ट्रिंग ट्रिंग..
 
सुबह सुबह कौन आया होगा.. ये सब सोचे हुए मैं अपने नए घर के दरवाजे के तरफ बड़ा, मैंने ये फ्लैट नया ही लिया था और किसी के आने की उम्मीद भी नहीं थी.
 
"नमस्कार साहेब" मेरा नाम सुनीता है. नीचे वॉचमन ने बताया की आप नए आये हैं, इसीलिए सोचा आपसे आकर मिलूं, आपको किसी काम वाली की तलाश है साहेब?
 
उफ़ उसकी आवाज़ में गजब का नशा था. मैंने ऊपर से निचे तक उसे देखा. उसकी उम्र करीब ३० साल के करीब, ५ फिट और सावंला रंग. भरा पूरा बदन और नीले साडी में सुनीता लाजवाब लग रही थी.
 
मैंने उसे अन्दर बुलाया और सोफे पे बठने का इशारा किया. सुनीता वहां बैठ कर मेरे घर में देखने लगी. अचानक मेरा धयान अपने आप पे गया. मैं सिर्फ एक बोक्सेर शोर्ट्स में सुनीता के सामने खडा था, और तो और मैंने चड्डी भी नहीं पहने था लेकिन फिर भी सुनीता बिलकुल नोर्मल थी. ये देखकर मुझे बड़ा अच्छा लगा, क्यंकि इससे मालूम चलता है की सुनीता इससे  पहले भी काम कर चुकी है और उससे मेरे यहाँ काम करने में कोई प्रॉब्लम भी नहीं है. फिर मैं भी उससके सामने बैठ कर उसका इंटरव्यू लेना शुरु कर दिया.
 
कभी किस के यहाँ काम किया है?
 
नहीं साहब, अब तक मैं सिर्फ अपने घर में ही काम किया करती थी. लेकिन पिछले महीने मेरा मर्द मुझे छोड़ कर दूसरी औरत के पास चला गया है, मेरी एक लड़की है साहब उसका और अपना पेट पालने के लिए मुझे काम तो करने पड़ेगा और इसीलिए मैं कहीं काम कोज रही हूँ. लेकिन आप टेंशन ना लो, मैं आपकी खूब सेवा करुँगी, आपको कभी शिकायत का मौका नहीं दूंगी.
 
अच्छा लेकिन पैसे कितने लोगी?
 
बस क्या साहेब, आप अपना समज के दे देना. अब मैंने कहीं काम तोः नहीं किया हैं, मैं कैसे बोल सकती हूँ.
 
पिछले घर में मेरी बाई २ हज्जार रुपये लेती थी सारे काम करने का.
 
सारा काम, मतलब साहेब, ठीक ठीक बताओ ना. मैं उसके आखों में मस्ती देख रहा था.
 
सारा काम मतलब, खाना, बर्तन, झाडू, पोचा और कपडे. मैंने उसकी आखों में देखते हुए बोला. जैसे कहना चाह रहा हूँ की वोह काम तोह मैं तुमसे करा ही लूँगा जानेमन, बस एक बार हाँ तो बोल.
 
ठीक है साहेब मैं २ हज़ार में काम करुँगी, आज से ही काम शुरु करती हूँ. और इतना कहकर वोः मेरे kitchen में चली गयी और बर्तन साफ़ करने लगी. मैं भी फ्रेश होने के लिए बाथरूम में चला गया.
 
मेरा बाथरूम से मेरा kitchen बिलकुल सामने था. मैं जैसे ही फ्रेश हो कर बाहर आया सुनीता मेरे सामने चाय का कप लेकर हाज़िर हो गयी. मैं काफी खुश हुआ और पेपर पढ़ते हुए चाय के मज़े लेने लगा, और सुनीता वापस kitchen में चली गयी. अचानक मेरे अन्दर का सैतान जाग गया और मेरे मन् में सुनीता को लगाने का मन करने लगा. मैंने चुप चाप सुनीता की खबर लेना शुरु किया. वोः बाहर झाडू कर रही थी. मैंने उससे निहारना शुरु किया.
 
उसने हलके उजले कलर का बलाउज पहना था, उसके मम्मे काफी बड़े लग रहे थे और झाडू देते समय काफी झूल रहे थे, शायेद सुनीता ने ब्रा नहीं पहनी थी, येः सोच कर ही मेरा टुनटुना खडा होने लगा. सुनीता काफी ध्यान से झाडू दे रही थी और उसका धयान मेरे तरफ नहीं था, और तो और उसका पल्लू भी अपनी जगह से हिल गया था, जिसके कारन उसकी नेक्क लाइन काफी आराम से दिख रही थी. मैंने उस्सी समय उसके मम्मे का साइज़ सोच लिए सिर्फ निप्पल का रंग सोचना बाकि था. उसकी गांड भी काफी मस्त दिख रही थी, पता चल रहा था की उसके अन्दर कुछ और नहीं पहन रखा है. मैं तोः बस जी भर के उससे देख रहा था. तभी सुनीता ने अचानक मेरे ओर देखा और मेरी नज़रों को पकड़ लिया. मैं एकदम से कहीं और देखने लगा, लेकिन सुनीता बिलकुल नोरमॉल रही और अपना काम करते रही. यहाँ तक की उसने अपना पल्लू भी नहीं ठीक किया, बल्कि अब मुझे उसके मम्मे काफी आराम से और उसके निप्प्ले तक दिख रहे थे. शाएद उसके चूत में भी आग लगी होगी. जैसे मेरे लंड  में उसको चोदने का अरमान घर कर चूका थे.
 
साहेब जी आज का काम हो गया क्या मैं घर जाऊँ?
 
हाँ सुनीता, तुम जा सकती हूँ लेकिन कल टाइम से आ जाना.
 
बिलकुल साहेब, हाँ साहेब क्या मैं आपका बाथरूम में नहा सकती हूँ? मेरे यहाँ पानी का प्रॉब्लम है.
 
मैं तोः जैसे यही सुनने का इंतज़ार कर रहा था, और उससे हाँ करके अपने कमरे में आगया. मेरे कमरे से उस बाथरूम का पूरा नज़ारा देखा जा सकता था, क्यंकि वहां एक चोर सुराग था जिसके बारे में मुझे मकान मालिक ने बताया था, वोः उससे ठीक भी करने वाला था, लेकिन अब तोः मुझे इस्सी सुराग से जन्नत का नज़ारा मिलने वाला है.
 
आज इतना ही.. बाकि अगली बार
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