सुनीता बाथरूम में अपनी साड़ी उतार  रही थी, और यहाँ मेरा हाथ शोर्ट्स के अंदर पोक्केट बिल्लिअर्ड्स खेलने की तैयारी कर रहा था. सुनीता ने अपनी साड़ी के अंदर एक नाम मात्र पेतीकोअत पहने थी, उसकी गांड पीछे से काफी मस्त लग रही थी, ना तो टांगों में बाल थे और उसकी कमर तो बिलकुल कंट्रोल में थी, इतने ज्याद मोटापा नहीं था, जो मॉस था उससे तो चूसने और दबाने में मज़ा ही आने वाला था. जब मैं उसके ऊपर से उसको चोदुंगा तब उसके गांड पे हाथ फेरने में काफी मज़ा आएगा, मस्त मॉल था उसके गांड में. मुझे तो उसके पिछवाडे पे ही दिल आ गया था और मैं मन ही मन उसकी गांड का गेम बजाने का प्लान बनाने लगा था. तब तक उसने अपना ब्लौसे खोल कर दरवाज़े के पीछे रखा और उस्सी समय मेरी किस्मत खुल गयी, क्योंकि मैंने उसको ब्लौसे के साथ एक नेल कत्टर भी रखते देखा, नेल कट्टर देखते ही मेरी खुशी का ठिकाना नहीं रहा और क्यों न हो, वो नेल कट्टर मेरा जो था. अब तो मैं मज़े से सुनीता के गदराया बदन का मज़ा लेने लगा क्योंकि मुझे मालूम था की आज तो मेरे लंड को सुनीता की गांड और चूत दोनों नसीब होने वाली थी.

 
सुनीता ये सब से बिलकुल अंजान मस्ती में अपने मम्मे में साबुन लगा रही थी. वैसे बिना कपड़ों के कोई भी लड़की मस्त ही लगती है लेकिन सुनीता का क्या कहना, उसके बाल गिले होने के कारण पीछे उसके कमर पे आ गए थे. सुनीता के पुरे बदन पे एक भी बाल नहीं था. उसकी चूची एक दम बड़े और तने थे. उसकी निप्पल बिलकुल काले रंग के थे और एक दम तने थे.  लग ही नहीं रहा था की उसकी एक बेटी है. उसके हर अंग से भरपूर जवानी टपक रही थी. मैं तो बस उसके चुचे और गांड का दीवाना हुआ जा रहा था और बेताबी से उसके बाहर निकलने का इन्तेज़ार कर रहा था. लेकिन सुनीता तो जैसे बरसों की प्यासी थी और पानी से ही अपनी प्यास भुजाये जा रही थी. यहाँ मेरा लंड उसकी गांड में कोहराम मचने के लिए मरा जा रहा था और सुनीता अपनी चूत में ऊँगली कर के ही पानी निकाल रही थी. मैंने चुप चाप उसकी एक दो फोटो निकल लिया और उसके बाहर आने का इंतज़ार करने लगा.
 
सुनीता जब बाथरूम से नहा के निकली तो उसके देखकर मैं अपने आप पे काबू नहीं कर पा रहा था. लेकिन मैंने किसी तरह अपने आपको कण्ट्रोल किया. आखिर जल्दी में काम तो शैतान का होता है. और मेरा असूल है लड़की और काफ़ी दोनों में कोई जल्दी करने की जरुरत नहीं है, जितना आराम से करोगे उतना मज़ा आएगा. खैर जब सुनीता बाहर आ गयी तो मैंने उससे अपने पास बुलाया.
 
सारा काम हो गया?
 
हाँ साहेब, अब मैं जाऊँ, कल टाइम से आ जाउंगी?
हाँ हाँ बिलकुल मैं तुम्हें कहाँ अपने यहाँ सोने के लिए कह रहा हूँ, मैंने मुस्कुराते हुए उसे कहा.
 
सुनीता ने शायद ये एक्स्पेक्ट नहीं किया होगा, इसीलिए सरमा कर अपनी आँखें नीची कर ली.
 
फिर मैंने थोड़ा सीरियस टोन में बोला, देखो सुनीता है मैं यहाँ अकेले रहता हूँ और तुम पे भरोसा करता हूँ इसीलिए तुम्हें अपने यहाँ काम दिया है.
 
मालूम है साहेब, और मैं आपका ये उपकार ज़िंदगी भर नहीं भूलूंगी, आपने मेरे और मेरी बेटी की ज़िंदगी बचा दी.
 
लेकिन सुनीता इससे पहले की मैं तुम पे विस्वास करूँ उसके लिए आज मैं तुम्हारा तलाशी लेना चाहता हूँ?
 
ये सुन कर सुनीता की आँखें खुली खुली रह गयी,
 
ऐसा क्यो साहब, क्या आपको मेरे पर शक है?
 
पागल हो क्या सुनीता, मैं क्यों तुमपे शक करूँगा, और ना ही मैं तुम्हारा तलाशी हमेशा लूँगा, ये तो बस कभी कभी अचानक से होगा, और इसका एकमात्र कारण होगा तुम पे बिस्वास करना. आखिर मैं तुम को जानता ही कितना टाइम से हूँ, इसीलिए तुम्हें ये तो करना ही पड़ेगा.
 
सुनीता को मालूम नहीं था की मैं क्या चीज हूँ, पूरे कंपनी में मेरे जैसा सेल्स का कोई बन्दा नहीं है. अगर किसी को कन्विंस करना है तो बस मेरे पास बैठा दो, एक घंटे में प्रोडक्ट अंदर, चैक बाहर, और ये तो एक बाई है, मस्त टनाटन भरी पूरी बाई, जिसको खाने में आज मुझे स्वर्ग के दर्शन होने वाले हैं.
 
ठीक है साहब, लेकिन आप इसके बारे में किसी को कुछ नहीं बताना.
 
मैं क्यों बोलने लगा, और इसमें बताने लायक है ही क्या, ये तो मेरे घर की बात है. घर में ही रहेगी.
 
मैं सुनीता से बात करते करते उससे पास चला गया था, जैसे ही उसने तलाशी के लिए हामी भरी, मेरा मन तो उसके चुचियों से खेलने और चूसने के लिए बेताब हो उठा, लेकिन कंट्रोल.
 
To Be Continued
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