पूरा मैदान साफ था। मैंने अपने कपड़े भी उतार फेंके और उनके ऊपर लेट गया। मैं उनके होठों को अपने मुँह में भरकर चूसने लगा। वे पूरी तरह लाल हो गए।

फिर मैं नीचे सरका और चूचियों पर टूट पड़ा। बारी बारी से दोनो चूचियाँ मुँह में भरकर चूसने लगा। दोनों एकदम कड़ी होकर सीधी तन गई। आंटी का बुरा हाल था। उनकी बुर लगातार पानी छोड़ रही थी। वे आह आउच कर रही थी। उनकी साँसें काफ़ी तेज चल रही थी।

फिर उन्होंने कहा- अब मेरी बारी !

वह मेरी छाती पर बैठ गई और मेरा लण्ड चूसने लगी। उनकी बुर लगातार मेरे सीने पर पानी छोड़ रही थी। चिकनाई के कारण उनकी गाण्ड आगे पीछे सरक रही थी। मैंने उनकी जाँघ पकड़ कर उन्हें अपनी ओर खींचा और उसकी बुर को ठीक अपने मुँह पर ला दिया और चाटने लगा। काफी देर तक हम यह करते रहे और फिर पहले मैं तेजी से झड़ा बाद में वो।

हम निढाल होकर उसी तरह पड़े रहे। उनकी बुर मेरे मुँह पर और मेरा लण्ड उनके मुँह में पड़ा रहा।

बाद में मैं उठा, खुद साफ किया और घर चला आया। फिर जितने दिन मैं पानी के लिए उनके यहाँ गया, रोज दो बार उन्हें चोदा। वह पूरी तरह मेरी कायल हो चुकी थी।

जब भी मैं अपनी छत पर अकेला होता तो वह आंगन में आ जाती और मुझे अपनी गाण्ड, बुर चूचियाँ दिखाती। वह मेरे सामने हस्तमैथुन भी करती थी।

बाद में मैंने उनकी बेटी नेहा को भी चोदा। फिर माँ बेटी साथ-साथ चुदाने लगी।

Thanks Me Mast for His wonderful contributiuon

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